अहमदाबाद का ऐतिहासिक गौरव लाल फीताशाही और प्रशासनिक सुस्ती का शिकार हो गया है। शहर के पुराने इलाके (ओल्ड सिटी) के बाहर स्थित सात अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों को जमींदोज कर दिया गया है। यह भारी नुकसान अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) द्वारा इन इमारतों को ‘हेरिटेज टैग’ देने में की गई 12 साल की लंबी देरी का सीधा परिणाम है।
इन इमारतों को गिराए जाने की यह दुखद घटना 382 ऐतिहासिक संरचनाओं को हेरिटेज का दर्जा मिलने से ठीक पहले हुई। 24 अगस्त 2026 को हेरिटेज और रीक्रिएशनल कमेटी की एक अहम बैठक में इन 382 इमारतों को हेरिटेज टैग देने की प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दी गई थी। एएमसी की स्थायी समिति से भी इस प्रस्ताव को अंततः हरी झंडी मिल गई थी।
प्रस्ताव पास होने के बाद जब हेरिटेज समिति ने जनता की आपत्तियां और सुझाव मांगने की तैयारी शुरू की, तो नागरिक निकाय के हेरिटेज विभाग ने साइट निरीक्षण का काम किया। इसी निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि सूची में शामिल सात धरोहरें पहले ही पूरी तरह नष्ट की जा चुकी हैं।
नष्ट की गई इन संरचनाओं में गुजरात कॉलेज परिसर का रेक्टर्स बंगला और कॉमर्स कॉलेज की इमारत शामिल हैं। इनके अलावा कांकरिया रोड स्थित कलोलिया वाड़ी मंदिर, मीठाखली गांव के वचलो वास का हेरिटेज गेट, सरखेज का ऐतिहासिक चबूतरा (बर्ड फीडर टावर), सरखेज का त्रिपाठी हाउस और परिमल गार्डन रोड स्थित हर्षवर्धन मंगलदास हाउस को भी हमेशा के लिए मिटा दिया गया है।
कायदे से इन अमूल्य संरचनाओं को एक दशक से भी अधिक समय पहले सुरक्षा कवच मिल जाना चाहिए था। दिसंबर 2014 में एएमसी ने ओल्ड सिटी की सीमाओं के बाहर स्थित ऐतिहासिक इमारतों के सर्वेक्षण का जिम्मा ‘इंटैक’ (INTACH) को सौंपा था। इंटैक की विस्तृत रिपोर्ट में 861 ऐतिहासिक संरचनाओं की पहचान की गई थी, जिनमें से 382 को चुनकर उनकी ग्रेडिंग की गई थी।
अब बाकी बची संरचनाओं को हेरिटेज टैग मिलने के बाद उन्हें गिराया नहीं जा सकेगा। इनके संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एएमसी संपत्ति के मालिकों को ‘ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स’ (टीडीआर) का लाभ प्रदान करेगी। इन सभी संरचनाओं के लिए एक नई और प्रभावी नीति तैयार करने का काम भी वर्तमान में जोरों पर है।
नाम न छापने की शर्त पर एएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अहमदाबाद के ओल्ड सिटी क्षेत्र के बाहर की ऐतिहासिक इमारतें शहर के इतिहास में बहुत खास स्थान रखती हैं। ऐसी करीब 400 संरचनाएं हैं, जिनमें फतेहवाड़ी गांव का फतेहबाग पैलेस, गुजरात विद्यापीठ, गुजरात कॉलेज और सर्किट हाउस जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
यूनेस्को ने जुलाई 2017 में अहमदाबाद को ‘वर्ल्ड हेरिटेज सिटी’ का प्रतिष्ठित दर्जा दिया था। लेकिन शहर के ओल्ड सिटी इलाके के बाहर की इमारतों को हमेशा ही घोर उपेक्षा का सामना करना पड़ा है। इस अंतरराष्ट्रीय दर्जे के मिलने से पहले, शहर की ऐतिहासिक संपत्तियों को सुरक्षित रखने और उनके सांस्कृतिक महत्व को बचाए रखने के लिए कई रिपोर्ट तैयार की गई थीं।
इन 382 संरचनाओं को उनके वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के आधार पर औपचारिक रूप से चार श्रेणियों में बांटा गया था। इनमें 52 संरचनाओं को ग्रेड 1, 38 को ग्रेड 2ए, 49 को ग्रेड 2बी और 243 संरचनाओं को ग्रेड 3 का दर्जा दिया गया था।
इन इमारतों की भौतिक स्थिति की बात करें तो एक रिपोर्ट के अनुसार 18 प्रतिशत इमारतें ‘अच्छी’ स्थिति में थीं और 37 प्रतिशत ‘संतोषजनक’ स्थिति में थीं। इसके अलावा 25 प्रतिशत इमारतों में क्षय या खराबी के संकेत दिख रहे थे, 15 प्रतिशत गंभीर रूप से जर्जर थीं और 5 प्रतिशत के पूरी तरह लुप्त होने का खतरा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरी तरह लुप्त होने की कगार पर खड़ी इमारतों पर भी नागरिक निकाय ने कोई खास ध्यान नहीं दिया।
हालांकि, एएमसी के एक अधिकारी ने यह भी दावा किया कि ऐतिहासिक महत्व की संरचनाओं को बचाने के लिए विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एएमसी ने शहर की पुलिस को पत्र लिखकर रायखड में ऐतिहासिक गायकवाड़ हवेली परिसर के भीतर कुछ हेरिटेज संरचनाओं को गिराने से रोकने का अनुरोध किया था, जिसके बाद पुलिस ने इस विध्वंस को सफलतापूर्वक रुकवा दिया था।
इसी तरह का एक और वाकया साझा करते हुए अधिकारी ने बताया कि रायखड चौराहे के पास एक ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान भी टूटने के कगार पर था। एएमसी ने एक लिखित अनुरोध भेजकर इसे न गिराने की अपील की, जिसके परिणामस्वरूप संरचना को ढहाने के बजाय उसका नवीनीकरण किया गया।
एक अन्य मामले में, राज्य सरकार के सड़क और भवन (आर एंड बी) विभाग ने शाहीबाग में ओल्ड सर्किट हाउस भवन को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। लेकिन इमारत के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए एएमसी ने इसे रोकने के लिए तुरंत एक पत्र लिखा और आखिरकार विध्वंस योजना को रद्द कर दिया गया।
इन सफलताओं के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि एएमसी के पास वर्तमान में ऐसी किसी भी ऐतिहासिक संरचना को गिराने से रोकने का सीधा कानूनी अधिकार नहीं है, जो केंद्र या राज्य सरकार की आधिकारिक हेरिटेज सूची में शामिल न हो।
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