comScore नीट परीक्षा: मेडिकल में अंग्रेजी का दबदबा, गुजराती माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

नीट परीक्षा: मेडिकल में अंग्रेजी का दबदबा, गुजराती माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट

| Updated: July 27, 2026 12:39

मेडिकल में अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव और गुजराती स्टडी मटेरियल की कमी से छात्रों का मोहभंग, परीक्षा परिणामों और छात्रों की संख्या में दर्ज हुई भारी गिरावट।

सात साल पहले गुजरात में 60,000 छात्रों ने गुजराती भाषा में नीट (NEET) की परीक्षा दी थी। लेकिन इस साल यह आंकड़ा घटकर 50,000 से भी कम रह गया है।

शिक्षाविदों का मानना है कि इसके पीछे अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा के प्रति बढ़ता रुझान एक बड़ी वजह है। मेडिकल की पढ़ाई में अंग्रेजी शब्दावली का दबदबा और गुजराती में संदर्भ पुस्तकों (reference books) की कमी भी छात्रों को इससे दूर कर रही है।

इसके अलावा कोचिंग संस्थानों का कहना है कि उनके पास ऐसे शिक्षकों की भी भारी कमी है, जो नीट के विषयों को गुजराती में प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।

हालांकि, इस गिरावट के बावजूद पूरे भारत में नीट के लिए गुजराती अभी भी दूसरी सबसे पसंदीदा क्षेत्रीय भाषा बनी हुई है।

साल 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजराती ने पंजीकरण के मामले में बंगाली (38,577), तमिल (29,845) और असमिया (2,147) को काफी पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में 3.4 लाख छात्रों के साथ हिंदी पहले स्थान पर काबिज है।

एक कोचिंग सेंटर के मालिक और शिक्षक गोविंद तिवारी बताते हैं कि इस बदलाव के कारण पूरी तरह से व्यावहारिक हैं। उनका कहना है कि गुजराती माध्यम के स्कूलों में दाखिले घट रहे हैं, जबकि अंग्रेजी माध्यम में छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

तिवारी ने आगे कहा कि छात्रों के लिए अंग्रेजी में तैयारी करना ज्यादा आसान होता है। अंततः उन्हें मेडिकल की पढ़ाई और अपने पेशे में अंग्रेजी शब्दावली का ही इस्तेमाल करना होता है।

नीट की तैयारी कर रहे छात्र प्रकाश पटेल ने भी इस बात पर अपनी सहमति जताई। उन्होंने बताया कि नीट की तैयारी के लिए ज्यादातर स्टडी और रेफरेंस मटेरियल मुख्य रूप से केवल अंग्रेजी में ही उपलब्ध है।

पटेल के मुताबिक, ऐसे बहुत कम शिक्षक हैं जो गुजराती में नीट के विषयों को अच्छी तरह से समझा सकते हैं। शहरी प्रभाव के कारण भी कई छात्र अंग्रेजी में पढ़ाई और कोचिंग लेना पसंद कर रहे हैं।

जो छात्र गुजराती माध्यम से पढ़ाई करते भी हैं, उन्हें जल्द ही अंग्रेजी संसाधनों की मदद लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। 16 साल का अनुभव रखने वाले जीव विज्ञान के शिक्षक ओम प्रकाश माहेश्वरी ने इस बदलाव को बहुत करीब से देखा है।

माहेश्वरी बताते हैं कि दिन-ब-दिन अंग्रेजी माध्यम के छात्रों की संख्या बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गुजराती माध्यम से परीक्षा की तैयारी करते समय भी छात्रों को अंग्रेजी सामग्री पर निर्भर रहना ही पड़ता है।

भाषा के इस बड़े बदलाव के साथ-साथ गुजरात के समग्र परीक्षा परिणाम में भी एक चिंताजनक गिरावट देखने को मिली है।

साल 2025 में गुजरात से 81,605 उम्मीदवारों ने नीट की परीक्षा दी थी, जिनमें से 50,040 ने सफलता हासिल की थी।

वहीं, साल 2026 आते-आते परीक्षार्थियों की संख्या घटकर 79,190 रह गई और सफल होने वाले छात्रों का आंकड़ा भी तेजी से गिरकर 38,146 पर आ गया।

हालांकि यह अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि भाषा के इस रुझान और परीक्षा परिणामों में गिरावट के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, लेकिन दोनों ही मामलों में रुझान नीचे की ओर ही जा रहा है।

यह भी पढ़ें-

भारी विरोध और पुलिस लाठीचार्ज के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, कहा- ‘राष्ट्रीय एकता के लिए छोड़ा प…

कुदरत का अनोखा खेल: वलसाड बना देश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला, तो द्वारका की धरती रह गई प्यासी

Your email address will not be published. Required fields are marked *