comScore KPSC पशु चिकित्सक भर्ती घोटाला: प्रोबेबिलिटी टेस्ट में हुआ बड़ा खुलासा, 14 टॉपर्स ने खरीदे थे लीक हुए प्रश्न पत्र - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

KPSC पशु चिकित्सक भर्ती घोटाला: प्रोबेबिलिटी टेस्ट में हुआ बड़ा खुलासा, 14 टॉपर्स ने खरीदे थे लीक हुए प्रश्न पत्र

| Updated: October 1, 2026 17:17

सीआईडी के प्रोबेबिलिटी टेस्ट में 99.9% नकल की पुष्टि, 14 टॉपर्स ने 20 से 40 लाख रुपये देकर खरीदे थे लीक हुए प्रश्न पत्र

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा जनवरी में आयोजित पशु चिकित्सकों की भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का पता लगाने के लिए जांचकर्ताओं ने एक सांख्यिकीय प्रोबेबिलिटी (प्रायिकता) टेस्ट का इस्तेमाल किया है। इस टेस्ट से यह पुख्ता निष्कर्ष निकला है कि दो श्रेणियों के 14 शीर्ष रैंक धारकों को केपीएससी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पहले ही लीक किए गए प्रश्नों का सीधा फायदा मिला।

कर्नाटक पुलिस की सीआईडी यूनिट द्वारा किए गए इस प्रोबेबिलिटी टेस्ट से 9 जनवरी को आयोजित सामान्य दक्षता और विशेष पशु चिकित्सा विज्ञान (मल्टीपल चॉइस फॉरमेट) की परीक्षा में इन उम्मीदवारों के सही और गलत जवाबों में 99.9 प्रतिशत का सटीक मिलान पाया गया है। जांचकर्ताओं को प्राथमिक जानकारी देने वाले इस टेस्ट में यह भी सामने आया कि इन 14 रैंक धारकों को परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्न पत्र मिलने की 99 प्रतिशत संभावना थी।

सीआईडी इस बड़े भर्ती घोटाले की गहराई से जांच कर रही है जिसमें आरोप है कि बिचौलिए बसवराज कन्नाले ने लगभग 20 उम्मीदवारों से 20 लाख से 40 लाख रुपये तक की भारी रकम वसूली। यह पैसा केपीएससी के परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार द्वारा 7 जनवरी को लीक किए गए प्रश्न उपलब्ध कराने के एवज में लिया गया था। गंगवार को 29 अगस्त को और कन्नाले को इसके चार दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।

फिलहाल इस मामले में किसी भी उम्मीदवार की आधिकारिक रूप से गिरफ्तारी नहीं हुई है। कम से कम दस उम्मीदवारों ने लीक हुए प्रश्नों के लिए पैसे देने की बात स्वीकार करते हुए सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने का फैसला किया है। जांच में पता चला है कि 14 में से चार अन्य उम्मीदवारों ने भी लीक हुए प्रश्न प्राप्त किए थे, हालांकि उन्होंने अभी तक जांचकर्ताओं के सामने अपना अपराध नहीं कबूला है।

प्रोबेबिलिटी टेस्ट के मापदंडों के अनुसार, उम्मीदवारों की उत्तर कुंजी के बीच 95 प्रतिशत या उससे अधिक का मिलान एक सटीक संबंध को दर्शाता है। वहीं, जब यह आंकड़ा 99.6 प्रतिशत से 100 प्रतिशत के बीच होता है, तो धोखाधड़ी की संभावना को सांख्यिकीय रूप से पूरी तरह निश्चित माना जाता है। इससे पहले सीआईडी ने 2021 में पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के टॉपर्स की जांच में भी ऐसे ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कंप्यूटर एल्गोरिदम आधारित टेस्ट का उपयोग किया था, जिसमें 52 आरोपियों का मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। इंस्टीट्यूट फॉर बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन द्वारा भी बैंकिंग परीक्षाओं में नकल पकड़ने के लिए आमतौर पर ऐसे परीक्षणों का उपयोग किया जाता है।

इस जांच के आधार पर केपीएससी ने भर्ती परीक्षा के परिणाम रोक दिए हैं। यह कार्रवाई 24 जुलाई को तत्कालीन केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकार और दो अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर पर आधारित है। उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि 2024 में घोषित 400 पदों पर चयन में उन्हें गलत तरीके से बाहर किया गया। साहूकार को अपनी ही बेटी की अवैध भर्ती से जुड़े एक अलग घोटाले में 25 अगस्त को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

जांच में सामने आया है कि इस परीक्षा में 400 रिक्तियों के लिए कुल 1400 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें से 329 का चयन किया गया। चयनित लोगों में 56 बैकलॉग श्रेणी के और 273 मुख्य श्रेणी के उम्मीदवार हैं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि गंगवार और कन्नाले ने मोटी रकम देने वालों को ज्यादा प्रश्न लीक किए, जबकि अन्य रास्तों से आने वालों को कम प्रश्न दिए गए। प्रोबेबिलिटी टेस्ट से यह भी संकेत मिले हैं कि साहूकार से जुड़े एक उम्मीदवार सहित तीन अन्य लोगों को भी 9 जनवरी की सामान्य दक्षता परीक्षा के प्रश्न पहले ही मिल गए थे।

