comScore कूनो के बाद अब कच्छ में दौड़ेंगे चीते: स्वागत की तैयारियों में जुटा वन विभाग, भावनगर से शिफ्ट होंगे 500 काले हिरण - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

कूनो के बाद अब कच्छ में दौड़ेंगे चीते: स्वागत की तैयारियों में जुटा वन विभाग, भावनगर से शिफ्ट होंगे 500 काले हिरण

| Updated: June 17, 2026 14:19

मध्य प्रदेश के कूनो के बाद अब गुजरात का बन्नी ग्रासलैंड चीतों का दूसरा बड़ा घर बनने जा रहा है। चीतों के लिए प्राकृतिक माहौल और शिकार का मजबूत आधार तैयार करने के लिए भावनगर से 500 काले हिरणों को यहां शिफ्ट किया जाएगा।

गुजरात में चीतों को बसाने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के बाद अब कच्छ का बन्नी ग्रासलैंड भारत में चीतों का दूसरा सबसे बड़ा घर बनने जा रहा है। इसके लिए भावनगर के वेलावदार और भाल क्षेत्र से करीब 500 काले हिरणों (ब्लैकबक) को कच्छ के बन्नी में शिफ्ट किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने इस बड़े स्थानांतरण को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बन्नी ग्रासलैंड में चीतों के लिए शिकार का एक मजबूत और प्राकृतिक आधार तैयार करना है। वन अधिकारियों के अनुसार, बन्नी में फिलहाल बड़े शिकारियों के जीवित रहने के लिए पर्याप्त शिकार मौजूद नहीं है।

चीतों के अनुकूल प्राकृतिक माहौल बनाने के लिए वन विभाग पहले ही यहां चीतल और सांभर जैसी प्रजातियों को छोड़ चुका है। अब उनका पूरा ध्यान काले हिरणों की आबादी बढ़ाने पर है, क्योंकि इन्हें चीतों का सबसे पसंदीदा शिकार माना जाता है।

इस दिशा में केंद्र और गुजरात सरकार मिलकर एक और अहम पहल कर रहे हैं। दोनों सरकारें संयुक्त रूप से बन्नी ग्रासलैंड में भारत का पहला चीता कैप्टिव ब्रीडिंग (बंदी प्रजनन) और संरक्षण केंद्र विकसित कर रही हैं।

नवीनतम जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें तो काले हिरणों की अच्छी खासी आबादी इस क्षेत्र में मौजूद है। वल्लभीपुर, सिहोर, धोलेरा, वेलावदार और भाल क्षेत्र के 32 गांवों में काले हिरणों की कुल संख्या 6,300 के करीब दर्ज की गई है।

कच्छ सर्कल के वन संरक्षक धीरज मित्तल ने इस प्रोजेक्ट पर खुशी जताते हुए कहा कि बन्नी में काले हिरणों को शिफ्ट करने की केंद्र से हरी झंडी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि भावनगर के गैर-संरक्षित (राजस्व) क्षेत्रों में रहने वाले इन काले हिरणों को लगातार मानवीय दखल का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह कदम दोनों के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि जानवरों को एक सुरक्षित आवास मिलेगा और बन्नी का इकोसिस्टम भी मजबूत होगा।

वेलावदार के सहायक वन संरक्षक नीलेश जोशी के मुताबिक, बन्नी ग्रासलैंड और भाल क्षेत्र का भौगोलिक व प्राकृतिक माहौल काफी हद तक एक जैसा है, जिससे हिरणों को ढलने में परेशानी नहीं होगी। उन्होंने राजस्व क्षेत्रों में काले हिरणों पर मंडराते खतरों का भी जिक्र किया।

इन गैर-संरक्षित इलाकों में काले हिरणों पर अक्सर आवारा कुत्तों के हमले का खतरा बना रहता है। इसके अलावा धोलेरा के आसपास बढ़ता बुनियादी ढांचा, नमक के मैदानों का विस्तार और कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग उनके लिए बड़े खतरे पैदा कर रहा है। जोशी ने सुझाव दिया है कि काले हिरणों का पहला जत्था इन्हीं असुरक्षित इलाकों से पकड़ा जाना चाहिए ताकि उन्हें बन्नी के सुरक्षित माहौल में भेजा जा सके।

सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो मानसून के दौरान बन्नी में तीन चीतों का पहला जत्था पहुंच जाएगा। फिलहाल इन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो स्थित एक विशेष सुविधा केंद्र में अनिवार्य क्वारंटीन और आइसोलेशन में रखा गया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत दक्षिण अफ्रीका से और चीते आयात करने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।

यह पूरा प्रोजेक्ट राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की सख्त निगरानी में लागू किया जा रहा है। एनटीसीए ही गुजरात में चीतों के लिए आवास विकास, शिकार बढ़ाने की प्रक्रिया और इन शानदार जीवों के लंबे समय तक संरक्षण की पूरी योजना की देखरेख कर रहा है।

यह भी पढ़ें-

प्रिक्स वर्सेल्स 2026: दुनिया के सबसे खूबसूरत हवाई अड्डों की सूची में चमके नवी मुंबई और गुवाहाटी एयरपोर्ट

स्टेम सेल कंपनी की वादाखिलाफी पड़ी भारी: बीमार पति के इलाज में मदद से मुकरने पर लगा 20 लाख का जुर्माना

Your email address will not be published. Required fields are marked *