अमेरिका के मिशिगन प्रांत में इतिहास रचते हुए अब्दुल अल-सईद देश के पहले मुस्लिम सीनेटर निर्वाचित हुए हैं। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उत्साहित समर्थकों के बीच 42 वर्षीय अल-सईद ने अपनी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू को गले लगाकर इस ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय दिया। अल-सईद की इस जीत की गूंज हजारों किलोमीटर दूर भारत में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले स्थित भटकल कस्बे में भी सुनाई दे रही है, जहां उनकी पत्नी का पैतृक परिवार रहता है।
मिशिगन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान मिले इस दंपति के इस मुकाम पर पहुंचने से कर्नाटक स्थित ससुराल पक्ष बेहद उत्साहित है। पेशे से मनोचिकित्सक डॉ. सारा जुकाकू का संबंध कर्नाटक के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक और पेशेवर परिवार से है। उनके दादा स्वर्गीय जुकाकू शमसुद्दीन जाने-माने वकील थे, जिन्होंने बी.डी. जत्ती के मंत्रिमंडल में उप वित्त मंत्री और एस. निजलिंगप्पा की सरकार में बिजली व जल संसाधन मंत्री के रूप में कार्य किया था। 27 मार्च 1974 को 51 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था।
सारा के पिता डॉ. तैयब जुकाकू, जो जुकाकू शमसुद्दीन के तीसरे बेटे हैं, बेंगलुरु मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका चले गए थे और वहां एक सफल नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। दामाद की जीत पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मिशिगन के मतदाताओं ने मजहबी पूर्वाग्रहों और ‘पराएपन’ की सोच को नकारते हुए अब्दुल के मूल्यों, ईमानदारी और समर्पण पर भरोसा जताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह जनादेश कॉर्पोरेट लालच और सत्ता के भूखे राजनीतिक अभिजात्य वर्ग के खिलाफ एक नई शुरुआत करेगा।
भटकल में रह रहीं सारा की चाची और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आलिया नाजनीन जुकाकू ने इस जीत को पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने याद किया कि अल-सईद इससे पहले पारिवारिक शादियों में शामिल होने के लिए कई बार भटकल आ चुके हैं। वहीं, चेन्नई में रह रहे सारा के ताऊ अब्दुस्सलाम शमसुद्दीन जुकाकू ने चुनाव पर लगातार नजर रखी हुई थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके पिता ने हमेशा जनता की सेवा की और उन्हें पूरी उम्मीद है कि अब्दुल भी उसी निष्ठा से आम लोगों के हक की आवाज बनेंगे। दुबई में रहने वाले सारा के सबसे छोटे चाचा फजलुर रहमान जुकाकू ने कहा कि 52 फीसदी से अधिक मतों के साथ मिली यह स्पष्ट बढ़त दुनिया भर के लोगों में एक नई उम्मीद जगाती है।
मिस्र मूल के पिता मोहम्मद और मिशिगन निवासी सौतेली मां जैकी के संरक्षण में पले-बढ़े अब्दुल अल-सईद का सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। रोड्स स्कॉलर रहे अल-सईद ने वर्ष 2011 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट और फिर कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल की डिग्री हासिल की। 2015 में वह डेट्रायट स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी निदेशक बने और बाद में वेन काउंटी के स्वास्थ्य व मानव सेवा विभाग के निदेशक पद पर रहे। इससे पहले वर्ष 2018 में उन्होंने मिशिगन के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी लड़ी थी, जिसमें उन्हें ग्रेचेन व्हिटमर से हार का सामना करना पड़ा था।
इस चुनाव में अल-सईद ने बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और राजनीति से कॉर्पोरेट प्रभुत्व खत्म करने को मुख्य मुद्दा बनाया। चुनाव अभियान के दौरान रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स के अलावा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस ने उनके धर्म और पश्चिम एशिया नीति पर कड़े व्यक्तिगत हमले किए। ट्रंप ने उन पर सोशल मीडिया पर तीखे तंज कसे, जबकि वेंस ने भी विवादित बयान दिए।
डेट्रायट स्थित अपने चुनावी मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए सीनेटर-निर्वाचित अब्दुल अल-सईद ने विरोधियों को सख्त संदेश दिया। उन्होंने उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर इशारा करते हुए चुटकी ली कि संवैधानिक तौर पर जनवरी में उन्हें ही पद की शपथ दिलानी होगी। साथ ही डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब शपथ ग्रहण हो, तब वे उन्हें सिर्फ ‘सीनेटर’ कहकर संबोधित कर सकते हैं।
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