वैश्विक स्तर पर छंटनी और एआई के कारण टेक सेक्टर में मची उथल-पुथल के बीच, गुजरात के छात्रों ने प्लेसमेंट के मामले में नया इतिहास रच दिया है। निरमा यूनिवर्सिटी के एक छात्र को लिंक्डइन ने 94 लाख रुपये के भारी-भरकम पैकेज पर नौकरी का ऑफर दिया है। यह इस साल गुजरात के सभी संस्थानों में सबसे बड़े ऑफर्स में से एक बन गया है।
इससे पहले साल 2022 में निरमा का सबसे बड़ा पैकेज 88 लाख रुपये था। यह आंकड़ा इसलिए भी हैरान करता है क्योंकि इन दिनों बड़ी टेक कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं।
निरमा यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के डीन, डॉ. आरएन पटेल ने इस सफलता पर खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में औसत (median) वेतन में 15 से 25 प्रतिशत का उछाल आया है। कई छात्रों ने 50 लाख रुपये से ज्यादा के पैकेज हासिल किए हैं। इस प्लेसमेंट प्रक्रिया में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी हिस्सा लिया।
डॉ. पटेल का मानना है कि एआई और मशीन लर्निंग (AI-ML) का बूम अब थमने वाला नहीं है, और इंडस्ट्री को इस बदलाव को दिशा देने वाले असली विशेषज्ञों की दरकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सबसे ऊंचे पैकेज मुख्य रूप से कंप्यूटर साइंस और आईटी क्षेत्र के छात्रों को ही मिल रहे हैं।
धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी का प्रदर्शन भी इस साल बेहद शानदार रहा है। यहां सबसे अधिक प्लेसमेंट पैकेज 57 लाख रुपये का दर्ज किया गया। प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर प्रो. सौविक सरकार ने जानकारी दी कि इस बार औसत वेतन लगभग 15 लाख रुपये प्रति वर्ष रहा, जो पिछले साल के ही समान है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 165 कंपनियों ने प्लेसमेंट प्रक्रिया में भाग लिया, जिनमें इंडस्ट्री के कई बड़े नाम शामिल हैं।
वडोदरा स्थित पारुल यूनिवर्सिटी में भी छात्रों को बेहतरीन अवसर मिले। यहां सबसे बड़ा ऑफर 43 लाख रुपये का रहा, जो सांता क्लारा स्थित अमेरिकी एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर कंपनी सर्विसनाउ (ServiceNow) द्वारा दिया गया।
इस यूनिवर्सिटी में भर्ती करने वालों में माइक्रोसॉफ्ट, एचसीएल, टीसीएस, कॉग्निजेंट, बीपी, आईबीएम और एलएंडटी टेक जैसी कंपनियां भी शामिल रहीं। यहां का औसत पैकेज 4.5 लाख रुपये रहा।
पारुल यूनिवर्सिटी के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट डायरेक्टर गुरचरण सिंह ने बताया कि इस सीजन में 470 कंपनियों ने हिस्सा लिया, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है। उन्होंने मौजूदा ट्रेंड की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज बाजार सिकुड़ नहीं रहा है, बल्कि दो हिस्सों में बंट रहा है। एक तरफ कंपनियों में छंटनी की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ 20 लाख रुपये से ज्यादा के बंपर ऑफर्स भी मिल रहे हैं।
पहले कंपनियां सैकड़ों फ्रेशर्स को हायर करके उन्हें ट्रेनिंग देती थीं, लेकिन अब उन्हें ऐसे युवाओं की जरूरत है जो पहले दिन से ही एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी या फुल-स्टैक रोल्स में काम शुरू कर सकें।
सूरत के एसवीएनआईटी (SVNIT) में प्लेसमेंट प्रक्रिया 31 जुलाई तक चलने वाली है। करियर डेवलपमेंट सेल के प्रमुख प्रो. एचबी मेहता के अनुसार, इस सीजन में अब तक 230 कंपनियों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है, जबकि पिछले साल यह संख्या 205 थी।
यहां कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) के एक छात्र को सबसे अधिक 62 लाख रुपये का पैकेज मिला है। सीएसई ब्रांच का औसत वेतन भी 15.2 लाख रुपये से बढ़कर 16.2 लाख रुपये हो गया है। अभी प्लेसमेंट में एक महीने से अधिक का समय बचा है, इसलिए इस आंकड़े के और भी बढ़ने की उम्मीद है।
आणंद स्थित चारुसैट (CHARUSAT) यूनिवर्सिटी में अमेजन ने एक छात्र को 46.38 लाख रुपये का टॉप पैकेज ऑफर किया। वहीं, इंडस्ट्री विशेषज्ञों के मुताबिक पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (PDEU) और आईआईटी गांधीनगर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी कंप्यूटर साइंस और आईटी के छात्रों का औसत वेतन 20 लाख रुपये के ऊपर ही बना हुआ है।
पिछले एक दशक से गुजरात के इंजीनियरिंग प्लेसमेंट में कंप्यूटर साइंस और आईटी का ही दबदबा रहा है, लेकिन भविष्य की चुनौतियां अब तेजी से बदल रही हैं। टेकडिफेंस लैब्स (TechDefence Labs) के सीईओ सनी वाघेला ने इस साल कई राज्य संस्थानों से भर्तियां की हैं। उनका कहना है कि साइबर सिक्योरिटी, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और उभरती हुई तकनीकों में टैलेंट की भारी मांग है।
हालांकि, अगले साल से जॉब मार्केट में वही छात्र टिक पाएंगे जो तकनीकी परिदृश्य में हो रहे इन बदलावों को गहराई से समझेंगे। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को भी उद्योगों के साथ अपने संबंध और मजबूत करने होंगे।
विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि विश्व स्तर पर हो रही छंटनी का असर उन नौकरियों पर ज्यादा पड़ा है जिन्हें अब ऑटोमेट किया जा रहा है। इनमें मैन्युअल टेस्टिंग, बेसिक सपोर्ट और लेगेसी मेंटेनेंस जैसे काम शामिल हैं। इसके विपरीत, एआई-आधारित प्रोडक्ट बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करने वाले प्रोफेशनल्स की मांग लगातार ऊंची बनी हुई है।
प्लेसमेंट विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अब सिर्फ एकेडमिक डिग्रियों से काम नहीं चलेगा। कंपनियों का पूरा फोकस अब छात्रों के पास मौजूद स्किल, इंटर्नशिप अनुभव और प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो पर है। हकीकत यह है कि हाई-पेइंग नौकरियां अक्सर उन्हीं छात्रों की झोली में गई हैं, जिन्होंने पहले उन कंपनियों में इंटर्नशिप करके अपनी काबिलियत साबित की थी।
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