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2014 के बाद से नेताओं के खिलाफ चार गुणा बढ़े ईडी के मामले, इनमें से 95% नेता विपक्ष के

| Updated: September 21, 2022 5:57 pm

महाराष्ट्र के शिवसेना नेता संजय राउत से लेकर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी तक, कई विपक्षी नेता इन दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्त में हैं। ईडी ने पिछले दिनों कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की थी। उस दौरान से ही कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि वह विपक्षी नेताओं के खिलाफ ईडी का इस्तेमाल कर रही है। इस पर संसद में भी हंगामा हो चुका है। इस बीच अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें दावा किया गया है कि 2014 से लेकर अब तक नेताओं के खिलाफ ईडी की ओर से दर्ज किए गए मुकदमों में चार गुणा की बढ़ोतरी हुई है।

2014 के बाद से जिन नेताओं पर ईडी ने केस दर्ज करके जांच की है, उनमें से 95 फीसदी नेता विपक्ष के हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 2014 के बाद से जिन विपक्षी नेताओं पर ईडी के केस दर्ज हुए हैं, उनमें कांग्रेस के 24, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 19, राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) के 11, शिवसेना के 8, द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) के 6, बीजू जनता दल (BJD) के 6, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 5, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के 5, समाजवादी पार्टी (SP) के 5, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के 5, आम आदमी पार्टी (AAP) के 3, आईएनएलडी के 3, वाईएसआरसीपी के 3, सीपीएम के 2, नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2, पीडीपी के 2, आईएनडी के 2, एआईएडीएमके के एक, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के एक, सुभासपा के एक और टीआरएस के एक नेता शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले 18 साल में करीब 147 नेताओं के खिलाफ जांच की गई है। इनमें से कुछ को गिरफ्तार भी किया गया, तो कुछ के खिलाफ केस दर्ज किया गया। किसी के ठिकानों पर छापेमारी की गई या फिर उनसे सवाल जवाब किए गए। इन सभी 147 नेताओं में से 95 फीसदी नेता विपक्ष के हैं। ऐसा ही पहले यूपीए सरकार के दौरान सीबीआई को लेकर भी कहा जाता था।

एनडीए का आंकड़ा यूपीए शासन (2004 से 2014) से बिल्कुल अलग है। यूपीए शासन में एजेंसी द्वारा केवल 26 नेताओं की जांच की गई थी। इनमें विपक्ष के 14 यानी 54 फीसदी नेता शामिल थे। ईडी के मामलों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कारण हुई है। इस कानून को 2005 में लागू होने के बाद से काफी कड़ा बना दिया गया है। कड़ी जमानत शर्तों के साथ इसके प्रावधान अब एजेंसी को गिरफ्तारी की भी अनुमति देते हैं।

सीबीआई और ईडी की जांच
18 साल में कांग्रेस और भाजपा सरकारों के कार्यकाल पर नजर डालें तो इस दौरान करीब 200 नेताओं पर सीबीआई केस हुए या फिर वे गिरफ्तार हुए। इनमें से 80 फीसदी नेता विपक्ष के थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में जब एनडीए सरकार सत्ता में आई, तबसे अब तक 121 नेता ईडी की जांच के घेरे में हैं। इनमें से ईडी ने 115 विपक्षी नेताओं के खिलाफ या तो केस दर्ज किया, उनसे सवाल जवाब किए या फिर उन्हें गिरफ्तार किया। ये कुल नेताओं में से 95 फीसदी हैं।

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