राहत: अध्ययनों ने बताया कि क्यों कम गंभीर है ओमीक्रोन, यह फेफड़ों में नहीं जाता

| Updated: January 4, 2022 3:46 pm

प्रयोगशाला में जानवरों और मानव ऊतकों पर किए गए कुछ नए अध्ययनों ने इस बात का पहला संकेत दिया है कि कोरोना वायरस के पिछले वेरिएंट की तुलना में ओमीक्रोन कम खतरनाक क्यों है।

चूहों और हैम्स्टर नामक उसी की तरह के जानवर पर किए गए अध्ययनों में ओमीक्रोन से कम-हानिकारक संक्रमण दिखे, जो अक्सर बड़े पैमाने पर ऊपरी वायुनली तक सीमित होते हैं। यानी इसके संक्रमण नाक, गले और श्वासनली तक ही सीमित रहे। वेरिएंट ने फेफड़ों को बहुत कम नुकसान पहुंचाया, जहां पिछले वेरिएंट में अक्सर जख्म और सांस लेने में गंभीर कठिनाई हुई थी।

बर्लिन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक कम्प्यूटेशनल वायुमार्ग पर कोरोना वायरस के प्रभाव का अध्ययन करने वाले जीवविज्ञानी रोलांड ईल्स ने कहा, “कहना ही होगा कि मुख्य रूप से यह ऊपरी श्वसन प्रणाली में प्रकट होने वाली बीमारी के तौर पर ही उभर रही है।”

नवंबर में, जब ओमीक्रोन वेरिएंट पर पहली रिपोर्ट दक्षिण अफ्रीका से आई, तो वैज्ञानिक केवल अनुमान लगा सकते थे कि यह वायरस के पहले के रूपों से अलग कैसे व्यवहार कर सकता है। वे केवल इतना जानते थे कि इसमें 50 से अधिक जेनेटिक म्यूटेशन का एक विशिष्ट और खतरनाक संयोजन था।

पिछले रिसर्च से पता चला था कि इनमें से कुछ म्यूटेशन ने कोरोना वायरस को कोशिकाओं पर अधिक मजबूती से जकड़ने में सक्षम बनाया। दूसरों ने वायरस को एंटीबॉडी से बचने की अनुमति दी, जो संक्रमण के खिलाफ बचाव की एक प्रारंभिक पंक्ति के रूप में काम करते हैं। लेकिन नया वेरिएंट शरीर के अंदर कैसे व्यवहार कर सकता है, यह एक रहस्य था।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वायरस विशेषज्ञ रवींद्र गुप्ता ने कहा, “आप केवल म्यूटेशन से वायरस के व्यवहार की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं।”

पिछले एक महीने में गुप्ता सहित एक दर्जन से अधिक शोध समूह प्रयोगशाला में नए रोगाणु का निरीक्षण कर रहे हैं। वे  पेट्री डिश में कोशिकाओं को ओमीक्रोन से संक्रमित करते हैं और फिर वायरस को जानवरों की नाक में छिड़क देते हैं।

वे इधर काम कर रहे थे, उधर ओमीक्रोन पूरी धरती पर फैल गया। उन लोगों को भी आसानी से संक्रमित कर दिया, जिन्हें टीका लगाया गया था या पहले वाले संक्रमण से ठीक हो गए थे।

लेकिन मामले जैसे-जैसे आसमान छूने लगे, उसके अनुपात में  अस्पताल में भर्ती होना मामूली रूप से ही बढ़ा। रोगियों के शुरुआती अध्ययनों से पता चला कि ओमीक्रोन के अन्य प्रकारों की तुलना में गंभीर बीमारी होने की आशंका कम थी, खासकर टीकाकरण वाले लोगों में। फिर भी, उनके निष्कर्ष बहुत-सी चेतावनियों के साथ आए।

पहली बात तो यह कि शुरुआती ओमीक्रोन संक्रमणों का बड़ा हिस्सा युवा लोगों में था, जिनके वायरस के सभी वेरिएंट से गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका कम होती है। फिर उनमें से कई शुरुआती मामले पिछले संक्रमण या टीकों से कुछ बचाव वाले लोगों में दिख रहे थे। उदाहरण के लिए, यह स्पष्ट नहीं था कि क्या ओमीक्रोन एक बिना वैक्सीन वाले बुजुर्गों के लिए भी कम गंभीर साबित होगा।

