नेताजी के अस्थिकलश को भारत लाया जाय , डीएनए से दूर होगा मौत पर संदेह -अनीता बोस फाफ

| Updated: August 17, 2022 1:27 pm

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ( Netaji Subhash Chandra Bose )की बेटी अनीता बोस फाफ ( Anita Bose Faf )ने कहा है कि उनके पिता के अवशेषों को भारत वापस लाने का समय आ गया है. इसके साथ ही नेताजी की बेटी (Netaji’s daughter )ने ये सुझाव दिया है कि डीएनए परीक्षण ( DNA Test )उन लोगों को जवाब दे सकता है जिन्हें 18 अगस्त, 1945 को उनकी मृत्यु के बारे में अभी भी संदेह है.जर्मनी में रहनी वाली ऑस्ट्रियाई मूल की अर्थशास्त्री अनीता बोस फाफ (Austrian-born economist Anita Bose Pfaff living in Germany) ने कहा कि डीएनए परीक्षण (DNA Test )से वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Evidence) प्राप्त करने का मौका मिलता है. टोक्यो के रेनकोजी मंदिर ( Renkoji Temple of Tokyo) में रखे गए अवशेष नेताजी के हैं और जापानी सरकार( Japan Government )इस तरह की प्रक्रिया के लिए सहमत हो गई है. एक बयान में, नेताजी की इकलौती संतान ने कहा कि चूंकि उनके पिता आजादी की खुशी का अनुभव करने के लिए जीवित नहीं थे, इसलिए समय आ गया है कि कम से कम उनके अवशेष भारतीय धरती पर लौट सकें.

उन्होंने कहा, “मंदिर के पुजारी और जापानी सरकार इस तरह के परीक्षण के लिए सहमत हुए, जैसा कि नेताजी की मौत (Justice Mukherjee Commission of Inquiry ) की अंतिम सरकारी भारतीय जांच के दस्तावेजों में दिखाया गया है,” “तो हम अंत में उनके अस्थि कलश ( Bone Urn )को घर लाने की तैयारी करें! नेताजी के लिए उनके जीवन में उनके देश की आजादी से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं था. विदेशी शासन से मुक्त भारत में रहने से ज्यादा कुछ भी नहीं था! अब समय आ गया है कि कम से कम उनके अवशेष भारत की धरती पर लौट सकें.”

दरअसल नेताजी की मृत्यु आज भी लोगों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं, हालांकि माना ये जाता है कि 18 अगस्त, 1945 को ताइवान Taiwan में एक विमान दुर्घटना ( Plane crash )में उनकी मृत्यु हो गई थी. जबकि दो जांच आयोगों इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि 18 अगस्त, 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गई थी. जबकि न्यायमूर्ति एम के मुखर्जी (Justice MK Mukherjee )की अध्यक्षता वाले तीसरे जांच पैनल ने इसका विरोध किया था और ये दावा किया था कि बोस उसके बाद भी जीवित थे.

फाफ ने कहा, “नेताजी की इकलौती संतान के रूप में मैं यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हूं कि उनकी सबसे प्रिय इच्छा, अपने स्वतंत्रत देश में लौटने की, आखिरकार इस रूप में पूरी हो और उन्हें सम्मानित करने के लिए उचित समारोह किया जाएगा.”

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