प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयात निर्भरता को कम करने के लिए देशवासियों से एक साल तक सोने की नई खरीदारी कम करने की अपील की है। इस आह्वान के बाद अहमदाबाद के आभूषण विक्रेताओं ने एक नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
अब वे ग्राहकों को नए सोने की जगह पुराने आभूषणों को बदलकर नई ज्वैलरी खरीदने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने की आसमान छूती कीमतों के कारण ग्राहक पहले से ही एक्सचेंज ऑफर की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
अहमदाबाद के एक प्रमुख ज्वैलर मनोज सोनी ने बाजार की वर्तमान स्थिति साफ करते हुए कहा कि मौजूदा समय में लगभग 80 प्रतिशत आभूषणों की बिक्री एक्सचेंज स्कीम के जरिए ही हो रही है।
कीमतों में भारी उछाल के कारण नए सोने की मांग में पहले ही काफी गिरावट आ चुकी है। उन्होंने बताया कि इस साल अखा तीज (अक्षय तृतीया) उन चुनिंदा मौकों में से एक रही, जब ऊंचे दामों के बावजूद बाजार में ग्राहकों की अच्छी खासी खरीदारी देखने को मिली।
आने वाले समय में मांग को बनाए रखने और नए आयात का दबाव कम करने के लिए कई खुदरा कारोबारी विशेष एक्सचेंज ऑफर लाने की तैयारी कर रहे हैं।
मनोज सोनी के मुताबिक, ज्वैलर्स आने वाले महीनों में पुराने सोने से जुड़ी कई नई योजनाएं और छूट पेश कर सकते हैं। इन आकर्षक कार्यक्रमों से न केवल बाजार में मांग सुचारू रूप से चलती रहेगी, बल्कि घरों में रखे भारी मात्रा में सोने को रीसायकल करने का रास्ता भी खुलेगा।
संगठित रिटेल क्षेत्र में यह चलन पहले ही जोर पकड़ चुका है। साल 2025 के त्योहारी और शादियों के सीजन में जब सोने के भाव तेजी से बढ़े थे, तब टाटा संस द्वारा समर्थित ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क ने एक बेहतरीन पहल की थी।
तनिष्क ने ग्राहकों को पुरानी ज्वैलरी के बदले नई खरीदारी के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सभी कैरेट के सोने पर ‘जीरो-डिडक्शन एक्सचेंज स्कीम’ पेश की थी। इस सफलता को देखते हुए अब स्थानीय दुकानदार भी इसी तरह की रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं।
ज्वैलर्स एसोसिएशन ऑफ अहमदाबाद (JAA) के अध्यक्ष जिगर सोनी ने इस उपभोक्ता बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने कहा कि नए सोने की खरीदारी से ग्राहकों की दूरी इस व्यापार पर गहरा असर डाल सकती है।
यह उद्योग देशभर में रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और सहायक गतिविधियों के जरिए लाखों लोगों की आजीविका चलाता है। इसलिए, कारोबारियों को ऐसे उपाय खोजने होंगे जिससे बाजार की मांग भी बढ़े और नए आयात पर भी नियंत्रण रखा जा सके।
आधिकारिक आयात आंकड़ों पर नजर डालें तो बाजार की वास्तविक स्थिति काफी स्पष्ट हो जाती है। रिकॉर्ड तोड़ महंगाई के बावजूद, वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुजरात का स्वर्ण आयात 114.38 मीट्रिक टन (MT) दर्ज किया गया। यह मजबूत आंकड़ा साफ दर्शाता है कि आयातित बुलियन पर बाजार की भारी निर्भरता अभी भी लगातार बनी हुई है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की हालिया ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत में नेट रीसाइक्लिंग या स्क्रैप सप्लाई में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
वहीं तिमाही दर तिमाही यह आंकड़ा 44 प्रतिशत बढ़कर 31.2 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले एक साल में सोने की कीमतों में 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने के बावजूद स्क्रैप आपूर्ति अपेक्षाकृत कम रही।
रिपोर्ट के मुताबिक इसका मुख्य कारण यह था कि कई लोगों ने अपनी पूरी संपत्ति को बेचने के बजाय केवल उसके कुछ हिस्से को ही भुनाना बेहतर समझा। इस बीच रोजगार के मोर्चे पर भी इस क्षेत्र का अहम योगदान है। जीजेईपीसी (GJEPC) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने बताया कि यह उद्योग देशभर में लगभग 50 लाख श्रमिकों, कारीगरों और छोटे व्यवसायों को सीधा सहारा देता है।
भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग ने मुश्किल वक्त में हमेशा अपना शानदार लचीलापन दिखाया है। किरीट भंसाली के अनुसार, चाहे वह गोल्ड कंट्रोल एक्ट का समय रहा हो, 80:20 का नियम हो या अतीत की अन्य गंभीर चुनौतियां, इस सेक्टर ने हर बाधा को पार किया है।
फिलहाल यह उद्योग संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए सभी हितधारकों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रहा है।
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