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कर्ज लेकर पिता ने दिलाया था 65 हजार का बल्ला, अब चंबल का लाल करेगा अंडर-19 भारतीय टीम की कप्तानी

| Updated: June 19, 2026 13:22

पिता ने लॉकडाउन में 65 हजार का कर्ज लेकर दिलाया था बल्ला, अब चंबल के इस लाल ने अंडर-19 टीम का कप्तान बनकर पूरा किया सपना

कभी डाकुओं के खौफ के लिए पहचाने जाने वाले चंबल इलाके से अब एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो हर किसी का दिल छू लेगी। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब सबकुछ बंद था, तब चंबल के एक परिवार का सिविल कंस्ट्रक्शन का काम भी ठप पड़ गया था। ऐसे मुश्किल वक्त में घर के सबसे छोटे बेटे ने एक बेहद महंगे ‘प्रीमियम विलो’ क्रिकेट बैट की जिद कर दी।

आर्थिक तंगी के बावजूद पिता ने कर्ज लिया और अपने बेटे को 65 हजार रुपये का वह बल्ला दिला दिया।

पिता का यह महंगा दांव अब रुपयों में नहीं, बल्कि रनों और एक शानदार मुकाम के रूप में वापस मिल रहा है। वह होनहार लड़का कोई और नहीं बल्कि भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम के नए कप्तान यशवर्धन सिंह चौहान हैं। इसी साल नवंबर में 18 वर्ष के होने जा रहे यशवर्धन अब श्रीलंका के खिलाफ आगामी सीरीज में भारतीय टीम की कमान संभालेंगे।

जब यशवर्धन ने बैट की मांग की थी, तब उनके पिता अनामी सिंह चौहान और परिवार के लिए यह एक बहुत बड़ा जोखिम था। अनामी सिंह ने उस समय इसे ‘बेटे के सपने पर लगाया गया सबसे बड़ा दांव’ कहा था। यह ‘केएल राहुल’ सीरीज का बल्ला उनके लिए बेहद लकी साबित हुआ।

इसी बैट से यशवर्धन ने साल 2021 में अंडर-13 कनमडीकर ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 1,300 रन बनाए थे। उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने तुरंत चयनकर्ताओं और कोचों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था।

यशवर्धन के बल्ले से निकलने वाली हर बाउंड्री उस कर्ज और पिता की रातों की नींद की भरपाई कर रही थी। ग्वालियर में अब आटे की मिल चलाने वाले उनके पिता अनामी सिंह कहते हैं कि उन्होंने अपने बेटे को वह ‘केएल राहुल’ सीरीज वाला बैट हमेशा अपने पास रखने को कहा था, क्योंकि उसी बल्ले ने उनके क्रिकेट के सफर को एक नई और मजबूत शुरुआत दी है।

यह बल्ला यशवर्धन के लिए किसी बेशकीमती आभूषण से कम नहीं है। वह छोटे मैदानों से लेकर बड़े टूर्नामेंट हॉल तक इसे हमेशा अपने साथ रखते हैं। साथी खिलाड़ी कभी-कभार उनके ग्लव्स या पैड तो मांग लेते हैं, लेकिन यह बल्ला वह किसी को नहीं देते। एक बार जब एक सीनियर रणजी खिलाड़ी ने उनसे यह बैट मांगा, तो उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया।

यह कोई अहंकार नहीं था, बल्कि उस बल्ले से जुड़ी पिता की भावनाओं और संकट के समय दिखाए गए भरोसे का सम्मान था। यशवर्धन का कहना है कि इस बल्ले से उनकी बेहद गहरी भावनाएं जुड़ी हैं और यही वजह है कि वह इसे कभी किसी के साथ साझा नहीं कर सकते।

अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने राष्ट्रीय कर्तव्य के तहत इस युवा खिलाड़ी के कंधों पर अंडर-19 टीम की कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है। चयनकर्ताओं ने लगातार रन बनाने की उनकी क्षमता, दबाव में शांत रहने के उनके स्वभाव और ड्रेसिंग रूम में साथी खिलाड़ियों के प्रति उनके सम्मान को देखते हुए ही यह अहम फैसला लिया है।

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