महाराष्ट्र में सियासी संकट : डैमेज कंट्रोल में जुटी एमवीए, शिंदे ने कहा भाजपा के साथ बनाओ सरकार ,घर वापसी को तैयार

| Updated: June 21, 2022 9:16 pm

 महाराष्ट्र में सियासी सरगर्मी तेज है. शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे 31 विधायकों के साथ गुजरात के सूरत में हैं. इस बीच शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी में सियासी हलचल तेज है. उद्धव ठाकरे ने विधायकों के साथ बैठक की है. कांग्रेस ने महाराष्ट्र संकट से निपटने के लिए कमलनाथ को पर्यवेक्षक बनाया है. शाम साढ़े पांच बजे कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई है. वहीं, सूत्रों का कहना है कि शिवसेना ने एकनाथ शिंदे को अपने विधायक दल के नेता पद से हटाने का फैसला किया है, सेवरी विधायक अजय चौधरी शिवसेना विधायक दल के नए नेता होंगे।

संजय राउत ने भाजपा पर आरोप लगाया है, साथ ही कहा है कि शिंदे के पास 16 से 17 विधायक ही हैं.जबकि शिंदे ने 30 – 35 विधायक का दावा किया है। वहीं वाइब्स आफ इंडिया के सूत्र दोनों को गलत बात रहे हैं होटल में 24 -30 विधायक की बात हो रही है। शिंदे से मिलने शिवसेना ने विशेष दूत भेजे हैं लेकिन शिंदे ने शर्त रखी है की अगर भाजपा के साथ शिवसेना गठबंधन करके सरकार बनाये तो वह घर वापसी के लिए तैयार है। ऐसे में यह महाराष्ट्र की सियासत के लिए बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।

हालांकि शिंदे विधायक बल के कारण फिलहाल बाहुबली की भूमिका में है , सूरत की होटल के सामने शिवसेना समर्थक जमा हो रहे हैं। शिवसेना से बगावत करने वाले गुट के नेता एकनाथ शिंदे से पार्टी नेता मिलिंद नार्वेकर और रविद्र फाटक की सूरत में ली मेरिडियन होटल में मुलाकात हुई है. शिंदे के साथ लगभग दो घंटे की बैठक के बाद मिलिंद नारवेकर और रविंद्र फ़ाटक सूरत की ली मेरिडियन होटल से निकले. इस दौरान उन्‍होंने मीडिया से कोई बात नहीं की. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के साथ मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने मिलिंद नारवेकर के फोन से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात की.

यह बातचीत करीब 10 मिनट तक हुई. उद्धव की पत्नि रश्मि ठाकरे से भी शिंदे से बातचीत हुई है.शिंदे ने कहा कि वो पार्टी की भलाई के लिए यह कदम उठा रहे हैं. अब तक उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया है और न ही किसी दस्तावेज़ पर दस्तखत किए हैं. सीएम उद्धव ठाकरे ने शिंदे से विचार कर वापस आने के लिए कहा है.

फिलहाल इस बातचीत से कोई हल नहीं निकला है. महाराष्‍ट्र के सियासी हालात को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, “हमारे दो लोग वहां (सूरत) गए और एकनाथ शिंदे से बात की. वे हमारे पुराने दोस्‍त हैं. हर कोई जानता है कि हमने बीजेपी का साथ क्‍यों छोड़ा और शिंदे भी इसके चश्‍मदीद रहे हैं.”

महाराष्ट्र का गणित-

 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में, जादुई नंबर 145 है, जबकि वर्तमान में कुल 287 विधायक हैं. मुंबई के शिवसेना विधायक रमेश लटके का हाल ही में निधन हो गया. एमवीए-बीजेपी के अलावा, निर्दलीय या छोटे दलों के विधायकों का एक महत्वपूर्ण 29 -मजबूत समूह है जो सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं. एमवीए में शिवसेना (55), राकांपा (53) और कांग्रेस (44), और छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन से, सत्तारूढ़ गठबंधन के पास लगभग 169 विधायक हैं. भाजपा के पास 106 विधायक हैं, साथ ही छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन है जो लगभग 114 की ताकत प्रदान कर रहा है।

इस बीच, शिवसेना अध्यक्ष ठाकरे ने मंगलवार को बैठक की, जिसमें पार्टी नेता एवं विधानसभा के सदस्य सुनील कदम, दादा भूसे एवं नीलम गोरहे, सांसद अरविंद सावंत एवं विनायक राउत, विधान परिषद की सदस्य मनीषा कायंदे और अन्य नेता मौजूद थे. इससे पहले, शिवसेना के नेता एवं सांसद संजय राउत ने कहा कि शिंदे मुंबई में नहीं हैं, लेकिन उनसे संवाद हो गया है.

