अहमदाबाद: गुजरात सरकार गिर अभयारण्य के आसपास प्रस्तावित इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के नियमों में किसानों को राहत देने की तैयारी कर रही है। किसानों द्वारा नियमित कृषि गतिविधियों पर लगी रोक को लेकर चिंता जताए जाने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत उचित सुरक्षा उपायों के साथ मशीनीकृत खेती, खेतों की बाड़बंदी और कुएं खोदने की अनुमति दी जा सकेगी।
हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि मुख्य गिर अभयारण्य के इको-सेंसिटिव जोन के दायरे को कम करने की कोई संभावना नहीं है। साल 2025 की गणना के अनुसार, गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में 30,000 वर्ग किलोमीटर के इलाके में 891 शेर मौजूद हैं।
प्रस्तावित इको-सेंसिटिव जोन गिर संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर 2,061.8 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसकी सीमा 2.8 किलोमीटर से लेकर 9.5 किलोमीटर तक तय की गई है। अगर 2016 के गजट से इसकी तुलना करें तो उस समय यह दायरा 0 से 17.9 किलोमीटर के बीच था। सरकार इस दायरे में कोई बदलाव नहीं कर रही है, बल्कि उसका पूरा ध्यान केवल किसानों पर लागू होने वाली शर्तों को आसान बनाने पर है।
केंद्र सरकार को अंतिम मंजूरी के लिए भेजे जाने वाले प्रस्ताव से पहले इन प्रस्तावित छूटों को एक रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में अब ट्रैक्टर और खेती से जुड़ी अन्य मशीनों के उपयोग की अनुमति मिल सकती है। इसके अलावा खेतों के चारों ओर बाड़ लगाने की छूट भी दी जा सकती है, लेकिन कांटेदार तारों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध जारी रहेगा।
सुरक्षा शर्तों को ध्यान में रखते हुए किसानों को अपने खेतों में कुएं खोदने की भी इजाजत मिल सकेगी। शेरों को किसी भी संभावित दुर्घटना या कुएं में गिरने से बचाने के लिए किसानों को इन कुओं के चारों ओर एक सुरक्षित चारदीवारी (पैरापेट) का निर्माण करना अनिवार्य होगा।
किसानों को हो रही परेशानियों पर चर्चा करने के लिए हाल ही में वन और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों तथा विधायकों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसके बाद ये फैसले लिए गए। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने बताया कि यह बैठक इसलिए आयोजित की गई क्योंकि यह पूरा मामला अभी अदालत में लंबित है।
इको-सेंसिटिव जोन के इस प्रस्ताव का गिर-सोमनाथ, जूनागढ़ और अमरेली जिलों के कई गांवों में भारी विरोध हो रहा है। किसानों को डर सता रहा है कि नए नियमों के लागू होने से खेती-किसानी, खेतों में निर्माण कार्य, बिजली कनेक्शन लेने और बाड़ लगाने जैसी बुनियादी चीजों पर रोक लग सकती है।
इस विरोध के बीच राज्य सरकार ने लगातार यह आश्वासन दिया है कि ट्रैक्टर का उपयोग करने, कुएं खोदने, बिजली का कनेक्शन लेने और अपनी कृषि भूमि के भीतर आवाजाही करने जैसी खेती की रोजमर्रा की गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा।
राज्य मंत्री माली ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने पहले ही अपने दावे प्रस्तुत कर दिए हैं, उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि अगर इस पूरे मामले में कोई गलतफहमी पैदा हुई है, तो सरकार और किसान एक साथ बैठकर उसे सुलझा लेंगे।
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