आईसीयू में है गुजरात की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था , 99 प्रतिशत से ज्यादा विशेषज्ञ के पद रिक्त

| Updated: August 26, 2022 10:04 am

3 प्रसूती एवं स्त्री रोग ,2 फिजिशियन ,2 सर्जन ,6 बाल रोग विशेषज्ञ के सहारे गुजरात

गुजरात सरकार (Gujarat Government )गुजरात में मेडिकल टूरिज्म (Medical tourism in Gujarat)के दावे करती है , जो कुछ हद तक सही भी है , लेकिन निजी अस्पतालों में। गुजरात के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था खुद आईसीयू (ICU) में हैं। प्रशिक्षित तो ठीक इंटर्न डॉक्टर भी ग्रामीण इलाकों में नहीं जाना चाहते। स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ के मामले में यह हालत और चिंताजनक है।

गुजरात के 1477 पीएचसी ( प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र ) (Primary Health Center )में ANM के 2457 पद रिक्त हैं , जबकि छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े राज्य में यह संख्या महज 456 हैं। 379 पीएचसी बिना डॉक्टर के चल रहे हैं। जबकि 2005 में यह संख्या 222 थी यानि 15 साल में स्वास्थ्य व्यवस्था और बीमार हुयी है। जबकि सीएचसी में 1392 विशेषज्ञ में खाली पदों की संख्या चौकाने वाली यानि 1379 ही है। महज 13 पुरे राज्य की सीएचसी ( सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ) Community Health Centerमें पदस्थ हैं। यह संख्या देश में जनसंख्या के लिहाज से सबसे खराब है। 2005 में रिक्त पदों की संख्या 966 थी। यही नहीं सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट (Radiologist)के 348 में से 222 पद रिक्त हैं। पैराकेमिस्ट (Parachemist)के 308 और लेबोरेटरी तकनीशियन (Laboratory Technician) के 347 पद सरकार की नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ (Nursing Staff) में 3913 में से 944 पद खाली हैं।

पंद्रह साल में महज एक नया सीएचसी ( CHC) खुला है , जबकि 14 पीएचसी( PHC)बंद हुए हैं। हालात इस कदर ख़राब हुए हैं जिसमे मार्च 2019 में 2186 डॉक्टर पीएचसी ( PHC)में थे जबकि 2020 में यह घटकर 1490 हो गयी थी। इसी तरह सीएचसी ( CHC)में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या 118 थी जो मार्च 20 20 में सिमट कर 13 रह गयी।

सीएचसी में 348 सर्जन (Surgeon )होने चाहिए लेकिन मंजूर पद केवल 58 हैं , उनमे भी केवल 2 ही भरे हैं। इसी तरह राज्य 348 प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ (Obstetrician and Gynecologist )की आवश्यकता के सामने सरकार ने 76 पद ही मंजूर किये हैं जिनमे केवल 3 ही प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद हैं।पूरे राज्य में बाल रोग विशेषज्ञ( Pediatrician )6 है ,जो जरूरत के लिहाज से 342 कम है। यह कमी 127 एमएमआर ( MMR )और ईएमआर ( EMR )33 के तौर पर दुखद रूप से सामने आती है। विदित हो कि एमएमआर प्रति 100000 प्रसूताओं पर मरने वाले शिशुओं की संख्या है जबकि ईएमआर प्रति 1000 नवजात के एक साल में मरने की संख्या है। 36 राज्यों में और केंद्र शासित प्रदेशों में गुजरात का नंबर 5 वा है।

जिस गुजरात मॉडल की देश में चर्चा है उस गुजरात में सीएचसी CHC में 1379 विशेषज्ञ कम हैं। कुल मौजूद विशेषज्ञ महज 13 हैं , जबकि 1392 होने चाहिए .
लेकिन गुजरात सरकार ने 268 पद मंजूर किये हैं ,इस लिहाज से भी 255 पद रिक्त हैं। सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों( Specialist Doctors in CHC) की मौजूदगी में बिहार (BIHAR ) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh )जैसे बीमारू राज्य आगे है. एनेथिस्ट (Atheist )महज 10 ,नेत्र शल्य चिकित्सक Eye (Surgeon )2 मौजूद हैं , दोनों में क्रमशः 300 और 348 पद रिक्त हैं इसी तरह रेडियोग्राफर की 222 कुर्सियां इस इंतजार में हैं की कोई आकर उन पर बैठेगा। लेकिन कुर्सी के नसीब में रेडियोग्राफर की जगह धूल है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में स्वास्थ्य मंत्रालय ने भर्ती को मंजूरी नहीं दी है।

ऋषिकेश पटेलस्वास्थ्य मंत्री गुजरात

इस हालात पर गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल (Gujarat Health Minister Hrishikesh Patel )वाइब्स ऑफ इंडिया (Vibes of India )से कहते है खाली पदों को भरने की प्रक्रिया जल्दी शुरू होगी ,2 साल कोरोना में निकल गए , गुजरात में दूसरे राज्यों से लोग इलाज के लिए आते है ,यदि कही डॉक्टर नहीं हैं तो गांव गांव 108 एम्बुलेंस , जननी एम्बुलेंस जाती है , सरकार की कोशिश है कि घर में प्रसूती ना हो , इसलिए प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

अर्जुन मोढवाडिया -गुजरात कांग्रेस के पूर्व प्रमुख

वही गुजरात कांग्रेस के पूर्व प्रमुख (Former Gujarat Congress chief) और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके अर्जुन मोढवाडिया (Arjun Modhwadia) इसे प्रचार की सरकार कहते हैं , मोढवाडिया के मुताबिक राज्य सरकार की विफलता के कारण निजी अस्पताल फल फूल रहे हैं। कुपोषण (Malnutrition) और महिलाओं में एनीमिया (Anemia in Women )में भी गुजरात का पांच चिंताजनक राज्यों में समावेश हैं। गुजरात मॉडल झूठ का और खोखला मॉडल हैं।

मनोज सोरठिया – प्रदेश महासचिव आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी के प्रदेश महासचिव मनोज सोरठिया( Aam Aadmi Party’s state General Secretary Manoj Sorathia )कहते स्वास्थ्य ही नहीं शिक्षा और रोजगार देने में भी सरकार विफल है , इसी आम आदमी पार्टी नयी उम्मीद बन रही है। आप ने मोहल्ला क्लिनिक खोलने का वादा किया है। खाली पदों को भी भरा जायेगा।

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1 Comment

  1. Champalal Bothra

    सरकार का विज्ञापन ज़्यादा है धरातल पे काम नहीं है । आज निम्न ओर मध्यम वर्ग का जीवन स्तर दिन प्रतिदिन मुसकिल होता जा रहा है ।
    शिक्षा स्वास्थ्य रोज़गार में सरकार विफल रही है साथ ही छोटे व्यापारी की हालत काफ़ी चिंता का विषय है ।

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