प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए गुजरात सरकार द्वारा चलाई जा रही वित्तीय सहायता योजना में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। सीआईडी (क्राइम) ने इस सरकारी योजना से 16.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन उम्मीदवारों के नाम पर पैसा ऐंठने का आरोप है, जो कभी किसी कोचिंग क्लास में गए ही नहीं।
इस पूरे मामले की शिकायत गुजरात अनारक्षित शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास निगम (GUEEDC) के एक अधिकारी संदीप चौधरी (39) ने दर्ज कराई है। उन्होंने गांधीनगर के सीआईडी (क्राइम) पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर दर्ज करवाते हुए इस धांधली की जानकारी दी।
आरोपियों की पहचान अहमदाबाद के निकोल में साइबर कैफे चलाने वाले जिग्नेश शाह और ओधव निवासी पूजनकुमार चौहान के रूप में हुई है। दर्ज एफआईआर में इस बात का भी अंदेशा जताया गया है कि जांच आगे बढ़ने पर इस धोखाधड़ी में शामिल कुछ अन्य अज्ञात लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
शिकायत के मुताबिक, इस शातिर जोड़ी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग के लिए निगम की वित्तीय सहायता योजना का गलत फायदा उठाया। उन्होंने इसके तहत अहमदाबाद, खेड़ा और सूरत जिलों से 100 से अधिक छात्रों का नामांकन करवा दिया था।
जांचकर्ताओं ने बताया कि इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन जमा करने के एवज में आरोपियों ने भारी रकम की वसूली की। उन्होंने अहमदाबाद और खेड़ा जिलों के छात्रों से 7.3 लाख रुपये और सूरत के छात्रों से 9.3 लाख रुपये कथित तौर पर इकट्ठा किए थे।
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने कोचिंग संस्थानों द्वारा जारी की जाने वाली फर्जी रसीदें और पावती तैयार कीं। छात्रों के कभी कोचिंग क्लास न जाने के बावजूद इन रसीदों को असली बताकर विभाग में जमा कर दिया गया। इन्हीं जाली दस्तावेजों के सहारे उन्होंने धोखाधड़ी करते हुए सरकार से कुल 16.5 लाख रुपये की सहायता राशि हड़प ली।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इनमें आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश रचने के साथ-साथ सरकारी धन के गबन से जुड़े गंभीर अपराध शामिल हैं।
सीआईडी (क्राइम) के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की अब गहराई से जांच की जाएगी। इसमें कोचिंग संस्थानों, साइबर कैफे संचालकों और उन सभी लोगों की संभावित संलिप्तता की पड़ताल होगी जिन्होंने इन फर्जी आवेदनों को आगे बढ़ाने में मदद की हो। जांच एजेंसियां इस बात की भी गहन जांच कर रही हैं कि क्या इस जन-कल्याणकारी योजना के तहत अन्य जिलों से आए आवेदनों में भी इसी तरह की कोई गड़बड़ी हुई है।
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