तविशा शर्मा की मौत के मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिकल बोर्ड ने अहम खुलासा किया है। विशेषज्ञों ने अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि यह फांसी लगाकर आत्महत्या करने का मामला है। मृतका के शरीर पर किसी भी तरह के संघर्ष या शारीरिक हमले के कोई निशान नहीं पाए गए हैं।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस संवेदनशील मामले में दूसरा पोस्टमार्टम किया गया था। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद एम्स की पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। जांच के सभी पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करने के बाद यह रिपोर्ट एक सील बंद लिफाफे में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है।
एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने जांच के निष्कर्षों पर स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि यह स्पष्ट रूप से आत्महत्या का मामला है। मौत से पहले तविशा के साथ किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती, शारीरिक हमले या बचाव में किए गए संघर्ष के कोई भी मेडिको-लीगल सुबूत उनके शरीर पर मौजूद नहीं थे।
इस मामले को विशेषज्ञों ने ‘हत्या या आत्महत्या’ के हर संभावित नजरिए से परखा है। जांच टीम ने फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल की गई उस विवादित सामग्री का भी बारीकी से अध्ययन किया, जिसमें धातु के छल्ले वाला एक जिम्नास्टिक बेल्ट शामिल था। सभी उपलब्ध साक्ष्यों की गहन जांच के बाद फंदे में इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर चल रहा विवाद अब सुलझा लिया गया है।
अदालत के आदेश का पालन करते हुए एम्स की टीम ने 24 मई को यह दूसरा पोस्टमार्टम किया था। जांच को पुख्ता बनाने के लिए मेडिकल बोर्ड ने घटनास्थल का भी दौरा किया ताकि कोई अहम सुराग न छूट जाए। टीम ने अपनी अंतिम राय देने से पहले लगभग एक महीने तक इससे जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक साहित्य का गहन अध्ययन किया।
11 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट को तैयार करने में पूरी वैज्ञानिक और तार्किक प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया गया है। डॉ. गुप्ता के अनुसार, सच्चाई और न्याय के हित में सीबीआई तथा न्यायपालिका के लिए यह एक बिल्कुल साफ और स्पष्ट राय है जिससे मामले की दिशा पूरी तरह तय हो जाती है।
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