गुजरात पुलिस ने शुरुआत में जिसे 635 करोड़ रुपये और करीब 3.15 लाख पीड़ितों का घोटाला माना था, वह अब एक भयानक रूप ले चुका है। रविवार को जांचकर्ताओं ने आरोपियों के सिस्टम का पासवर्ड क्रैक किया, जिसके बाद सामने आया कि इस ठगी के शिकार लोगों का आंकड़ा 15,00,770 तक पहुंच गया है।
पुलिस जांच में पता चला है कि यह ‘एसडी पे’ (SD Pay) घोटाला असल में डिजिटल वॉलेट ऐप की आड़ में चलाया जा रहा एक मल्टीलेवल मार्केटिंग नेटवर्क था। इस ऐप के जरिए आम लोगों को उनके वॉलेट बैलेंस पर हर महीने 9 फीसदी कैशबैक देने का भारी-भरकम लालच दिया गया था।
यह पूरा फर्जीवाड़ा 15-स्तरीय रेफरल सिस्टम पर काम कर रहा था। इसमें पुराने निवेशक ही नए सदस्यों को जोड़कर लाते थे। इसके बाद अचानक मास्टरमाइंड्स ने पैसे निकालने पर रोक लगा दी और सारा फंड फर्जी कॉर्पोरेट खातों में ट्रांसफर कर दिया। जांचकर्ताओं को अब शक है कि इस धोखाधड़ी की कुल रकम 2,000 करोड़ रुपये के पार जा सकती है।
पीड़ितों की भारी संख्या को देखते हुए इसे भारत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भी जल्द ही अनौपचारिक रूप से इस जांच में शामिल होने की संभावना है।
अमरेली पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि मुख्य आरोपी धवल पटेल और नरेंद्र सोलंकी ने अपना ठिकाना महाराष्ट्र में बदल लिया था। वहां उन्होंने ‘अपना पे’ (Apna Pay) के नाम से नया गोरखधंधा शुरू किया। कथित तौर पर इस नए ऑपरेशन की कमान नरेंद्र कांगरे को सौंपी गई थी।
कांगरे फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर उसे नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया गया है ताकि वह देश छोड़कर न भाग सके।
इस महाघोटाले में धवल पटेल और नरेंद्र सोलंकी समेत अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी के मुताबिक, सोलंकी पहले एक यूपीआई (UPI) आधारित कंपनी में काम कर चुका है।
पहले यह माना जा रहा था कि यह ठगी केवल गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र तक ही सीमित है। लेकिन अब इसके तार कर्नाटक, बिहार और उत्तर प्रदेश से भी जुड़ चुके हैं। पुलिस इन सभी राज्यों में इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन और उनके गुर्गों की गहन जांच कर रही है ताकि घोटाले की पूरी तस्वीर साफ हो सके।
अमरेली पुलिस ने इस पूरे नेक्सस को समझने के लिए गूगल प्ले स्टोर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य बैंकिंग संस्थानों से संपर्क किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों ने किन तकनीकी और बैंकिंग खामियों का फायदा उठाकर इस लूट को अंजाम दिया।
अमरेली के एसपी संजय खरात ने बताया कि जालसाजों ने लोगों की आसानी से और जल्दी पैसा कमाने की चाहत का पूरा फायदा उठाया। पुलिस अब तक 350 पीड़ितों के बयान दर्ज कर चुकी है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी लुभावने निवेश ऑफर के झांसे में न आएं।
खरात के मुताबिक, आरोपियों के पास एक पंजीकृत कंपनी तो थी, लेकिन उनके पास कोई बैंकिंग लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने दिल्ली की एक कंपनी की मदद से अपना आईएमपीएस (IMPS) एप्लिकेशन लॉन्च कर दिया। दिल्ली की इस कंपनी की भूमिका भी अब जांच के दायरे में है।
फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर लोगों को कैसे नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया। इसके अलावा महाराष्ट्र में ‘अपना पे’ की भूमिका, फरार आरोपी कांगरे की लोकेशन और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की खामियों को कैसे भेदा गया, इन सभी सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है।
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