एसजी हाईवे के आत्मनिर्भर कैफे में असामाजिक तत्वों का आतंक, दो युवकों को पीटा

| Updated: May 24, 2022 8:05 pm

  • पुलिस अधिकारी सड़क पर बैठे लोगों को परेशान करते हैं, लेकिन कैफे, स्नैक सेंटर पूरी रात धमधमाते रहते हैं

शहर के एसजी हाईवे पर बीती रात असामाजिक तत्वों ने आत्मनिर्भर कैफे में धावा बोल दिया। असामाजिक तत्वों ने दो युवकों को मवेशी की तरह कुर्सी से पीट-पीट कर घायल कर दिया । पुलिस केआने से पहले 4 में से 3 लोग भाग निकले। वस्त्रापुर पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। वस्त्रापुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीसीपी समेत अधिकारी सड़क पर आम लोगों को बैठने नहीं देते, लेकिन चर्चा है कि कई कैफे और होटलों समेत स्नैक सेंटर देर रात तक धमधमाते रहते हैं.

रोशन कालूभाई देसाई परिवार के साथ खेड़ा जिले के समादरा गांव में रहते हैं और खेती करते हैं। 23 मई को, रोशनभाई ने अपने बहनोई जयदीप रबारी (रायपुर, डोलतखाना) के साथ अपनी रेंज रोवर कार से निकले थे । वे भुवाजी मेलाभाई ,चाचा के बेटे जयराम प्रभात देसाई को एयरपोर्ट छोड़ने के लिएर गए। रोशन और जयदीप बाद में एसजी हाईवे पर एक कैफे में गए। दोस्त समीर शाह समेत दोस्त सुबह 3 बजे तक कैफे में बैठे थे. इसी बीच चार लड़के आए और गाली बोलते हुए कहा की चलो यंहा से निकालो बाद में उसने उसने कुर्सी से पीटा ।

लोगों में चर्चा थी कि चारों युवक इलाके में दबंग हैं। इस बीच घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पूछताछ में पता चला कि उमंग कपूर (Res. सत्याग्रह कैंप, सैटेलाइट), उमंग के भाई झलक, मयंक वसंत कुमार भार्गिया और वरुण नाम का एक शख्स है। वस्त्रापुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मौके से मयंक वसंत कुमार भारिया को गिरफ्तार कर लिया।

हर रात एसजी हाईवे और सिंधुभवन रोड पर आतंक मचाते हैं

हालांकि ऐसे युवा हर रात एसजी हाईवे और सिंधुभवन रोड पर आतंक मचाते हैं , जो अधिकारियों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है। इलाके के डीसीपी सड़क पर बैठे लोगों को खड़े नहीं होने देते हैं लेकिन कैफे को देर रात तक चलने दिया जाता है जो चर्चा का विषय बन गया है. ऐसे कई कैफे असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गए हैं। इससे पहले, अपराध शाखा ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था जो उसके “बाप के बगीचे “और अन्य कैफे में ड्रग्स का कारोबार कर रहे थे। ऐसे युवाओ के सड़क पर स्टंट करने और कैफे में बैठे लोगों को धमकाने के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन अधिकारियों ने इस मुद्दे पर आंखें मूंद ली हैं।

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