भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान गुजरात में कुल 3,707.7 करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी दर्ज की गई है। इस भारी-भरकम आंकड़े के साथ बैंक फ्रॉड के मामले में यह राज्य भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में छठे स्थान पर पहुंच गया है।
समय के साथ यह समस्या घटने के बजाय और विकराल होती जा रही है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2023-24 में धोखाधड़ी की रकम 986.2 करोड़ रुपये थी। वहीं 2024-25 में यह 30.4 प्रतिशत बढ़कर 1,285.9 करोड़ रुपये हो गई। इसके बाद 2025-26 में इसमें 11.6 प्रतिशत का और इजाफा हुआ और यह आंकड़ा 1,435.6 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कुल मिलाकर देखें तो तीन साल पहले की तुलना में फ्रॉड की रकम में 45.6 प्रतिशत की भयानक वृद्धि दर्ज की गई है।
पूरे देश की बात करें तो केवल महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और तमिलनाडु ने ही गुजरात से ज्यादा धोखाधड़ी दर्ज की है। इस सूची में महाराष्ट्र 32,297.9 करोड़ रुपये के फ्रॉड के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद दिल्ली में 16,396.6 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल में 10,309.6 करोड़ रुपये की ठगी हुई। हालांकि, कर्नाटक (2,916 करोड़ रुपये), उत्तर प्रदेश (2,699.7 करोड़ रुपये) और पंजाब (2,253.9 करोड़ रुपये) जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्य इस मामले में गुजरात से पीछे हैं।
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग बेहतर होने और नागरिकों में जागरूकता बढ़ने के कारण इन आंकड़ों में उछाल दिख रहा है। अब कई बैंकों ने भी अपने ग्राहकों को अलर्ट करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए हैं और अपने आंतरिक निगरानी सिस्टम को काफी मजबूत किया है।
साइबर अपराध मामलों की जांच कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पिछले चार-पांच सालों में बैंकिंग धोखाधड़ी के तरीकों में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। जालसाज अभी भी फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। लोग दुर्भावनापूर्ण एपीके (APK) लिंक, फर्जी केवाईसी (KYC) अपडेट अनुरोध, क्रेडिट कार्ड ऑफर या बिल भुगतान जैसे झांसों में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा कर बैठते हैं। इन साइबर अपराधियों का सबसे आसान शिकार अक्सर बुजुर्ग नागरिक होते हैं, जो तकनीक को लेकर बहुत ज्यादा सहज नहीं होते।
ठगी गई रकम की वापसी को लेकर इस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अगर पीड़ित धोखाधड़ी के पहले घंटे के भीतर ही साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करा दे, तो पैसे फ्रीज होने या वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। समय पर की गई शिकायत से बैंकों और अन्य एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई करने का मौका मिलता है। लेकिन, ज्यादातर पीड़ित पुलिस या हेल्पलाइन तक पहुंचने में काफी देर कर देते हैं, जिससे पैसे वापस मिलने की उम्मीद धुंधली पड़ जाती है। स्टेट सीआईडी क्राइम के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक और वित्तीय केंद्रों में ही बैंक फ्रॉड के मामले सबसे ज्यादा केंद्रित हैं। पिछले तीन वर्षों में शीर्ष के छह राज्यों ने मिलकर 72,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी दर्ज की है, और उच्च मूल्य वाले राज्यों के इस समूह में गुजरात मजबूती से शामिल है।
रकम वापसी की बात करें तो स्थिति बेहद निराशाजनक है। रिकवरी में बढ़ोतरी के दावों के बावजूद, गुजरात में तीन वित्तीय वर्षों के दौरान दर्ज 3,707.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में से बैंक केवल 96.58 करोड़ रुपये ही वापस ला सके हैं, जो कुल रकम का मात्र 2.6 प्रतिशत है।
देश के अन्य प्रमुख राज्यों में भी रिकवरी का यही हाल है। महाराष्ट्र ने रिपोर्ट की गई 32,297.9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में से सिर्फ 3 प्रतिशत रकम वसूल की है। वहीं कर्नाटक की रिकवरी दर महज 2.3 प्रतिशत रही। हालांकि, इन सबके बीच पश्चिम बंगाल ने एक बड़ा अपवाद पेश किया है। इस राज्य ने 10,309.6 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड में से 16.1 प्रतिशत पैसा सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया है।
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