अहमदाबाद। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला की कांग्रेस में संभावित वापसी ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ा दी है। गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस बात की पुष्टि की है कि वाघेला को पार्टी में शामिल करने को लेकर आलाकमान के साथ बातचीत चल रही है।
प्रदेश अध्यक्ष चावड़ा ने स्पष्ट किया कि वाघेला समेत कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को कांग्रेस में वापस लाने के विषय पर विचार-विमर्श जारी है। खुद शंकरसिंह वाघेला ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी के साथ चर्चा चल रही है। हालांकि, उनकी आधिकारिक रूप से कांग्रेस में वापसी पूरी तरह से दिल्ली स्थित आलाकमान की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगी।
इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए चावड़ा ने कहा कि शंकरसिंह वाघेला और अन्य लोगों की नियुक्ति को लेकर केंद्रीय नेतृत्व के साथ बातचीत अहम दौर में है। यह राजनीतिक हलचल 2027 के गुजरात विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सामने आई है, जिसने राज्य के सियासी समीकरणों को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
गौरतलब है कि वाघेला ने साल 2017 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। उनका वह कदम पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत का हिस्सा था, जिसमें उनके साथ जुड़े कई विधायकों ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ दिया था। उनका राजनीतिक सफर बेहद लंबा और राजनीतिक विविधताओं से भरा रहा है। साल 1995 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से बगावत कर राष्ट्रीय जनता पार्टी (RJP) का गठन किया था।
बाद में, वाघेला कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए और अंततः 1998 में वह औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि, 2017 में कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद उन्होंने ‘जन विकल्प मोर्चा’ बनाया, लेकिन उस साल के विधानसभा चुनाव में उनके उम्मीदवारों को एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई।
जनवरी 2019 में वाघेला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हो गए और वहां उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका निभाई, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने एनसीपी भी छोड़ दी। इसके बाद नवंबर 2024 में उन्होंने अपने आवास ‘वसंत वागडो’ में एक स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया, जहां ‘प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी’ के नाम से एक नए राजनीतिक दल की घोषणा की गई।
इसी साल सितंबर 2026 में वाघेला ने सार्वजनिक तौर पर यह संकेत दिया था कि उनकी योजना 2027 के गुजरात चुनाव में अपनी नई पार्टी के बैनर तले स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने की है। हाल के दिनों में उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने कई नई चर्चाओं को जन्म दिया है। अब कांग्रेस के साथ उनकी ताजा बातचीत उनके लंबे राजनीतिक सफर में एक नया मोड़ साबित हो सकती है, जिसकी औपचारिक घोषणा आलाकमान के फैसले के बाद ही होगी।
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