जानवरों पर प्रयोग इन अस्पष्टताओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि वैज्ञानिक समान परिस्थितियों में रहने वाले समान जानवरों पर ओमीक्रोन का परीक्षण कर सकते हैं। हाल के दिनों में सार्वजनिक किए गए आधा दर्जन से अधिक प्रयोग एक ही निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं: ओमीक्रोन डेल्टा और वायरस के अन्य पुराने वेरिएंट की तुलना में हल्का है।

बुधवार को जापानी और अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक बड़े समूह ने हैम्सटर और चूहों पर अपनी रिपोर्ट जारी की, जो या तो ओमीक्रोन या पहले के कई प्रकारों में से एक से संक्रमित हो गए थे। अध्ययन में पाया गया कि ओमीक्रोन से संक्रमित होने वालों के फेफड़ों को कम नुकसान हुआ, उनका वजन भी थोड़ा ही कम हुआ, और उनके मरने की आशंका भी कम थी।

हालांकि ओमीक्रोन से संक्रमित जानवरों में औसतन अधिक हल्के लक्षणों का अनुभव हुआ, वैज्ञानिक विशेष रूप से सीरियाई हैम्स्टर्स के परिणामों से प्रभावित हुए। वह ऐसी प्रजाति है, जिसे वायरस के सभी पिछले संस्करणों के साथ गंभीर रूप से बीमार होने के लिए जाना जाता है।

वाशिंगटन विश्वविद्यालय के वायरस विशेषज्ञ और अध्ययन के सह-लेखक डॉ माइकल डायमंड ने कहा, “यह आश्चर्यजनक था, क्योंकि हर दूसरे प्रकार ने इन हैम्स्टर्स को बुरी तरह संक्रमित किया है।”

चूहों और हैम्सटर पर कई अन्य अध्ययन भी इसी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। (सबसे जरूरी ओमीक्रोन शोध की तरह इन अध्ययनों को ऑनलाइन पोस्ट किया गया है। लेकिन अभी तक वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित नहीं किया गया है।)

ओमीक्रोन के हल्के होने का कारण शरीर रचना का विषय हो सकता है। डायमंड और उनके सहयोगियों ने पाया कि हैम्स्टर्स की नाक में ओमीक्रोन का स्तर वैसा ही था, जैसा कि पहले कोरोना वायरस से संक्रमित जानवरों में था। लेकिन फेफड़ों में ओमीक्रोन का स्तर अन्य प्रकारों के स्तर का दसवां या उससे कम था।

इसी तरह की खोज हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने की, जिन्होंने सर्जरी के दौरान मानव शरीर में गले के  वायुमार्ग से लिए गए ऊतक के टुकड़ों का अध्ययन किया। 12 फेफड़ों के नमूनों में शोधकर्ताओं ने पाया कि डेल्टा और अन्य प्रकारों की तुलना में ओमीक्रोन अधिक धीरे-धीरे बढ़ता है।

शोधकर्ताओं ने ब्रोंकी से भी ऊतक को संक्रमित किया, यानी ऊपरी छाती में वे नलिकाएं जो श्वासनली से फेफड़ों तक हवा पहुंचाती हैं। उन ब्रोन्कियल कोशिकाओं के अंदर संक्रमण के बाद पहले दो दिनों में डेल्टा या मूल कोरोना वायरस की तुलना में ओमीक्रोन तेजी से बढ़ता है।

इन निष्कर्षों को आगे के अध्ययनों से समझना होगा, जैसे कि बंदरों के साथ प्रयोग या ओमीक्रोन से संक्रमित लोगों के वायुमार्ग की जांच। यदि परिणाम जांच के लिए पकड़ में आते हैं, तो वे समझा सकते हैं कि ओमीक्रोन से संक्रमित लोगों को डेल्टा वाले लोगों की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम क्यों लगती है।

कोरोना वायरस संक्रमण नाक या संभवतः मुंह से शुरू होता है और गले तक फैल जाता है। हल्के संक्रमण इससे ज्यादा नहीं होते। लेकिन जब कोरोना वायरस फेफड़ों में पहुंचता है तो यह गंभीर नुकसान कर सकता है।

फेफड़ों में प्रतिरक्षा कोशिकाएं अधिक प्रतिक्रिया कर सकती हैं, न केवल संक्रमित कोशिकाओं को बल्कि असंक्रमित कोशिकाओं को भी मार देती हैं। वे सूजन पैदा कर फेफड़ों की नाजुक दीवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, वायरस क्षतिग्रस्त फेफड़ों से रक्तप्रवाह में जा सकते हैं, थक्कों को बढ़ा सकते हैं और अन्य अंगों को नष्ट कर सकते हैं।

गुप्ता को संदेह है कि उनकी टीम का नया डेटा एक आणविक स्पष्टीकरण देता है कि ओमीक्रोन फेफड़ों में इतना हानिकारक  क्यों नहीं होता है।