राउत ने जोर देकर कहा कि शिवसेना वफादारों की पार्टी है और मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह, एमवीए सरकार को गिराने के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रयास सफल नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे शिवसेना के एक भरोसेमंद नेता हैं और ‘गायब’ विधायकों से पार्टी का संपर्क हो जाने के बाद ये विधायक वापस आ जाएंगे.

पवार बोले- सरकार गिराने की कोशिश, ऐसा तीसरी बार हो रहा है :

 उधर, महाराष्ट्र में सरकार गिरने की स्थिति में विकल्पों को लेकर शरद पवार ने कहा भाजपा के साथ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. एकनाथ शिंदे से कोई बात होने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में पवार ने कहा कि उन्होंने किसी से बात नहीं की है. उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे ने हमें अपनी मुख्यमंत्री पद संबंधी महत्वाकांक्षाओं के बारे में कभी नहीं बताया; मुझे यकीन है कि उद्धव ठाकरे स्थिति को संभाल लेंगे. महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के परिणामों पर शरद पवार ने कहा कि ऐसे चुनावों में क्रॉस वोटिंग होती है, इसमें कोई नई बात नहीं है, हम इसका हल निकालेंगे. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार गिराने की कोशिश , ऐसा तीसरी बार हो रहा है.

जयंत पाटिल बोले, सभी विधायक संपर्क में हैं :

 महाराष्ट्र के मंत्री और राकांपा नेता जयंत पाटिल ने कहा, ‘हम जानते हैं कि एकनाथ शिंदे कुछ विधायकों के साथ सूरत में हैं. मुझे नहीं लगता कि शिव सैनिक शिवसेना प्रमुख के खिलाफ कुछ करेंगे. मुझे विश्वास है, सीएम उद्धव ठाकरे सभी विधायकों को एकजुट रखेंगे. सभी विधायक हमारे संपर्क में हैं.’ राकांपा नेता छगन भुजबल ने कहा कि कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी.
शिंदे बोले- हम बालासाहेब के सच्चे शिवसैनिक : उधर, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने ट्वीट किया कि ‘हम बालासाहेब के सच्चे शिवसैनिक हैं. बालासाहेब ने हमें हिंदुत्व सिखाया है. हमने बालासाहेब के विचारों और आनंद दीघे साहब की शिक्षाओं पर सत्ता के लिए कभी धोखा नहीं दिया है और न ही कभी धोखा देंगे.

भाजपा नेता पाटिल बोले,-अल्पमत में है सरकार

 इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि उनकी पार्टी का इस राजनीतिक घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि, पाटिल ने कहा कि यदि महाराष्ट्र के मंत्री एकनाथ शिंदे से भाजपा को राज्य में सरकार बनाने का कोई प्रस्ताव मिलता है तो वह ‘यकीनन उस पर विचार करेंगे.’ चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि ‘कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, हम फिलहाल इंतजार कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रख रहे हैं. न ही एकनाथ शिंदे ने भाजपा को सरकार गठन का प्रस्ताव भेजा है और न ही भाजपा ने उन्हें कोई प्रस्ताव भेजा है.’

पाटिल ने कहा कि ‘राज्यसभा और एमएलसी चुनावों के लिए बीजेपी को निर्दलीय और छोटे राजनीतिक दलों का समर्थन मिला. हमारी जानकारी के अनुसार एकनाथ शिंदे और 35 विधायक जा चुके हैं. इसका मतलब है कि तकनीकी रूप से राज्य सरकार अल्पमत में है लेकिन व्यावहारिक रूप से सरकार को अल्पमत में आने में कुछ समय लगेगा.’

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पद साझा करने के मुद्दे को लेकर 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने अपने दीर्घकालिक सहयोगी भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ लिया था. शिवसेना ने तब राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर राज्य में सरकार का गठन किया था.

इस पूरे प्रकरण के बीच महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने शिंदे का समर्थन किया.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘बहुत बढ़िया एकनाथ जी. आपने उचित समय पर उचित फैसला लिया है. नहीं तो आपका भी आनंद दीघे जैसा हश्र हो सकता था.’ महाराष्ट्र के ठाणे जिले से नाता रखने वाले दीघे शिवसेना के प्रमुख नेताओं में से एक थे. 2001 में उनका निधन हो गया था.

केंद्रीय मंत्री दानवे बोले, एमवीए सरकार से जनता त्रस्त : 

केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने मंगलवार को कहा कि विधान परिषद चुनाव के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल साफ हो गया है और लोग महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार से तंग आ चुके हैं. एमवीए में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (रांकापा) और कांग्रेस शामिल हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने दावा किया कि एमवीए में किसी का किसी पर भी कोई नियंत्रण नहीं है और लोगों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह से लापरवाही बरती जा रही है.

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