ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से नाता तोड़ने के ठीक दो महीने बाद, पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार की ओर से एक बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) के उस 978 वर्ग मीटर के विवादित प्लॉट को पठान को आवंटित करने का फैसला किया है, जिसके लिए उन्हें दो साल पहले अतिक्रमण का नोटिस थमाया गया था। वीएमसी के भूमि संपदा विभाग द्वारा तैयार किया गया भूखंड आवंटन का यह प्रस्ताव फिलहाल नागरिक निकाय की स्थायी समिति के समक्ष रखा गया है।
वीएमसी का यह कदम गुजरात सरकार के उस प्रस्ताव पर आधारित है जिसमें पठान को जमीन के आवंटन को मंजूरी दी गई है। इस सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, विवादित प्लॉट का 500 वर्ग मीटर हिस्सा पठान को आवासीय उपयोग के लिए ‘उपहार’ के रूप में दिया जाएगा। वहीं, शेष 478 वर्ग मीटर जमीन वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण (वूडा) की मूल्यांकन समिति द्वारा 17 मार्च 2026 को तय की गई कीमत के 55 प्रतिशत के रियायती दर पर उन्हें हस्तांतरित की जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस फैसले को भविष्य के लिए कोई ‘नजीर’ नहीं माना जाएगा, और राज्य का राजस्व विभाग वीएमसी द्वारा हस्तांतरित जमीन के मूल्य के बराबर की भूमि नागरिक निकाय को अलग से आवंटित करेगा।
इस पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक टाइमलाइन भी बेहद अहम है। भाजपा शासित वीएमसी ने जून 2024 में पठान को अतिक्रमण हटाने का नोटिस तब भेजा था, जब उन्होंने कांग्रेस के पांच बार के सांसद और दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर टीएमसी के टिकट पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद, बंगाल में 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और 9 मई को सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने कार्यभार संभाला। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के करीब एक महीने बाद, 14 जून 2026 को पठान सहित 20 टीएमसी सांसदों ने ममता बनर्जी की पार्टी से बगावत कर दी और नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) नामक दल में शामिल हो गए।
भूखंड आवंटन का सरकारी प्रस्ताव 13 अगस्त को जारी हुआ था जो 29 अगस्त को वीएमसी पहुंचा। इसके ठीक दो दिन बाद 31 अगस्त को यूसुफ पठान ने गुजरात उच्च न्यायालय से अपनी वह अपील वापस ले ली, जिसमें उन्होंने जमीन आवंटन के दावे के खारिज होने को चुनौती दी थी। वडोदरा के नगर आयुक्त अरुण महेश बाबू ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की है कि निकाय को राज्य सरकार की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने बताया कि विस्तृत शर्तों को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा और यह प्रस्ताव स्थायी समिति व जनरल बोर्ड की तय प्रक्रिया से होकर गुजरेगा।
यह प्रतिष्ठित भूखंड टंडलजा में टाउन प्लानिंग स्कीम नंबर 22, फाइनल प्लॉट नंबर 90 के तहत स्थित है। यह पठान परिवार के उस मशहूर सफेद बंगले के ठीक बगल में है, जहां यूसुफ और उनके छोटे भाई व पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान अपने माता-पिता और परिवारों के साथ रहते हैं। इस साल जुलाई में, वीएमसी की सर्वोच्च कार्यकारी संस्था (स्थायी समिति) ने 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के मूल्यांकन को मंजूरी देते हुए इस भूखंड की सार्वजनिक नीलामी की तैयारी शुरू कर दी थी, जिससे इस प्लॉट की अनुमानित कीमत करीब 20.5 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि, जनरल बोर्ड द्वारा अतिक्रमण के मुद्दे पर सवाल उठाने के बाद नीलामी का प्रस्ताव वापस ले लिया गया था।
इस जमीन विवाद की शुरुआत साल 2012 में हुई थी, जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते पठान ने सुरक्षा कारणों और आवासीय सुविधा का हवाला देते हुए वीएमसी से सार्वजनिक नीलामी के बिना 99 साल के पट्टे पर यह खाली भूखंड मांगा था। उस समय वीएमसी ने 57,270 रुपये प्रति वर्ग मीटर (कुल 5.6 करोड़ रुपये) के हिसाब से प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, जून 2014 में राज्य के शहरी विकास विभाग ने सीधे आवंटन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद वीएमसी ने आरोप लगाया कि खारिज होने के बावजूद पठान ने प्लॉट पर बाड़ लगाकर कब्जा कर लिया है।
जून 2024 में वीएमसी के नोटिस को पठान ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अगस्त 2025 में एक एकल न्यायाधीश ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए सख्त टिप्पणी की थी कि बिना भुगतान के लंबे समय तक कब्जा कानूनी अधिकार नहीं बनाता है और मशहूर हस्तियों को विशेष छूट देने से गलत संदेश जा सकता है। जून 2026 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने भी बिना भुगतान के कब्जे पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने पठान को खेल नीति के तहत दावा करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था, लेकिन आगाह किया था कि कब्जा जारी रखने से उनकी वित्तीय देनदारी बढ़ सकती है। अंततः 31 अगस्त को उनके वकील ने अदालत के ‘बाहर’ मामले को सुलझाने की बात कहकर अपील वापस ले ली।
अदालती घटनाक्रम के समानांतर ही सितंबर में यह खबर सामने आई कि पठान को एनसीपीआई का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह वही गुमनाम पार्टी है जिसका मुख्य कार्यालय मध्य कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर हावड़ा के संकरैल स्थित हाटगाचा की एक इमारत में है, और जिसके अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी हैं।
इस बीच, विश्वामित्री बचाओ समिति नामक एक नागरिक समूह ने वीएमसी से पठान द्वारा किए गए कथित अतिक्रमण को हटाने और नीलामी से पहले जमीन का भौतिक कब्जा लेने की मांग की है। समूह ने अपने स्तर पर अनुमान लगाया है कि वीएमसी के 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिदिन के शुल्क के हिसाब से 14 साल के कब्जे का जुर्माना लगभग 7.5 करोड़ रुपये हो सकता है।
हालांकि, एक वरिष्ठ वीएमसी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल समूह का आकलन है और निकाय को अभी तक अतिक्रमण पर कार्रवाई या जुर्माने को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अधिकारी के मुताबिक, रियायती दरों के तहत देय राशि के भुगतान के लिए पठान के साथ अलग से चर्चा की जाएगी।
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