अहमदाबाद। गुजरात के जंगलों में अकेले घूम रहे इकलौते नर बाघ का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की पहल पर इस ‘बैचलर’ बाघ के लिए मध्य प्रदेश से दिसंबर में दो बाघिन लाई जा सकती हैं। वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक कदम से राज्य में बाघों के कुनबे को बढ़ाने का रास्ता साफ होगा और दशकों बाद एक बार फिर यहां बाघों की दहाड़ गूंज सकेगी।
यह अहम फैसला केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेषज्ञ पैनल की 30 पन्नों की रिपोर्ट के बाद लिया गया है। इस रिपोर्ट में गुजरात को मादा बाघों के सुरक्षित स्थानांतरण (ट्रांसलोकेशन) के लिए पूरी तरह से अनुकूल माना गया है। इसके अलावा, पैनल ने इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी तय कर दिए हैं।
इस विशेषज्ञ पैनल का नेतृत्व नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) और इसकी स्थायी समिति के पूर्व सदस्य एच.एस. सिंह ने किया। उनके साथ इस टीम में जाने-माने वन्यजीव वैज्ञानिक डॉ. बिलाल हबीब और एनटीसीए के सहायक वन महानिरीक्षक एन.वी. काले भी शामिल थे।
पैनल ने एक के बजाय दो बाघिनों को लाने की जो सिफारिश की है, वह लगभग चार साल के नर बाघ की गतिविधियों पर आधारित है। यह बाघ फरवरी 2025 में गुजरात की सीमा में दाखिल होने के बाद से ही दाहोद, छोटा उदेपुर और सागतला तक फैले विशाल रतनमहल अभयारण्य क्षेत्र में लगातार घूम रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों मादाओं को नर बाघ के इलाके के अलग-अलग हिस्सों में छोड़ने से उनके मिलन और प्रजनन की संभावना काफी बढ़ जाएगी। योजना के तहत एक बाघिन को छोटा उदेपुर और दूसरी को सागतला के पास छोड़ा जा सकता है। माना जा रहा है कि इन दोनों बाघिनों की उम्र भी नर बाघ के ही आसपास होगी।
इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए एच.एस. सिंह ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण में गुजरात बाघिनों के पुनर्वास के लिए एक उपयुक्त स्थान पाया गया है। वहीं, प्रधान मुख्य वन संरक्षक जयपाल सिंह ने भी इस अहम रिपोर्ट के प्राप्त होने की पुष्टि की है।
इस बीच वन विभाग ने बाघों की सुरक्षा और निगरानी के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पूरे इलाके में सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए नवंबर के अंत तक लगभग 1,100 सीसीटीवी कैमरे और कैमरा ट्रैप लगाने के टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इस विशाल निगरानी नेटवर्क से वन अधिकारियों को नर बाघ और नई बाघिनों की गतिविधियों पर सटीक नजर रखने में मदद मिलेगी।
नर बाघ ने रतनमहल अभयारण्य क्षेत्र में पहले ही अपना एक सुरक्षित ठिकाना बना लिया है। इलाके के आकलन के दौरान नीलगाय और जंगली सूअर जैसे शिकार की पर्याप्त मौजूदगी को भी बाघों की आबादी के लिए एक बड़ा सकारात्मक पहलू माना गया है।
गुजरात में बाघों की वापसी के प्रयासों को दिसंबर 2025 में उस वक्त बड़ी कामयाबी मिली थी, जब रतनमहल से बाघ की स्पष्ट तस्वीरें सामने आई थीं। इसी पुख्ता प्रमाण के आधार पर राज्य को ‘ऑल-इंडिया टाइगर एस्टीमेशन’ (एआईटीई) 2026 में भी शामिल किया गया।
एनटीसीए ने इसके बाद अभयारण्य में संरक्षण के कड़े निर्देश दिए थे। अब 2026 की बाघ गणना से इस क्षेत्र में इन वन्यजीवों की स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
इससे पहले भी राज्य सरकार ने नवंबर 2025 में एक बाघिन को लाने की योजना बनाई थी। हालांकि, तब औपचारिक अनुरोध के अभाव में यह प्रस्ताव केवल जुबानी चर्चाओं तक ही सीमित रह गया था। लेकिन अब इस नई रिपोर्ट ने पूरे प्रोजेक्ट में फिर से जान फूंक दी है। दो बाघिनों को लाने की इस नई पहल से गुजरात में एक बार फिर बाघों का सुरक्षित और स्थायी परिवार बसने की उम्मीदें पुख्ता हो गई हैं।
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