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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: ट्रंप के सहयोगियों को जनता ने नकारा, क्या शुरू हो रहा है रिपब्लिकन युग का अंत?

| Updated: November 5, 2026 12:11

रिपब्लिकन गढ़ों में डेमोक्रेट्स की ऐतिहासिक सेंध; महंगाई और नीतियों से नाराज अमेरिकी जनता ने ट्रंप के उम्मीदवारों को नकारा, 2028 के लिए बजी खतरे की घंटी।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मतदाताओं से बार-बार अपील की थी कि वे मतदान करते समय यही समझें कि मतपत्र पर उनका ही नाम है। जनता ने ऐसा ही किया, लेकिन नतीजे रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति के लिए किसी बड़े राजनीतिक आघात से कम साबित नहीं हुए।

देशभर के मतदाताओं ने ट्रंप के सहयोगियों को कड़ा चुनावी सबक सिखाया है। डेमोक्रेट्स ने जॉर्जिया, न्यू हैंपशायर और नॉर्थ कैरोलाइना जैसे स्विंग राज्यों के साथ-साथ आयोवा, कंसास, टेक्सास और साउथ कैरोलाइना जैसे रिपब्लिकन गढ़ों में भी जोरदार जीत दर्ज की। दशकों के बीच में लाई गई ट्रंप की विवादित परिसीमन योजना भी पार्टी पर उल्टी पड़ती दिखी। इन नतीजों के साथ जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स देश के इतिहास में पहली अश्वेत महिला गवर्नर चुनी गईं, जबकि टेक्सास में जीना हिनोजोसा राज्य की पहली लैटिना गवर्नर बनने जा रही हैं।

एक व्यापक राष्ट्रीय मतदाता सर्वेक्षण के अनुसार, देश के लगभग तीन-चौथाई मतदाता व्यवस्था की मौजूदा दिशा से असंतुष्ट या नाराज हैं। मतदान के दौरान ट्रंप को ध्यान में रखकर वोट डालने वालों में से विरोधियों की तादाद समर्थकों से दोगुनी थी। करीब 60 प्रतिशत लोगों ने देश में बढ़ी महंगाई के लिए ट्रंप प्रशासन की नीतियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया है।

ट्रंप का पारंपरिक सामाजिक गठबंधन भी बिखरता नजर आया। 2024 में रिपब्लिकन पार्टी का साथ देने वाले युवा और हिस्पैनिक मतदाता इस बार बड़े पैमाने पर छिटक गए हैं। सदन और सीनेट दोनों में पूर्ण बहुमत हासिल करने की कगार पर खड़ी डेमोक्रेटिक पार्टी अब ट्रंप के निरंकुश माने जा रहे फैसलों पर संवैधानिक अंकुश लगाने की स्थिति में पहुंच रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनावी हार ट्रंप के उस प्रभुत्व पर सीधी चोट है, जिसके तहत उन्होंने पार्टी से पूर्ण निष्ठा की मांग की थी। घटती लोकप्रियता रेटिंग, ईरान के साथ अलोकप्रिय युद्ध और जीवन-यापन के बढ़ते खर्चों ने मतदाताओं के आक्रोश को भड़का दिया। राष्ट्रपति के रूप में उनके अंतिम कार्यकाल के दो साल शेष रहते उनकी राजनीतिक पकड़ सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई है।

ताजा सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि 10 में से 6 मतदाता उनके कामकाज से असंतुष्ट हैं और लगभग 70 फीसदी नागरिक चाहते हैं कि कांग्रेस राष्ट्रपति की शक्तियों पर सख्त निगरानी रखे। इसके अलावा, करीब 60 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ट्रंप राष्ट्रहित के बजाय अपने निजी हितों को अधिक प्राथमिकता देते हैं।

ट्रंप का यह भरोसा गलत साबित हुआ कि 2024 की तरह श्वेत कामकाजी वर्ग, अल्पसंख्यक और युवाओं का बढ़ा हुआ मतदान उनके सहयोगियों की नैया पार लगा देगा। 30 वर्ष से कम उम्र के मतदाताओं में, जो 2024 में ट्रंप और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के बीच लगभग बराबर बंटे थे, इस बार लगभग 70 प्रतिशत ने स्थानीय डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।

