क्या धार्मिक विविधता वास्तव में है भारत की विशेषता?

| Updated: June 30, 2021 9:46 pm

प्यू रिसर्च सेंटर के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय सभी धर्मों की विविधता, सहिष्णुता और स्वतंत्रता पर गर्व करते हैं, लेकिन उनमें बहुत कम समानता है और वे अलग अलग रहना पसंद करते हैं। भारत ज्यादातर हिंदुओं, सिखों और जैन समुदाय के लोगों का घर है। यह दुनिया की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी में से एक है। भारत में लाखों ईसाई और बौद्ध भी निवास करते हैं।

प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक, डॉ नेहा सहगल, एसोसिएट डायरेक्टर ऑफ रिसर्च का कहना है, “भारत में विविधता को देखते हुए, यह यूएसए केबाहर सबसे बड़ा नमूना है।” वैज्ञानिक रूप से, 10,000-15,000 नमूने आवश्यकता से अधिक हैं, लेकिन छह अलग-अलग धर्मों और विभिन्नक्षेत्रीय समूहों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए, उन्होंने 29,999 भारतीय वयस्कों का नमूना लिया। स्थानीय साक्षात्कारकर्ताओं ने 17 नवंबर, 2019 और 23 मार्च, 2020 के बीच 17 भाषाओं में सर्वेक्षण किया।

प्रश्नावली का निर्माण गुणात्मक साक्षात्कार द्वारा तैयार किया गया था जिनका उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के समूहों पर परीक्षण किया गया था।

एक ‘सच्चे भारतीय’ होने के लिए ज्यादातर लोगों का मानना है कि सभी धर्मों को जानना, पहचानना जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, अधिकांश लोगोंका मानना हैं कि सैकड़ों भाषाओं के देश में एक सच्चा भारतीय होने के लिए हिंदी बोलना अनिवार्य है। लगभग दो-तिहाई हिंदू (64%) कहते हैं कि अगर आप स्वयं को भारतीय कहते है तो उसके लिए आपको हिंदू होना आवश्यक है ।

जब दोस्ती की बात आती है, तो भारतीयों के अपने धर्म में ज्यादातर दोस्त होते हैं। विविध राष्ट्रों में अंतरजातीय विवाह अभी भी वर्जित हैं। अधिकांश धर्म, प्रमुख रूप से, अंतर-जातीय विवाह को स्वीकार नहीं करते हैं।

अधिकतर, लोग अन्य धार्मिक समुदायों के साथ रहने की बात के लिए सहमति देते हैं। फिर भी, कई लोग कुछ धर्मों को अपने आवासीय क्षेत्रों या गांवों से बाहर रखना पसंद करते है । जैन, प्रमुख रूप से, एक अलग धर्म के पड़ोसियों को स्वीकार नहीं करते, जिसमें 54% शामिल हैं जो एक मुस्लिम पड़ोसी को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं करते।

कई हिंदू (45%) कहते हैं कि वे अन्य सभी धर्मों के पड़ोसी होने के इच्छुक हैं, लेकिन 45% का कहना है कि वे कम से कम एक अन्य धार्मिक समूह के अनुयायियों को स्वीकार करने के लिए सहमत नहीं होंगे और तीन में से एक हिंदू मुसलमान को पड़ोसी नहीं बनाना चाहते हैं।

Dr Neha Sahgal, Associate Director of Research, Pew Research Center

सहगल कहती हैं, “भारत में धार्मिक अलगाव का एक राजनीतिक आयाम है, विशेष रूप से हिंदू राष्ट्रवाद में विश्वास करने वाले हिंदुओं के लिए,” उन्होंने कहा, “जो लोग भाजपा का अनुसरण करते हैं, वे सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार अलगाव के लिए और भी अधिक प्राथमिकता व्यक्त करते हैं।” इस समूह के मुस्लिम पड़ोसी नहीं होने की अधिक संभावना है।

भारत हमेशा एक ऐसा देश रहा है जहां लोग एक-दूसरे के धर्म पर विश्वास बनाए एक साथ रहना चाहते है, लेकिन जब उनके दैनिक जीवन में देखा जाए तो निष्कर्ष स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि वे दूर रहना चाहते हैं।

देश में कई मान्यताएं धर्म से बंधी नहीं हैं। हिंदू जिनका आँकड़ा 77% है इतनी ही संख्या में मुसलमान भी कर्म में विश्वास करते हैं, जो एक प्रमुख हिंदू मान्यता है। 81% हिंदुओं के साथ-साथ 32% ईसाई गंगा नदी की शुद्धिकरण शक्ति में विश्वास करते हैं। यद्यपि अधिकांश लोग समान मूल्यों में विश्वास करते हैं, पर फिर भी अधिकतर इस बात से सहमत होते हैं कि उनमें बहुत कुछ समान नहीं है। दो-तिहाई हिंदू मानते हैं कि वे मुसलमानों से अलग हैं और 64% मुसलमान ऐसा ही सोचते हैं। हालांकि, 66% जैनियों और आधे सिखों को लगता है कि उनमें हिंदुओं के साथ बहुत कुछ समान है।

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