फेफड़ों में कई कोशिकाएं अपनी सतह पर TMPRSS2 नामक एक प्रोटीन ले जाती हैं, जो अनजाने में कोशिका में प्रवेश करने वाले वायरस को घुसने में मदद कर सकती हैं। लेकिन गुप्ता की टीम ने पाया कि यह प्रोटीन ओमीक्रोन को अच्छी तरह से नहीं पकड़ पाता है। नतीजतन, डेल्टा की तुलना में  ओमीक्रोन इस तरह से कोशिकाओं को संक्रमित करने का काम अधिक करता है। ग्लासगो विश्वविद्यालय की एक टीम स्वतंत्र रूप से इसी निष्कर्ष पर पहुंची।

एक वैकल्पिक मार्ग के माध्यम से कोरोना वायरस उन कोशिकाओं में भी जा सकते हैं, जो TMPRSS2 नहीं बनाते हैं। वायुमार्ग में अधिकतर कोशिकाएं प्रोटीन नहीं ले जाती हैं, जो इस सबूत की व्याख्या कर सकती है कि फेफड़ों की तुलना में ओमीक्रोन यहीं अधिक क्यों पाया जाता है।

गुप्ता ने अनुमान लगाया कि ओमीक्रोन ऊपरी-वायुमार्ग विशेषज्ञ के रूप में विकसित हुआ, जो गले और नाक में पनपता है। अगर यह सच है, तो वायरस के पास आसपास की हवा में छोटी बूंदों में निष्कासित होकर आसानी से नए मेजबानों तक पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा, “यह सब बताता है कि यह ऊपरी वायुमार्ग में संचारित होने के लिए होता है, है ना?” “यह वास्तव में फेफड़ों में नीचे नहीं होता है, जहां गंभीर बीमारी घर कर जाती हैं। तो आप समझ सकते हैं कि वायरस इस तरह से क्यों विकसित हुआ है।”

हालांकि अध्ययन स्पष्ट रूप से यह समझाने में मदद करते हैं कि ओमीक्रोन हल्का रोग क्यों है, लेकिन वे अभी तक इसका उत्तर नहीं देते हैं कि एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने पर भी यह वेरिएंट ठीक क्यों है। अमेरिका में सिर्फ गुरुवार को ही 580,000 से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें से अधिकांश को ओमीक्रोन माना जाता है।

पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में वायरस विशेषज्ञ सारा चेरी ने कहा, “यह अध्ययन इस सवाल के जवाब हैं कि फेफड़ों में क्या हो सकता है, लेकिन वास्तव में इससे ट्रांसमिशन को लेकर सवाल का जवाब नहीं मिलता है।”

डायमंड ने कहा कि वह इस परिकल्पना का समर्थन करने से पहले कि TMPRSS2 ओमीक्रोन को समझने की कुंजी है, विशेष रूप से जानवरों के बजाय लोगों में और अधिक अध्ययन किए जाने की प्रतीक्षा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस पर अभी भी काफी काम बाकी है।”

वैज्ञानिकों को पता है कि ओमीक्रोन की संक्रामकता से बचाव का एक हिस्सा एंटीबॉडी बनने आता है, जिससे यह अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक आसानी से टीकाकरण वाले लोगों की कोशिकाओं में प्रवेश कर सकता है। लेकिन उन्हें संदेह है कि ओमीक्रोन के कुछ अन्य जैविक लाभ भी हैं।

पिछले हफ्ते शोधकर्ताओं ने बताया कि नए वेरिएंट में ऐसा म्यूटेशन होता है, जो कथित जन्मजात प्रतिरक्षा को कमजोर कर सकता है। यानी एक आणविक अलार्म जो नाक में  आक्रमण के पहले संकेत पर हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को तेजी से सक्रिय कर देता है। लेकिन यह देखने के लिए और अधिक प्रयोग करने होंगे कि क्या यह वास्तव में ओमीक्रोन की सफलता के रहस्यों में से यही एक है।

चेरी ने कहा, “यह लोगों की लार और नाक के मार्ग में बहुत आसानी से मौजूद वायरस हो सकता है।” लेकिन इसके आसान  प्रसार के लिए अन्य स्पष्टीकरण हो सकते हैं: यह हवा में अधिक स्थिर हो सकता है या नए मेजबानों को बेहतर ढंग से संक्रमित कर सकता है। उन्होंने कहा, “मेरी नजर में वास्तव में यह महत्वपूर्ण सवाल है।”

Your email address will not be published.