गुजरात सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘गुजरात अर्बन ग्रीनिंग पॉलिसी 2026’ को मंजूरी दे दी है। इस नई नीति के तहत राज्य के सभी शहरों को अगले 10 वर्षों में अपने हरित आवरण (ग्रीन कवर) में कम से कम 20 प्रतिशत की वृद्धि करनी होगी।
इस लक्ष्य को हासिल करने और हरियाली को बनाए रखने में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
शहरी विकास और शहरी आवास विभाग द्वारा तैयार की गई यह महत्वाकांक्षी नीति राज्य के सभी 169 शहरी स्थानीय निकायों पर लागू होगी। इसके दायरे में 17 नगर निगम और 152 नगरपालिकाएं शामिल होंगी। सरकार के अनुसार यह नई व्यवस्था नवंबर 2026 से शुरू होकर अगले 10 साल तक प्रभावी रहेगी, और हर दो साल में इसके प्रभावों की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
यह नीति केवल पारंपरिक वृक्षारोपण अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आधुनिक दृष्टिकोण पेश करती है। इसमें शहरी जंगलों, ग्रीन बेल्ट, जैव विविधता पार्क, ग्रीन कॉरिडोर, सड़क किनारे पौधरोपण और आस-पड़ोस के बगीचों का एक एकीकृत नेटवर्क तैयार करने की ठोस रूपरेखा है। इसके साथ ही आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत इमारतों में रूफटॉप गार्डन, वर्टिकल गार्डन और ग्रीन फसाड (हरी-भरी दीवारों) के निर्माण को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।
इस योजना की सबसे अहम विशेषता ‘ग्रीन स्टार रेटिंग मैकेनिज्म’ की शुरुआत है। इसके अंतर्गत सभी शहरी निकायों का हर साल बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा। यह वार्षिक आकलन पौधरोपण, पौधों के जीवित रहने की दर, हरे-भरे स्थानों तक आम लोगों की पहुंच और इसके कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों जैसे कई अहम पैमानों पर आधारित होगा।
मूल्यांकन के आधार पर 50 से 69 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले शहरों को ‘प्रॉमिसिंग ग्रीन सिटीज’ और 70 से 84 प्रतिशत अंक पाने वालों को ‘प्रोग्रेसिव ग्रीन सिटीज’ का दर्जा दिया जाएगा। वहीं 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले शहर ‘पायनियर ग्रीन सिटीज’ कहलाएंगे। सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शहर को ‘अल्टीमेट ग्रीन सिटी ऑफ गुजरात’ के प्रतिष्ठित वार्षिक सम्मान से नवाजा जाएगा।
बेहतर काम करने वाले शहरी निकायों को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त फंड और अनुदान हासिल करने में प्राथमिकता मिलेगी। दूसरी ओर, लक्ष्य से पिछड़ने वाले निकायों को सुधार के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। लगातार दो साल तक 50 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले शहरों को राज्य स्तर की निगरानी में रखकर वहां विशेष सुधार प्रक्रिया लागू की जाएगी।
नई नीति में हरियाली के केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि उसके दीर्घकालिक रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत लगाए गए पौधों के कम से कम 80 प्रतिशत जीवित रहने का अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पौधरोपण परियोजनाओं के लिए ठेकेदारों या एजेंसियों को होने वाले भुगतान को न्यूनतम पांच साल की अवधि तक पौधों के स्वास्थ्य और उनके जीवित रहने की दर से सीधे तौर पर जोड़ा गया है।
योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए नगर निगमों, शहरी विकास प्राधिकरणों और क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के पार्क एवं उद्यान विभागों के तहत विशेष ‘अर्बन ग्रीनिंग सेल’ स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘गुजरात अर्बन डेवलपमेंट मिशन’ इस पूरी महत्वपूर्ण कवायद में तकनीकी नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
शहरी विकास विभाग के एक शीर्ष अधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष राज्य स्तरीय निगरानी समिति का भी गठन किया जाएगा। यह समिति योजना के क्रियान्वयन, बजट खर्च, पौधों के जीवित रहने की दर और ग्रीन-कवर के लक्ष्यों की प्रगति पर पैनी नजर रखेगी। योजना के पहले साल में इस समिति की बैठक हर तिमाही होगी, जबकि उसके बाद हर साल दो बार बैठकें आयोजित की जाएंगी।
अधिकारियों के मुताबिक गुजरात की लगभग 48 फीसदी आबादी अब शहरी इलाकों में निवास करती है। ऐसे में इस नीति का मुख्य उद्देश्य ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर को शहरी नियोजन का एक अभिन्न अंग बनाना है। इससे शहरों में बढ़ती गर्मी, वायु और ध्वनि प्रदूषण, तूफानी जल प्रबंधन जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के साथ-साथ आम जनता के लिए आसानी से सुलभ मनोरंजक स्थानों का निर्माण किया जा सकेगा।
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