गुजरात में दिल से जुड़ी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई हैं। साल 2026 के ताजा आंकड़े एक बेहद डरावनी तस्वीर पेश करते हैं। ईएमआरआई 108 (EMRI 108) एंबुलेंस ने इस साल अब तक 71,088 मरीजों को कार्डियक इमरजेंसी के चलते अस्पताल पहुंचाया है। यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में एक बहुत बड़ा उछाल है। कॉल के विश्लेषण से एक और भी हैरान करने वाली बात सामने आई है कि आपातकालीन मामलों में हर 10 में से तीन मरीज 40 साल या उससे कम उम्र के थे।
हर साल 29 सितंबर को हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ (World Heart Day) मनाया जाता है। इस साल की थीम ‘यूज हार्ट फॉर एक्शन’ (Use Heart for Action) रखी गई है। यह थीम लोगों को सही विकल्प चुनने और बचाव के तरीके अपनाने के महत्व को रेखांकित करती है।
शहर के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कमल शर्मा ने एक हालिया अध्ययन का जिक्र किया। यह महत्वपूर्ण रिसर्च यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर (UN Mehta Institute of Cardiology and Research Centre) में की गई थी। इस शोध में 30 वर्ष तक के मरीजों में हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या विशेष रूप से STEMI) के कारणों का गहराई से आकलन किया गया। डॉ. शर्मा के अनुसार, इस दौरान कई अप्रत्याशित और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
इस शोध में 30 साल से कम उम्र के हार्ट अटैक के मरीजों के तंबाकू के सेवन, बीएमआई (BMI), खानपान की आदतों और नींद के पैटर्न का अध्ययन किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, इस उम्र वर्ग के 53 प्रतिशत मरीजों का तंबाकू सेवन का इतिहास रहा। वहीं 51 फीसदी मरीजों ने दिन में 30 मिनट से भी कम शारीरिक गतिविधि करने की बात मानी। इसके साथ ही 49 प्रतिशत मरीजों ने बाहर का खाना खाने या भोजन के समय में अनियमितता की जानकारी दी।
युवाओं में हार्ट अटैक के अन्य संकेतकों पर भी गौर किया गया। लगभग 47 प्रतिशत मरीजों को खर्राटे की समस्या थी, जबकि 31 प्रतिशत में हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास मिला। करीब 28 फीसदी मरीजों ने खुद तनाव महसूस करने की बात कही और 31 प्रतिशत ने अचानक अत्यधिक शारीरिक परिश्रम या थकान वाली गतिविधि की जानकारी दी। हैरान करने वाली बात यह रही कि 24 फीसदी मरीजों में समय से पहले बाल सफेद होने या झड़ने की समस्या थी और 14 प्रतिशत मरीजों में शराब पीने का इतिहास पाया गया।
इस अध्ययन में युवा मरीजों की तुलना समान स्थिति वाले अधिक उम्र के हृदय रोगियों से भी की गई। इन दोनों समूहों में हृदय रोग के जोखिम काफी अलग पाए गए। अधिक उम्र के मरीजों में तंबाकू का सेवन 37 प्रतिशत था, जबकि 56 प्रतिशत युवा मरीजों की रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न (narrowed vessels) पाई गई। खराब कोलेस्ट्रॉल (Dyslipidaemia) का स्तर अधिक उम्र के मामलों में 19 प्रतिशत था, जबकि युवाओं में यह 9 प्रतिशत मिला।
खानपान की आदतों और तनाव के स्तर में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। अधिक उम्र के मरीजों में बाहर खाने की आदत केवल 5 प्रतिशत थी। तनाव के मामले में भी काफी भिन्नता रही, जहां बुजुर्गों में तनाव का आंकड़ा केवल 10 प्रतिशत था, वहीं 30 वर्ष या उससे कम उम्र के समूह में 28 प्रतिशत लोग तनावग्रस्त थे।
यह महत्वपूर्ण रिसर्च ‘जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी’ (Journal of Clinical and Preventive Cardiology) में प्रकाशित हुई है। इस अध्ययन को तैयार करने वाले लेखकों में अमित सोनी, रुजुता पारिख और ईवा पटेल समेत कई अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं।
शहर के एक अन्य कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जय शाह का कहना है कि पिछले कुछ दशकों में मरीजों की औसत उम्र लगातार कम हुई है। उनके अनुसार काम के बढ़ते दबाव से लेकर प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय कारक हृदय रोगों के खतरे को काफी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ साल पहले अचानक मौत के वीडियो वायरल होने के बाद, लोगों में अपने दिल की सेहत को लेकर थोड़ी जागरूकता जरूर आई है।
नारायणा अस्पताल (Narayana Hospital) के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुमित धीर ने बताया कि इस साल उन्होंने 20 से 30 साल के बीच के कई मरीजों का इलाज किया है। युवा अब अपने दिल की देखभाल के लिए अधेड़ उम्र का इंतजार नहीं कर सकते, उन्हें अभी से शुरुआत करनी होगी। मोटापा, मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास जैसे कारक इस खतरे को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
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