वडोदरा। क्या आपके आगे का रास्ता बारिश के पानी में डूबा हुआ है? क्या निचले इलाके वाले उस चौराहे से गाड़ी निकालना सुरक्षित रहेगा? या फिर, क्या आज दोपहर 3 बजे बालकनी में कपड़े सुखाना सही है? शहरों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने वाली अचानक और तेज बारिश ने अब मौसम की भविष्यवाणी करने वाले स्मार्ट सिस्टम्स के विकास को जन्म दिया है। अब बात सिर्फ ‘क्या बारिश होगी?’ से आगे बढ़कर इस अहम सवाल पर आ गई है कि ‘मेरे इलाके में इस बारिश का क्या असर होने वाला है?’
इसी समस्या के समाधान के लिए ‘वेकास्ट’ (WayCast) नाम का एक बेहद खास प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। इसकी शुरुआत एमएस यूनिवर्सिटी के पूर्व जियोलॉजी प्रोफेसर धनंजय संत ने की है। यह प्लेटफॉर्म बारिश, भौगोलिक स्थिति और जल निकासी के डेटा का बारीकी से विश्लेषण करके उन सड़कों और चौराहों की पहचान करता है, जहां पानी भरने का सबसे ज्यादा खतरा होता है।
बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज में एडजंक्ट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे धनंजय संत का कहना है कि अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि बारिश होगी या नहीं, बल्कि यह जानना ज्यादा जरूरी है कि मैं जहां मौजूद हूं, वहां मौसम का क्या रुख रहने वाला है।
वेकास्ट सड़कों की ऊंचाई और आसपास की भौगोलिक संरचना को भांपकर निचले इलाकों की पहचान करता है। इसके साथ ही, यह बारिश के पूर्वानुमान, ड्रेनेज सिस्टम, पुलिया और सैटेलाइट से मिलने वाले वायुमंडलीय डेटा का भी इस्तेमाल करता है। इसका रेनफॉल इनपुट लगभग 9 किलोमीटर के पूर्वानुमान ग्रिड पर आधारित है, जबकि एलिवेशन (ऊंचाई) डेटा का रिज़ॉल्यूशन लगभग 90 मीटर है।
हालांकि, प्रोफेसर संत स्पष्ट करते हैं कि यह सिस्टम जमीनी स्तर की गारंटी नहीं, बल्कि एक ‘सेकंड ओपिनियन’ (दूसरी राय) है। यह प्लेटफॉर्म सड़क पर भरे पानी का कोई भौतिक माप नहीं देता, बल्कि डेटा के आधार पर एक अनुमानित मॉडल पेश करता है, जिसे यूजर्स की सटीक जानकारियों और फीडबैक से और भी बेहतर बनाया जा सकता है।
मौसम और नागरिक समस्याओं से निपटने के लिए जीएसएफसी यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी एक शानदार पहल की है। यहां की दो छात्र टीमों ने ‘ईएलसीआईए नेक्स्ट-जेन इनोवेटिव टेक हैकथॉन 2026 – स्मार्ट सिटी ड्रोन-एआई चैलेंज’ में पहला और रनर-अप का खिताब जीता है।
इस बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने ट्रिपल आईटी-बेंगलुरु और वीएलएसआई सिस्टम डिजाइन के साथ मिलकर किया था, जिसमें कुल 183 टीमों और 343 प्रतिभागियों ने अपना दम दिखाया।
प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल करने वाली टीम ‘ड्रोन404’ में बीटेक के छात्र कृषय शाह और तत्व शाह शामिल थे। इन दोनों ने ‘हाइड्रो-विज़न-थ्रीडी’ (HYDRO-VISION-3D) नाम का एक ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो ड्रोन फुटेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गड्ढों, जलभराव, खुले मैनहोल, ओवरफ्लो होते ड्रेनेज और टूटे हुए फुटपाथ का बिल्कुल सटीक पता लगा सकता है।
वहीं, फर्स्ट रनर-अप रही टीम ‘सिविकपल्स’ के होनहार छात्र मंथन चावड़ा और ए. मानव प्रसाद ने एक एआई-आधारित सिविक-रिस्क सिस्टम तैयार किया। यह आधुनिक सिस्टम ड्रोन फुटेज और जीपीएस डेटा का इस्तेमाल करके रास्तों के खतरों की पहचान करता है, मरम्मत का काम सौंपता है, काम की स्थिति को ट्रैक करता है और अंत में सुधार कार्य पूरा होने की पुष्टि भी करता है।
इन सभी आधुनिक प्रोजेक्ट्स से यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि आज के शहरी माहौल में मौसम और भौगोलिक स्थिति की सटीक जानकारी होना कितना जरूरी है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी आम जनजीवन की सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके।
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