महाराष्ट्र में इन दिनों हर तरफ आक्रोश का माहौल है। किसानों से लेकर आदिवासियों तक और महिलाओं से लेकर छात्रों तक… हर कोई किसी न किसी वजह से सड़कों पर उतरने को मजबूर है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान जन आंदोलनों की एक लंबी श्रृंखला देखने को मिली है।
विरोध प्रदर्शन करने वालों में जेन-जेड युवाओं से लेकर आदिवासी छात्र और आम महिलाएं तक शामिल हैं। हालांकि, इनमें से कुछ ही प्रदर्शनों को मीडिया की मुख्य सुर्खियों में जगह मिल सकी है। इन प्रदर्शनों के पीछे किसान कर्ज माफी, छात्र छात्रावास की बेहतर सुविधाएं, अच्छी सड़कें, ध्वनि प्रदूषण पर रोक, सरकारी भर्ती परीक्षाओं में धांधली और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली जैसे कई अलग-अलग और गंभीर कारण मौजूद हैं।
हाल ही में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर मुंबई में जोरदार प्रदर्शन किया। इसके ठीक बाद ठाकरे चचेरे भाइयों ने भी इसी मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
इसी बीच सप्ताहांत पर नासिक से पैदल चलकर आदिवासी छात्रों का एक बड़ा जत्था भी अपनी मांगों को लेकर मुंबई पहुंच गया। लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों ने पिछले कुछ महीनों से राज्य सरकार और महाराष्ट्र पुलिस की नींद उड़ा रखी है।
कृषि क्षेत्र की बात करें तो, जून और जुलाई 2026 में किसानों ने ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर कृषि ऋण माफी योजना’ में पात्रता संबंधी छूट की मांग करते हुए भारी विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद सितंबर 2026 में अखिल भारतीय किसान सभा ने भी उन किसानों के लिए 2 लाख रुपये के प्रोत्साहन की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया, जो नियमित रूप से अपना फसल ऋण चुकाते हैं।
जून 2026 में ही प्याज किसानों ने अपनी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग को लेकर पुणे-नासिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर ‘रास्ता रोको’ आंदोलन किया था। इसके अलावा, पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के किसान पिछले एक साल से ‘शक्तिपीठ सड़क परियोजना’ का कड़ा विरोध कर रहे हैं और किसी भी कीमत पर अपनी जमीनें देने से साफ इनकार कर रहे हैं।
छात्र भी अपनी मांगों को लेकर लगातार मुखर हैं। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा परीक्षा शुल्क, ऑनलाइन परीक्षा, परिणामों में देरी और अनियमितताओं के खिलाफ पिछले 2 साल से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। विवेक भीमनवार को MPSC का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद इन विरोध प्रदर्शनों में और ज्यादा उग्रता आ गई।
पुणे में छात्रों ने छात्रावास के सख्त नियमों को लेकर भारी विरोध जताया। इस आंदोलन को गढ़चिरौली में सांप के काटने से हुई आदिवासी छात्रों की मौत की दुखद घटना ने और भड़का दिया।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी असंतोष है। सितंबर 2026 में पूरे महाराष्ट्र के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न ने होम्योपैथी चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) के तहत पंजीकृत होने की अनुमति देने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
आईआईटी बॉम्बे में भी 18 सितंबर को साहिल वाकोडे की दुखद मौत के बाद से छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में भी सीजेपी (CJP) ने कई विरोध प्रदर्शन किए हैं।
राज्य की महिलाएं भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं। ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ से बाहर रखी गई महिलाओं ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतरकर कड़ा एतराज जताया है। वहीं, पूरे देश में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाओं के समर्थन में पुणे, नागपुर और मुंबई के नागरिकों ने एकजुटता दिखाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए।
आरक्षण के मुद्दे पर भी महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमाया हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल ने मराठा कोटे की मांग को लेकर 20 दिनों तक लंबी भूख हड़ताल की। जरांगे-पाटिल के इस कदम का विरोध करते हुए ओबीसी संगठनों ने भी प्रदर्शन किए और सरकार पर ओबीसी आरक्षण को कमजोर करने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ, धनगर और बंजारा समुदाय भी अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा पाने की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं।
इन सब के अलावा कई स्थानीय और पर्यावरणीय मुद्दों पर भी राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अगस्त 2026 में पुणे और नासिक के बीच मूल डायरेक्ट रेलवे अलाइनमेंट को बहाल करने की मांग को लेकर पुणे, नासिक और अहिल्यानगर जिलों में बड़े पैमाने पर सड़क नाकाबंदी की गई थी।
पर्यावरण प्रेमी भी पीछे नहीं हैं। आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत नासिक में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के खिलाफ राज्य भर के नागरिक और पर्यावरणविद एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं।
ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा भी अहम रहा। गणेश उत्सव से कुछ दिन पहले ही पुणे के निवासियों ने त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान डीजे के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
ठाणे के बालकुम, माजिवड़ा और ढोकली इलाकों में भी एक विशाल हाइपरस्केल डेटा सेंटर के निर्माण के खिलाफ भारी जन आक्रोश देखने को मिला। इस डेटा सेंटर के बारे में अनुमान है कि यह हर दिन 422 मेगावाट बिजली और 125 किलोलीटर ट्रीटेड पानी की खपत करेगा। साथ ही यहां 193 डीजल जनरेटर स्टैंडबाय पर रखे जाने की योजना है, जिससे स्थानीय लोग पर्यावरण को लेकर बेहद चिंतित हैं।
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