नई दिल्ली। राम मंदिर दान चोरी मामले में सियासत पूरी तरह से गरमा चुकी है। बुधवार को कांग्रेस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की तत्काल गिरफ्तारी की मांग उठाई है। मुख्य विपक्षी दल ने इस पूरे प्रकरण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी घेरते हुए उनसे माफी मांगने को कहा है। कांग्रेस का तर्क है कि मंदिर प्रशासन के लिए ऐसे लोगों का चयन करना पीएम की एक बहुत बड़ी गलती थी।
यह आक्रामक रुख तब सामने आया है जब चंपत राय द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपे गए एक बयान में दान-गिनती प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की भूमिका पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं। राय ने फिलहाल यह कहते हुए अपना बचाव किया है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वह अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का जवाब देंगे।
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री इस घटना से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्यों और अन्य प्रमुख आध्यात्मिक नेताओं से किसी भी तरह का विचार-विमर्श किए बिना ही प्रधानमंत्री ने अपनी मर्जी से ट्रस्ट में लोगों को नामित कर दिया था।
गोहिल ने यह भी साफ किया कि वह मंदिर के मामलों पर सरकारी नियंत्रण के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। हालांकि उन्होंने इस ट्रस्ट को भंग करने की अपनी पार्टी की पुरानी मांग को एक बार फिर दोहराया। कांग्रेस नेता के अनुसार नए ट्रस्ट का चयन शंकराचार्यों, सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधियों और समाज के अन्य सम्मानित धार्मिक गुरुओं द्वारा किया जाना चाहिए।
अयोध्या में हुए कथित भूमि घोटाले की याद दिलाते हुए गोहिल ने दावा किया कि यदि उसी समय इस ट्रस्ट को भंग करके राय को हटा दिया गया होता, तो आज यह नौबत कभी नहीं आती। दान पेटी की चाबी को लेकर उन्होंने तीखा सवाल किया कि आखिर कौन अपनी चाबियां ड्राइवर को सौंपता है? कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि इस आधार पर चंपत राय को फौरन गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
गोहिल के मुताबिक अगर राय खुद यह स्वीकार करते हैं कि चाबियां उनके ड्राइवर के पास रखी गई थीं, तो इसके लिए अब किसी और सुबूत की आवश्यकता नहीं रह जाती है। उन्होंने कहा कि जिस चीज की जिम्मेदारी आपकी थी, उसे अगर ड्राइवर को दे दिया गया, तो सीधे तौर पर आप ही इसके लिए कसूरवार हैं।
कांग्रेस ने एसआईटी की जांच पर भी सवालिया निशान लगाए हैं। गोहिल ने दावा किया कि राय को पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री उन्हें बचा लेंगे और इसी राजनीतिक दबाव के कारण वह बड़ी बेफिक्री से रिपोर्ट आने का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इस मामले की स्वतंत्र जांच हो जाए, तो चंपत राय अपनी बाकी जिंदगी सलाखों के पीछे ही गुजारेंगे।
सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए गोहिल ने कहा कि मोदी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते क्योंकि उन्होंने ही राय को ट्रस्ट में नियुक्त किया था। इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस मशहूर कथन का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर चौकीदार नहीं भौंकता है, तो समझ लेना चाहिए कि उसकी चोरों से जान-पहचान है।
गोहिल ने यह भी याद दिलाया कि चंपत राय वही व्यक्ति हैं जिन्होंने एक बार प्रधानमंत्री को भगवान विष्णु का अवतार बता दिया था। कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि उस वक्त भी पीएम मोदी ने उन्हें टोक कर उनकी इस गलती को नहीं सुधारा था।
पैसों की हेराफेरी के आंकड़े पेश करते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन आने वाला चढ़ावा पहले 16 से 18 लाख रुपये हुआ करता था। गबन का खुलासा होने के बाद अब यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन हो गया है। इस भारी उछाल से यह सीधा संदेह पैदा होता है कि रोजाना करीब 10 लाख रुपये की चोरी की जा रही थी।
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