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मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में निधन

| Updated: May 13, 2026 13:06

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और बीजेपी नेत्री अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में लखनऊ में निधन। फेफड़ों की बीमारी से थे पीड़ित, जानें पूरी खबर।

समाजवादी पार्टी के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 38 वर्ष की आयु में लखनऊ में निधन हो गया है। बुधवार को उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्रतीक यादव भाजपा नेत्री अपर्णा यादव के पति और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, परिवार के सदस्य उन्हें सुबह करीब 6:15 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। घटना के समय उनकी पत्नी वहां मौजूद नहीं थीं।

मौत के असली कारणों का पता लगाने के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) और अस्पताल के डॉक्टरों का एक पैनल जल्द ही शव का पोस्टमार्टम करेगा। शुरुआती जांच और देखने पर शरीर पर चोट के कोई भी बाहरी निशान नहीं मिले हैं।

जानकारी के मुताबिक, प्रतीक यादव लंबे समय से फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके फेफड़ों में खून का थक्का जमने (ब्लड क्लॉट) का इलाज चल रहा था। बुधवार सुबह जब उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ी और उनके शरीर ने प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया, तो परिजन उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल ले गए।

प्रतीक, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना के बेटे थे।

कौन थे प्रतीक यादव?

ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल करने वाले प्रतीक यादव एक जाने-माने रियल एस्टेट डेवलपर और फिटनेस प्रेमी थे।

सितंबर 2012 में एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग वेबसाइट ने उन्हें ‘द इंटरनेशनल ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ द मंथ’ के रूप में फीचर किया था। उन्होंने अपने इस शानदार शारीरिक बदलाव का श्रेय एक दशक पहले मुलायम सिंह यादव द्वारा दी गई प्रेरणा को दिया था।

वे पशु कल्याण में अपनी गहरी रुचि के लिए भी पहचाने जाते थे और उन्होंने जानवरों की देखभाल व सुरक्षा से जुड़ी कई पहलों का सक्रिय रूप से समर्थन किया था।

साल 2017 में 5 करोड़ रुपये की लेम्बोर्गिनी कार खरीदने पर वे विवादों में भी घिरे थे। तब आलोचकों ने सवाल उठाए थे कि समाजवाद के प्रति प्रतिबद्ध होने का दावा करने वाले परिवार का कोई सदस्य दुनिया की सबसे महंगी कारों में से एक कैसे खरीद सकता है। इसके जवाब में उन्होंने एक न्यूज़ एजेंसी से कहा था कि उन्होंने यह कार लोन पर ली है, उनके पास सारे कागजात हैं और वे इनकम टैक्स भरते हैं, इसलिए इस पर विवाद नहीं होना चाहिए।

मुलायम सिंह यादव की दूसरी शादी और परिवार

अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और उनकी पहली पत्नी मालती देवी के बेटे हैं। अखिलेश के जन्म के दौरान आई जटिलताओं के कारण मालती देवी कोमा जैसी स्थिति (वेजिटेटिव स्टेट) में चली गई थीं और साल 2003 में उनका निधन हो गया था।

उनके निधन के कुछ ही महीनों बाद, मई 2003 में मुलायम सिंह यादव ने साधना से विवाह कर लिया था।

इससे पहले साधना ने 1987 में चंद्र प्रकाश गुप्ता से शादी की थी, जिनसे प्रतीक गुप्ता का जन्म हुआ था। प्रतीक के जन्म के एक साल बाद ही साधना अपने पहले पति से अलग हो गई थीं और 1990 में उनका तलाक हो गया था।

अपर्णा यादव से शादी और रिश्तों में तनाव

प्रतीक और अपर्णा यादव की शादी साल 2011 में हुई थी। यह विवाह आठ साल के लंबे प्रेम प्रसंग के बाद हुआ था। दोनों की पहली मुलाकात एक पार्टी में किसी कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई थी, जिसके बाद वे ई-मेल के जरिए एक-दूसरे से बात करने लगे थे।

अपर्णा ने एक ब्रिटिश अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वे 10वीं क्लास से ही उन्हें पसंद करने लगी थीं। उन्होंने यह भी बताया कि कई सालों तक उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं था कि प्रतीक, मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं।

उनकी भव्य शादी में राजनीति, व्यापार और मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की थी। इस दंपती के दो बच्चे हैं।

इसी साल जनवरी में प्रतीक और अपर्णा यादव ने तलाक लेने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में उन्होंने इस दिशा में कोई कानूनी कदम नहीं उठाया। प्रतीक ने अपनी पत्नी पर पारिवारिक रिश्ते खराब करने का आरोप लगाया था।

इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि वह जल्द से जल्द इस स्वार्थी महिला से तलाक लेने वाले हैं जिसने उनके पारिवारिक रिश्ते बर्बाद कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि अपर्णा केवल प्रसिद्ध और प्रभावशाली बनना चाहती हैं और उन्हें उनके खराब मानसिक स्वास्थ्य की कोई परवाह नहीं है।

राजनीति से हमेशा बनाए रखी दूरी

यादव परिवार के कई अन्य सदस्यों के विपरीत, प्रतीक ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही किसी आधिकारिक राजनीतिक पद पर रहे। उन्होंने हमेशा खुद को राजनीति से दूर रखा।

नवंबर 2012 में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने यह मांग उठाई थी कि प्रतीक यादव को 2014 के आम चुनाव में आजमगढ़ से टिकट दिया जाए। उनकी मां और चाचा शिवपाल यादव ने भी उन्हें चुनावी मैदान में उतारने की वकालत की थी, लेकिन यह योजना कभी हकीकत में नहीं बदल सकी।

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