टेस्ट के विस्तृत निष्कर्षों से पता चलता है कि मुख्य श्रेणी में दूसरे, चौथे, पांचवें, छठे, सातवें, नौवें और दसवें रैंक धारकों के सही और गलत जवाबों में 100 प्रतिशत का मिलान था। बैकलॉग (लंबित परीक्षा) श्रेणी के पहले, दूसरे और तीसरे रैंक धारकों के जवाब भी दोनों प्रवेश पत्रों में 100 प्रतिशत समान थे। इसके अलावा, मुख्य श्रेणी में पहले, तीसरे, आठवें और 12वें रैंक धारकों द्वारा नकल करने की 99 प्रतिशत संभावना पाई गई और सीआईडी ​​​​जांच ने इन चारों के धोखाधड़ी में शामिल होने की पुष्टि भी कर दी है।

यह सनसनीखेज जानकारी मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय में तीसरे रैंक की उम्मीदवार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई। विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) बी एन जगदीश ने अदालत को बताया कि 29 वर्षीय इस पशु चिकित्सक ने एक ‘औसत छात्रा’ होने के बावजूद परीक्षा में 486.75 अंक (81.12 प्रतिशत) प्राप्त किए। उन्होंने दलील दी कि एक पेपर में उसने 95 प्रश्न हल किए जिसमें 89 सही और छह गलत थे, जबकि दूसरे पेपर में 91 का प्रयास कर 83 सही और आठ गलत किए।

अदालत को यह भी बताया गया कि नकारात्मक अंकन (नेगेटिव मार्किंग) के बावजूद इस छात्रा ने वही प्रश्न चुने और उन्हीं उत्तरों को गलत किया, जो धोखाधड़ी के संदेह में घिरे अन्य सफल उम्मीदवारों ने किए थे। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सवाल किया कि 10 अन्य लोगों की तरह अप्रूवर न होने के बावजूद इस तीसरे रैंक की उम्मीदवार को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

अदालत में पेश किए गए दस्तावेज रैंक धारकों द्वारा प्राप्त अंकों और लीक हुए पेपर के लिए दी गई कथित रिश्वत का पूरा लेखा-जोखा खोलते हैं। बैकलॉग श्रेणी में टॉप तीन ने क्रमशः 481.5 (80.5 प्रतिशत), 411.75 (68.62 प्रतिशत) और 400.5 अंक (66.75 प्रतिशत) प्राप्त किए और बिचौलिए व उसके साथियों को 50 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं, मुख्य श्रेणी में चौथे, पांचवें, छठे और 13वें रैंक वालों ने 77 लाख रुपये की रिश्वत देकर क्रमशः 483.75 (80.62 प्रतिशत), 483 (80.5 प्रतिशत), 471.5 (78.50 प्रतिशत) और 443.25 अंक (73.87 प्रतिशत) हासिल किए।

मामले के रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि मुख्य श्रेणी में शीर्ष दो रैंक धारकों ने क्रमशः 493.5 अंक (82.25 प्रतिशत) और 487.50 अंक (81.25 प्रतिशत) बनाए, जिसमें से दूसरे रैंक वाले ने धोखाधड़ी की बात कबूल कर ली है। सातवें और दसवें रैंक वालों ने अज्ञात रकम का भुगतान करके क्रमशः 468.75 (78.12 प्रतिशत) और 458.25 अंक (76.37 प्रतिशत) प्राप्त किए।

सीआईडी जांच से अब तक यह साफ हो चुका है कि कम से कम 11 उम्मीदवारों ने बिचौलिए कन्नाले को कुल 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एक संबंधित मामले में गंगवार और कन्नाले को गिरफ्तार कर लिया है और मंगलवार को ईडी ने कन्नाले की 14 दिन की हिरासत प्राप्त की है। इन लगातार खुलती परतों के बीच, 21 सितंबर को उच्च न्यायालय ने केपीएससी के इन दोनों घोटालों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया था।

हालांकि, कांग्रेस शासित राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है और तर्क दिया है कि एसआईटी अधिकारियों का चयन सरकार से परामर्श किए बिना किया गया था।

यह भी पढ़ें-

साबरमती आश्रम का कायाकल्प: टाटा की कंपनी और ग्लोबल फर्म मिलकर संवारेंगी बापू की विरासत, तैयार होंगे 23 भव्य म्यूजियम

आसमान में को-पायलट का खूनी खेल: गुजरात के जांबाज कैप्टन स्मित मच्छार ने बचाई 180 यात्रियों की जान

Your email address will not be published. Required fields are marked *