अहमदाबाद की ऐतिहासिक ‘वॉल सिटी’ की विरासत को सहेजने के लिए सरकार कड़े कदम उठाने जा रही है। गुजरात सरकार ने इस यूनेस्को विश्व धरोहर क्षेत्र में बड़े पैमाने के कमर्शियल और संस्थागत निर्माण पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य शहर के पुराने और ऐतिहासिक स्वरूप को बरकरार रखना है।
राज्य के शहरी विकास और शहरी आवास विभाग ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट अधिसूचना जारी की है। इसमें व्यापक सामान्य विकास नियंत्रण विनियम (CGDCR) में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार ने 28 जुलाई को अधिसूचित इन बदलावों पर 3 अक्टूबर तक आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। पहली बार पूरे राज्य के विभिन्न जोन के लिए प्रतिबंधित निर्माण कार्यों की एक स्पष्ट सूची पेश की गई है।
इन प्रस्तावित नियमों के तहत ‘वॉल सिटी’ में सबसे ज्यादा पाबंदियां लगाई गई हैं। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो इस हेरिटेज जोन में अब नए थोक बाजार, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, उद्योग, कॉलेज और पॉलिटेक्निक नहीं बन सकेंगे। इसके साथ ही कन्वेंशन सेंटर, प्रदर्शनी हॉल, ऑडिटोरियम, स्टेडियम, म्यूजियम, कम्युनिटी हॉल, क्लब और गोल्फ कोर्स के निर्माण पर भी पूरी तरह से रोक होगी।
नए ड्राफ्ट में औद्योगिक निर्माण को लेकर भी बेहद सख्त रुख अपनाया गया है। अब हेरिटेज क्षेत्र में नए बूचड़खाने, मांस और चमड़ा प्रसंस्करण इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज और ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगाए जा सकेंगे। एग्रो और पैकेजिंग उद्योग, इंजीनियरिंग इकाइयां, फ्लाई-ऐश उद्योग, ईंधन भंडारण सुविधाएं, गैस व थर्मल पावर प्लांट, रासायनिक उद्योग, वेयरहाउस और गोदाम बनाने की भी सख्त मनाही होगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को भी इन नए नियमों के दायरे में लाया गया है। ‘वॉल सिटी’ इलाके में नए सिविल अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सेंटर के निर्माण पर पाबंदी लगाने का प्रस्ताव है। इतना ही नहीं, 20 से अधिक बेड वाले बड़े अस्पताल, संक्रामक रोग अस्पताल और मानसिक अस्पतालों के निर्माण को भी मंजूरी नहीं मिलेगी।
एक अन्य बड़े बदलाव के तहत इस इलाके में अब अफोर्डेबल हाउसिंग (किफायती आवास) योजनाओं पर भी रोक लगेगी। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले का सीधा असर बंद हो चुकी कपड़ा मिलों की उन जमीनों पर पड़ेगा जो पहले आवासीय परियोजनाओं के लिए योग्य थीं। यह छूट अहमदाबाद के 2014 के जनरल डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशंस (GDCR) के तहत मिली थी, जिसे 2017 में लागू हुए राज्यव्यापी CGDCR में भी बरकरार रखा गया था।
शहरी विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह संशोधन प्लानिंग के ढांचे में एक बुनियादी बदलाव लेकर आएगा। पहले के नियमों में यह बताया जाता था कि किसी जोन में किस तरह का निर्माण हो सकता है। नए नियमों में प्रतिबंधित चीजों की साफ लिस्ट दी गई है, जिससे यह तय करना आसान हो जाएगा कि किसे मंजूरी नहीं देनी है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जो भी चीजें इस प्रतिबंधित सूची में नहीं हैं, उन्हें आम तौर पर अनुमति दी जाएगी।
संशोधित नियमों में पेइंग गेस्ट (PG) आवास, हॉस्टल और प्री-स्कूलों के लिए भी विशेष प्रावधान पेश किए गए हैं। बीते कुछ वर्षों में अहमदाबाद में इन गतिविधियों को लेकर काफी विवाद देखने को मिला था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।
अहमदाबाद को साल 2017 में भारत का पहला यूनेस्को विश्व धरोहर शहर घोषित किया गया था। हालांकि, इसके बाद से पुराने शहर में कमर्शियल गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं और कई हिस्सों में बड़े गोदाम और थोक बाजार अपनी जगह बनाते चले गए।
अधिकारियों का कहना है कि इन संशोधनों का मुख्य मकसद उन कमर्शियल गतिविधियों को फैलने से रोकना है जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। नए नियम लागू होने के बाद, प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाली मौजूदा संपत्तियों को भी उसी काम के लिए दोबारा विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस सख्ती से वॉल सिटी के भीतर थोक बाजारों और बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की दोबारा वापसी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। नागरिक इन प्रस्तावित संशोधनों पर 3 अक्टूबर तक अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद राज्य सरकार इन नियमों पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
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