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न्याय की आस और पिता का अटूट प्रेम: IIM अहमदाबाद में जान गंवाने वाले होनहार बेटे की याद में बनवाया मंदिर

| Updated: August 4, 2026 15:55

IIM-A के होनहार छात्र अक्षित की मौत के 2 साल बाद भी पुलिस खाली हाथ; एफआईआर तक दर्ज नहीं होने पर हताश पिता ने गांव में बनवाया बेटे का मंदिर, लड़ रहे हैं न्याय की आखिरी लड़ाई।

आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) कैंपस में करीब दो साल पहले एक छात्र अक्षित भुक्या ने आत्महत्या कर ली थी। आज भी उनके पिता हेमंत भुक्या अपने बेटे के लिए न्याय की लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी संघर्ष के बीच पिता ने अपने होनहार बेटे की याद में एक मंदिर का निर्माण करवाया है। उनका मानना है कि यह मंदिर उन्हें इंसाफ की इस राह पर हिम्मत और हौसला देगा।

अक्षित भुक्या (26 वर्ष) संस्थान में सेकंड ईयर के पीजीपी (PGP) छात्र थे। वह आईआईएम-ए में आयोजित एक कार्यक्रम के को-ऑर्डिनेटर भी थे। 26 सितंबर 2024 को उनका शव डॉर्म नंबर 21 के कमरा नंबर 28 में फंदे से लटकता हुआ मिला था।

अक्षित के पिता हेमंत भुक्या तेलंगाना के वारंगल जिले स्थित हनमकोंडा के निवासी हैं और पेशे से समाजशास्त्र के शिक्षक हैं। उन्होंने संस्थान के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि एक कार्यक्रम के लिए किसी तीसरे पक्ष द्वारा आईआईएम-ए के लोगो (Logo) का इस्तेमाल किए जाने को लेकर अक्षित पर भारी दबाव डाला गया और उसे प्रताड़ित किया गया।

इस मामले में पुलिस की जांच में कई बाधाएं सामने आई हैं। हैरानी की बात यह है कि अक्षित की मौत के मामले में अब तक कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, पिता हेमंत ने अब ठान लिया है कि वह इस मामले को अंतिम नतीजे तक लेकर जाएंगे।

हेमंत भुक्या याद करते हुए बताते हैं कि अक्षित कक्षा 10वीं और 12वीं में स्टेट टॉपर रहा था। वह मानसिक रूप से बहुत मजबूत व्यक्तित्व वाला युवा था। कोविड महामारी और लॉकडाउन के मुश्किल वक्त में उसने लोगों को जीवन जीने के लिए काउंसलिंग भी दी थी। पिता का स्पष्ट कहना है कि यदि ऐसे समझदार बेटे ने आत्महत्या की है, तो निश्चित रूप से उस पर बहुत भयानक दबाव बनाया गया होगा।

लगातार टूटती उम्मीदों के बीच, शोकाकुल पिता ने अक्षित की यादों को हमेशा के लिए जीवंत रखने का फैसला किया। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने पैतृक गांव चंदिया थांडा में अपने बेटे का एक मंदिर बनवा दिया। यह मंदिर करीब आठ महीने पहले बनकर तैयार हुआ था और पिता रोजाना अपने बेटे से मिलने यहां आते हैं।

यह मंदिर पूरे परिवार के लिए एक बड़ा संबल बन गया है। अक्षित की मां इस गहरे सदमे से अब तक नहीं उबर पाई हैं और उनका इलाज चल रहा है। पिता के अनुसार, बेटे की याद में बना यह मंदिर ही परिवार को इस मुश्किल वक्त में मानसिक शांति और आगे बढ़ने की ताकत देता है।

न्याय की इस लड़ाई में पिता ने एक ‘जिम्मेदार व्यक्ति’ के खिलाफ कोर्ट में भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस पूरे मामले की जांच के दौरान दो जांच अधिकारी भी बदले जा चुके हैं, फिर भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। मामले की जांच के दौरान कई छात्रों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि किन परिस्थितियों में अक्षित ने यह खौफनाक कदम उठाया था।

अक्षित ने भोपाल स्थित मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक (BTech) की डिग्री हासिल की थी। साल 2023 में आईआईएम-ए में दाखिला लेने से पहले, उन्होंने हैदराबाद में एक साल से अधिक समय तक सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में भी काम किया था। आज पूरा परिवार उसी होनहार बेटे की तस्वीर के सामने मंदिर में खड़ा होकर न्याय का इंतजार कर रहा है।

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