नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की रूपरेखा लगभग स्पष्ट हो चुकी है। चार राज्यों में जनगणना कार्यक्रम को तय समय से पहले कराने और मणिपुर में इसके पहले चरण को आगे टालने के केंद्र सरकार के फैसले ने यह संकेत दे दिया है कि इन पांचों राज्यों में अगले साल फरवरी और मार्च के दौरान ही वोट डाले जाएंगे।
चुनाव आयोग की पुरानी परिपाटी रही है कि जब कई राज्यों में एक साथ चुनाव होते हैं, तो मतदान की प्रक्रिया सबसे पहले समाप्त होने वाले विधानसभा के कार्यकाल से पहले पूरी कर ली जाती है। इन पांचों राज्यों में मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल सबसे पहले 13 मार्च 2027 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद गोवा विधानसभा की मियाद 14 मार्च, पंजाब की 16 मार्च, उत्तराखंड की 28 मार्च और उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई को खत्म होगा। साल 2022 में भी इन राज्यों में एक साथ चुनाव कराए गए थे, हालांकि उत्तर प्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 22 मई 2022 को आयोजित हुई थी।
निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार के तहत विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले कभी भी चुनाव कराए जा सकते हैं। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से करीब दो महीने पहले ही मतदान संपन्न करा लिया जाएगा। राज्य में पिछले तीन चुनावों से यही सिलसिला देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और सघन आबादी वाले राज्य में चुनाव कई चरणों में संपन्न होने की पूरी संभावना है। हालांकि, बिहार और पश्चिम बंगाल के हालिया उदाहरणों को देखते हुए इस बार चरणों की संख्या कम रखी जा सकती है। यदि चुनाव आयोग बिहार की तर्ज पर इसे दो चरणों में समेटने का फैसला करता है, तो मतदान फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में शुरू हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि चुनाव की औपचारिक घोषणा जनवरी 2027 में हो सकती है।
चुनावी तैयारियों के बीच तीन राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम मुकम्मल हो चुका है, जबकि बाकी दो राज्यों में यह प्रक्रिया जारी है। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव पूर्व वार्षिक संक्षिप्त पुनरीक्षण कराए जाने की संभावना नहीं है। एसआईआर के ताजा आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 13.2 प्रतिशत घटकर 13.4 करोड़ रह गई है। इसी तरह गोवा में मतदाताओं की संख्या 10.2 प्रतिशत की कमी के साथ 10.6 लाख और मणिपुर में 7.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19.3 लाख दर्ज की गई है। पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची भी अगले दो महीनों के भीतर जारी कर दी जाएगी।
दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फबारी वाले इलाकों में जनगणना 2027 के जनसंख्या गणना चरण की तारीखों में बदलाव करते हुए इसे 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक निर्धारित किया है, जिसकी संदर्भ तिथि 5 जनवरी रखी गई है। इसके साथ ही मणिपुर में मकान सूचीकरण के पहले चरण को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
तारीखों में यह बदलाव चुनाव और जनगणना के बीच संभावित टकराव को टालने के मकसद से किया गया है। अमूमन देश भर में जनगणना का दूसरा चरण फरवरी में आयोजित होता है, जिसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च होती है। चूंकि चुनाव और जनगणना दोनों बड़े अभियानों को अमलीजामा पहनाने के लिए मुख्य रूप से शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की ही तैनाती की जाती है, इसलिए इस फेरबदल से दोनों प्रक्रियाओं के सुचारू संचालन में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी राहत मिलेगी।
यह भी पढ़ें-
अरुणाचल में एलएसी पर तनाव के बीच बड़ी सैन्य पहल: भारत और चीन के कोर कमांडरों की अहम वार्ता