हिस्पैनिक समुदाय में भी रिपब्लिकन समर्थन घटकर एक-तिहाई रह गया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 40 फीसदी के आसपास था। इस वर्ग के 60 प्रतिशत मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक प्रत्याशियों को चुना और लगभग 70 प्रतिशत का मानना है कि ट्रंप की नीतियों ने देश की आर्थिक स्थिति को बिगाड़ा है। यह बदलाव 2028 के आगामी राष्ट्रपति चुनाव की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगा।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों का एक ही मध्यावधि चुनाव में विपक्षी दल के पाले में जाना केवल तीन बार—1946, 1994 और 2006—में देखा गया था। अब 2026 में इतिहास खुद को दोहराने की दहलीज पर खड़ा है।

डेमोक्रेट्स ने ओहियो और टेक्सास जैसे राज्यों में सीनेट और गवर्नर दोनों के मुकाबलों में जीत दर्ज की, जहां 2024 में ट्रंप ने क्रमशः 11 और 14 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीत हासिल की थी। नॉर्थ कैरोलाइना में पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने सीनेट सीट जीती, जबकि जॉर्जिया में सीनेटर जॉन ओसॉफ दोबारा चुने गए।

न्यू हैंपशायर से क्रिस पापा पहली बार खुले तौर पर समलैंगिक सीनेटर बने। ओहियो में शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन पार्टी से सीनेट सीट छीन ली और पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी एमी एक्टन ने ट्रंप के करीबी विवेक रामास्वामी को गवर्नर पद के मुकाबले में हरा दिया।

कंसास में देश के सबसे बड़े यूनाइटेड मेथोडिस्ट चर्च के प्रमुख और पहली बार चुनाव लड़ रहे डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन ने मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल को मात दी। टेक्सास में 37 वर्षीय राज्य कानून निर्माता जेम्स टैलारिको सीनेट के लिए चुने गए, जबकि जीना हिनोजोसा ने तीन बार के गवर्नर ग्रेग एबॉट को शिकस्त दी।

ट्रंप के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत झटका साउथ कैरोलाइना में लगा, जहां दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की जगह उनकी बहन डार्लिन ग्राहम को ट्रंप ने मैदान में उतारा था, जिन्हें पहली बार राजनीति में उतरीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एनी एंड्रयूज ने हरा दिया।

सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी की 53-47 की बढ़त अब गंभीर खतरे में है, जबकि प्रतिनिधि सभा में उनकी पूर्ववर्ती 220-215 की मामूली बढ़त के खिलाफ डेमोक्रेट्स 60 से अधिक सीटों को निशाना बना रहे हैं। इनमें वे सीटें भी शामिल हैं जहां ट्रंप ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।

इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी के अपने संगठनात्मक ढांचे में चुनौतियां बरकरार हैं। पार्टी का उदारवादी खेमा जोश शापिरो और वेस मूर की गवर्नर के रूप में दोबारा जीत से उत्साहित है, जिन्हें 2028 के भावी दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, फ्लोरिडा में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट एंजी निक्सन को सीनेट मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। प्रगतिशील गुट की निगाहें मिशिगन पर टिकी हैं, जहां अब्दुल अल-सईद रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मुकाबले में हैं। न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी के मेयर बनने के बाद स्विंग राज्यों में प्रगतिशील राजनीति की यह कड़ी परीक्षा है। सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग आधे मतदाता अब भी डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति नकारात्मक राय रखते हैं, हालांकि रिपब्लिकन के प्रति ऐसा सोचने वालों की संख्या 60 प्रतिशत है।

चुनावी लाभ के लिए सीमाओं के नए सिरे से निर्धारण का ट्रंप का दांव भी उल्टा पड़ता दिखा है। टेक्सास में शुरू की गई इस कवायद का कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने करारा जवाब दिया था। कागजों पर रिपब्लिकन को नौ सीटों का लाभ मिलने की संभावना जताई गई थी, लेकिन समर्थकों को कई क्षेत्रों में बिखेरने की रणनीति विफल रही।

फ्लोरिडा के जिन क्षेत्रों में रिपब्लिकन बढ़त सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से सीमाएं तय की गई थीं, वहां भी डेमोक्रेट्स ने बाजी मार ली। प्रतिनिधि जेरेड मॉस्कोविट्ज़ ने 25वें जिले से, पहली बार चुनाव लड़ रहीं पिया दांडिया ने 22वें जिले से और कैथी कैस्टर ने 14वें जिले से जीत हासिल कर ट्रंप की चुनावी घेराबंदी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

उक्त लेख मूल रूप से द वायर वेबसाइट द्वारा प्रकाशित की जा चुकी है.

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