अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किए गए उस नियम को खारिज कर दिया है, जिसके तहत एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट (EAD) के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन को अचानक रोक दिया गया था। हालांकि, यह कानूनी राहत पूरे देश के लिए लागू नहीं होगी और इसका लाभ फिलहाल केवल उन सात याचिकाकर्ताओं को ही मिलेगा जिन्होंने इस नियम को अदालत में चुनौती दी थी।
इन सातों H-4 वीज़ा धारकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जो दरअसल H-1B वीज़ा पर काम करने वाले उन पेशेवरों के जीवनसाथी हैं जिनके ग्रीन कार्ड आवेदन मंजूर हो चुके हैं।
इनका मुख्य तर्क यह था कि बिना किसी सार्वजनिक परामर्श के EAD एक्सटेंशन की सुविधा छीनने से भारी पैमाने पर लोगों की नौकरी जा सकती है, खासकर तब जब अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) में प्रक्रियात्मक देरी की समस्या लगातार बनी हुई है।
अमेरिका में एक लाख से अधिक भारतीय जीवनसाथी, जिनमें मुख्य रूप से महिलाएं शामिल हैं, EAD धारक हैं। साल 2016 में एक नियम पेश किया गया था, जिसमें EAD की समयसीमा समाप्त होने के बाद 180 दिनों के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन की अनुमति दी गई थी, ताकि पात्र जीवनसाथी अपने रिन्यूअल आवेदन की प्रक्रिया के दौरान अपना काम जारी रख सकें।
इसके बाद, स्प्रिंग 2022 में USCIS ने इस एक्सटेंशन अवधि को अस्थायी रूप से बढ़ाकर 540 दिन कर दिया था। आवेदनों में देरी के कारण रोजगार में आने वाली रुकावटों को रोकने के उद्देश्य से, जनवरी 2025 से इस बढ़ाई गई अवधि को स्थायी कर दिया गया था।
लेकिन, अक्टूबर 2025 में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने एक अंतरिम फाइनल रूल के जरिए इस ऑटोमैटिक एक्सटेंशन व्यवस्था को अचानक और पूरी तरह से समाप्त कर दिया था।
अदालत में दायर मुकदमे में इस बात पर जोर दिया गया कि H-4 जीवनसाथी अपने EAD को रिन्यू करने के लिए मौजूदा वर्क परमिट के खत्म होने के 180 दिन के भीतर ही आवेदन कर सकते हैं। चूंकि H-4 वीज़ा का एक्सटेंशन H-1B वर्कर के एक्सटेंशन के साथ ही फाइल किया जाना अनिवार्य है, इसलिए नियोक्ता की तरफ से H-1B आवेदन में होने वाली किसी भी देरी का सीधा असर आश्रित जीवनसाथी की रिन्यूअल विंडो पर पड़ता है।
याचिकाकर्ताओं ने USCIS की उस कार्यप्रणाली की ओर भी ध्यान दिलाया जिसमें आमतौर पर 180 दिन से ज्यादा का समय लग ही जाता है। उनका कहना था कि ऑटोमैटिक एक्सटेंशन के अभाव में कई H-4 EAD धारकों का अपनी नौकरी गंवाना लगभग तय हो जाएगा।
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की अमेरिकी अदालत ने 10 सितंबर 2026 को जारी अपने आदेश में सातों याचिकाकर्ताओं के पक्ष में प्रारंभिक निषेधाज्ञा (प्रारंभिक रोक) दे दी है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पाया कि DHS ने इस नए नियम को पेश करते समय प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम (APA) के तहत जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था।
सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अपने इस कदम को सही ठहराने की कोशिश की थी। सरकारी पक्ष का तर्क था कि ऑटोमैटिक एक्सटेंशन से पृष्ठभूमि की जांच (बैकग्राउंड चेक) और पात्रता समीक्षा पूरी होने से पहले ही व्यक्तियों को काम जारी रखने की अनुमति मिल जाती है।
हालांकि, जज डेविड ओ. कार्टर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि DHS ऐसे किसी भी आपातकालीन हालात को साबित करने में विफल रहा है, जिसके आधार पर सामान्य ‘नोटिस और टिप्पणी’ की प्रक्रिया को दरकिनार किया जा सके। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सरकार के पास पहले से ही निरंतर-जांच (कंटीन्यूअस-वेटिंग) तंत्र मौजूद हैं।
अदालत ने यह भी पाया कि DHS ने नियम में बदलाव करते समय H-4 EAD धारकों, उनके परिवारों और उनके नियोक्ताओं के हितों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया था।
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले आव्रजन मुकदमेबाजी के वकील जोनाथन वास्डेन ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि कोर्ट ने सरकार के आपातकाल के दावों और नियम बनाने की मूल आवश्यकताओं को पूरा न करने की विफलता, दोनों को खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा कि इसका सीधा मतलब है कि सरकार हाल के महीनों में जिस अंतिम नियम की ओर इशारा कर रही थी, वह शुरू होने से पहले ही खत्म (डेड ऑन अराइवल) हो चुका है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि देशव्यापी निषेधाज्ञा के अभाव में, समान लाभ और राहत चाहने वाले अन्य H-4 वीज़ा धारकों को भी अब अपने हक़ के लिए अदालत का रुख करना होगा।
यह भी पढ़ें-
क्या ‘हनुमान अंश’ के सीक्वल में नजर आएंगे नीम करोली बाबा के भक्त अनुष्का, विराट और जूलिया रॉबर्ट्स?










