अहमदाबाद में 27 अगस्त को एक शांतिपूर्ण ‘रीडिंग सेशन’ के दौरान बजरंग दल के सदस्यों द्वारा हिंसक हमला करने का मामला सामने आया है। स्टूडेंट एंड यूथ कलेक्टिव अहमदाबाद (SYCA) और गुजरात रीड्स एनीवे द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बिना किसी उकसावे के भारी हथियारों और लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने युवाओं पर जानलेवा हमला किया। SYCA ने इस क्रूर और अकारण हमले की कड़ी निंदा की है।
आयोजकों के अनुसार, घटना के दौरान प्रतिभागियों की तरफ से कोई नारेबाजी, बैनर या प्रदर्शन नहीं हो रहा था।
इसके बावजूद बजरंग दल के लोगों ने जय ठक्कर, एम. शशि कुमार, सावन ज़लारिया और स्नेह भावसार सहित कई पाठकों को निशाना बनाया। जय ठक्कर को पार्क से बाहर घसीट कर लाठियों से बुरी तरह पीटा गया। स्नेह, शशि और सावन के सिर, पीठ, कोहनी और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आई हैं।

हमले की यह घटना दिनदहाड़े और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई। भीड़ की बर्बरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस वैन के पास भी युवाओं को पीटा गया। पुलिसकर्मियों ने भी युवाओं से गाड़ी में बैठने को कहते हुए कहा कि वे इन लोगों को नहीं जानते, ये जान से भी मार सकते हैं। शशि कुमार को पुलिस की गाड़ी में बिठाते समय भी गुंडों ने उनके माथे और आंखों पर लाठियों से वार किया, जिसमें बचाव करते हुए एक पुलिसकर्मी के हाथ में भी चोट आई।
महिला प्रतिभागियों के साथ भी अभद्रता और हिंसा की गई। स्वाति गोस्वामी को बांह से पकड़कर खींचा गया और उनके बाल नोचे गए, जबकि मैत्री छैया की पीठ पर कई बार थप्पड़ मारे गए। आध्या छात्रोला, जो चुपचाप इस घटना का वीडियो बना रही थीं, उन्हें हमलावरों ने गायब करने की खुली धमकी दी। एक गुंडे ने जबरन उनका फोन छीनने की कोशिश की, लेकिन उनके चिल्लाने पर वह बच निकलीं।
हमलावरों ने बाहर यह झूठी अफवाह फैलाई कि पार्क में ‘राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी’ इकट्ठा हुए हैं और उन्हें सबक सिखाने की जरूरत है। हमलावरों ने भारी हॉकी स्टिक और डंडों के बल पर हिंसा की और कई महत्वपूर्ण किताबें फाड़ दीं। इस दौरान विशेष रूप से शहीद भगत सिंह की किताबों को फाड़ना आयोजकों के लिए बेहद चिंताजनक और हैरान करने वाला रहा।
घटना के बाद पीड़ितों को वस्त्रापुर पुलिस स्टेशन ले जाया गया, लेकिन हमले में शामिल किसी भी व्यक्ति को तुरंत थाने नहीं लाया गया। बाद में घायल प्रतिभागियों ने वीडियो साक्ष्यों के साथ बजरंग दल के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। हालांकि, इस हिंसक हमले में शामिल तीन आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है, जिस पर SYCA ने गहरी निराशा जताई है।
SYCA ने पुलिस से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल उन लेखकों के विचारों को पढ़ना था जिन्होंने सत्ता से सवाल किए हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवा और व्यापक नागरिक समाज इस तरह की हिंसा से चुप नहीं बैठेंगे। स्वतंत्र विचार और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार को दबाने वाली इन विघटनकारी दक्षिणपंथी ताकतों के खिलाफ उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
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