comScore शक्तिपीठ पावागढ़ में आस्था का सैलाब, पीछे छूट गया 35,000 किलो प्लास्टिक कचरा - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

शक्तिपीठ पावागढ़ में आस्था का सैलाब, पीछे छूट गया 35,000 किलो प्लास्टिक कचरा

| Updated: October 23, 2026 17:09

नवरात्रि में 18 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, लेकिन खूबसूरत वादियों में छोड़ गए 35,000 किलो प्लास्टिक कचरे का अंबार; अगले साल से लगेगा सख्त बैन।

मानसून की बारिश ने 51 शक्तिपीठों में से एक पावागढ़ को हरियाली की खूबसूरत चादर से ढक दिया है। महाकाली माता के दर्शन के साथ-साथ यहाँ की मनमोहक वादियों और झरनों का लुत्फ उठाने के लिए दूर-दूर से लाखों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

हालांकि, नौ दिनों तक चले नवरात्रि पर्व के दौरान प्रकृति की इस सुंदरता पर प्लास्टिक का भारी दाग लग गया। इस अवधि में करीब 18 लाख श्रद्धालु इस पहाड़ी मंदिर में पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप पावागढ़ और आसपास के इलाकों में भारी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा जमा हो गया। प्रशासन और स्वयंसेवकों ने मिलकर यहां से लगभग 35,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया है।

हालोल के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) जिग्नेश पटेल ने बताया कि घाटियों और सड़कों पर बिखरे प्लास्टिक कचरे को साफ करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार करीब 40 प्रतिशत ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे।

ज्यादातर श्रद्धालु अपने साथ प्लास्टिक पैकिंग वाला खाना, पानी की बोतलें और पाउच लाते हैं, जो बाद में पहाड़ी पर कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं। एसडीएम ने बताया कि भीड़ जितनी बड़ी होगी, कचरा भी उतना ही ज्यादा निकलेगा। इस साल पावागढ़ की घाटी और रास्तों से रोजाना 3,500 किलो से अधिक प्लास्टिक और अन्य कचरा उठाया गया। प्रदूषण को रोकने के लिए पहाड़ी की तुरंत सफाई करना बेहद जरूरी था।

कचरे के इस भारी अंबार को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया गया। प्रशासन द्वारा नियुक्त एजेंसी ने 230 सफाई कर्मचारियों को तैनात किया, जिन्होंने पूरे नवरात्रि के दौरान दिन भर काम करके इस गंदगी को साफ किया। कचरे को मालवाहक रोपवे ट्रॉली और गधों की मदद से माची गांव तक पहुंचाया गया और फिर वहां से ट्रकों में लादकर हालोल के डंपिंग साइट पर भेजा गया।

प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है और लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाने की अपील कर रहा है। इस नवरात्रि से पहले प्रशासन ने पहाड़ी पर सिंगल यूज प्लास्टिक, खासकर पानी की बोतलों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया था। इस प्रस्ताव पर आपत्तियां मांगने के लिए बाकायदा एक नोटिस भी जारी किया गया था।

प्रशासन की योजना थी कि श्रद्धालुओं को रिफंडेबल डिपॉजिट पर स्टील की बोतलें दी जाएं, जिसे वापस करने पर उनके पैसे लौटा दिए जाते। इसके साथ ही, लोगों की सुविधा के लिए जगह-जगह कई वाटर कूलर लगाने की भी तैयारी थी।

अधिकारियों का कहना है कि इतने कम समय में इस प्रतिबंध को लागू करना मुश्किल था। इसका मुख्य कारण यह था कि दुकानदारों ने त्योहारी सीजन की भीड़ को देखते हुए पहले ही भारी मात्रा में पानी की बोतलों का स्टॉक कर लिया था। अधिकारी के मुताबिक, अचानक प्रतिबंध लगाने से दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता।

अब अगले साल से इस प्लास्टिक बैन को बेहद सख्ती से लागू किया जाएगा। 2,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र मंदिर में बढ़ते प्लास्टिक के बोझ को कम करने के लिए प्रशासन एक और अहम कदम उठाने जा रहा है। अगले साल से ऐसी एजेंसियों को भी शामिल करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है जो बायोडिग्रेडेबल पानी की बोतलें उपलब्ध करा सकें।

यह भी पढ़ें-

अडाणी पावर का दूसरी तिमाही में मुनाफा 142% उछलकर ₹7,019 करोड़ के पार, रेवेन्यू में भी शानदार बढ़त

‘शार्क टैंक यूएसए’ में चमके भारतीय आविष्कारक राहुल अग्रवाल, एक अनोखे चम्मच से हासिल की ₹3.33 करोड़ की डील

Your email address will not be published. Required fields are marked *