नई दिल्ली / होशियारपुर: अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने रंगदारी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पंजाब पुलिस के एक अधिकारी को नामजद किया है। इस अधिकारी पर करीब 4 लाख डॉलर (लगभग 3.3 करोड़ रुपये) की जबरन वसूली के मामले में शामिल होने का आरोप है। वैश्विक स्तर पर संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे एक बड़े अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पंजाब के टांडा पुलिस स्टेशन के प्रभारी (SHO) गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम सामने आया है। एफबीआई ने ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम से अमेरिका, कनाडा और यूरोप में सक्रिय आपराधिक गुटों के खिलाफ तीन अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं। इन्हीं में से एक चार्जशीट में इस भारतीय पुलिस अधिकारी की भूमिका का जिक्र किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की इस बड़ी कार्रवाई की खबर फैलते ही पंजाब पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में वरिष्ठ अधिकारियों ने एक्शन लेते हुए आरोपी एसएचओ गुरिंदरजीत सिंह नागरा को टांडा थाने से हटाकर होशियारपुर पुलिस लाइंस भेज दिया है। इसके साथ ही मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
जलंधर रेंज के डीआईजी (DIG) कार्यालय के अनुसार, सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में आ रही रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया गया है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि तथ्यों के पूरी तरह सत्यापित होने तक अधिकारी को तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके।
होशियारपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इस संबंध में बताया कि ट्रांसफर की यह कार्रवाई सिर्फ एक एहतियाती कदम है। फिलहाल यह पूरा मामला इंटरनेट पर वायरल वीडियो और शुरुआती सूचनाओं पर आधारित है। इस संबंध में अभी तक भारत सरकार या पंजाब सरकार के माध्यम से कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत दस्तावेज राज्य पुलिस को नहीं मिले हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीआईजी ने जांच का जिम्मा जलंधर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक (SP – इन्वेस्टिगेशन) को सौंप दिया है। पंजाब पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि इस आंतरिक जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही आरोपी अधिकारी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने पंजाब की सियासत में भी भूचाल ला दिया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे को लेकर सूबे की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस, गैंगस्टर्स और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच एक खतरनाक गठजोड़ काम कर रहा है।
अकाली दल के नेता ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पीड़ित परिवार को अमेरिका में डराया-धमकाया जा रहा था, जबकि भारत में मौजूद उनके रिश्तेदारों को झूठे हत्या के मामले में फंसाने की साजिश रची जा रही थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अमेरिकी एजेंसी पहले गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई जैसे गैंगस्टर्स की तलाश कर रही थी, उसी सूची में अब पंजाब पुलिस के एक अफसर का नाम आना बेहद शर्मनाक है।
विपक्ष ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अगर इस मामले में अमेरिकी एजेंसियां कानूनी शिकंजा कसती हैं, तो अपराधियों और व्यवस्था के बीच के कई और बड़े राज दुनिया के सामने आ सकते हैं।
यह पूरा मामला अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ का हिस्सा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत से संचालित होने वाले उन आपराधिक सिंडिकेट को ध्वस्त करना है, जो विदेशों में जबरन वसूली, हत्या और ड्रग्स की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।
इसी कार्रवाई के तहत एफबीआई ने कुख्यात गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने वाले को 50,000 डॉलर तक का इनाम देने की भी घोषणा की है। गोल्डी बराड़ को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का मुख्य सिंडिकेट ऑपरेटर माना जाता है।
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से दर्ज की गई तीन चार्जशीट में गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई सहित कुल 37 आरोपियों के नाम शामिल हैं। इन अदालती दस्तावेजों में जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा जैसे अपराधियों का भी नाम है, जिनके नेटवर्क अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में फैले हुए हैं।
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