भारत सरकार ने खाने-पीने का बिजनेस शुरू करने और उसे चलाने की प्रक्रिया को अब पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। देश की 600 अरब डॉलर की फूड इकॉनमी में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ा सुधार लागू किया गया है। अब फूड सेफ्टी लाइसेंस को बार-बार रिन्यू कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि इसे पूरी तरह से स्थायी (परपेचुअल) कर दिया गया है।
इसके साथ ही, 10 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को भी अब औपचारिक रेगुलेटरी ढांचे के दायरे में ला दिया गया है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नए नियमों के तहत अब हर पांच साल में फूड लाइसेंस के रिन्यूअल की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। सरकारी अधिकारियों और आधिकारिक दस्तावेजों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस ऐतिहासिक कदम से 67 लाख से ज्यादा फूड बिजनेस और स्टार्टअप्स के लिए नियमों का पालन करना बेहद सरल हो जाएगा। साथ ही, सिंगल-विंडो सिस्टम के जरिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की जटिलताओं को भी दूर कर दिया गया है।
इन नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा देश भर के स्ट्रीट वेंडर्स, हॉकर, मोबाइल फूड ऑपरेटर और ठेले वालों को मिलने जा रहा है। अब साल 2014 के ‘स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट’ के तहत रजिस्टर्ड विक्रेताओं को स्वतः ही 2006 के मुख्य ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट’ के नियमों का पालन करने वाला मान लिया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में लगभग 20 लाख (2 मिलियन) स्ट्रीट फूड वेंडर, हॉकर और ठेले वाले काम करते हैं।
इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब ऐसे छोटे व्यापारियों को अपना व्यापार चलाने के लिए FSSAI में अलग से रजिस्ट्रेशन कराने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। विभिन्न सरकारी विभागों में बार-बार रजिस्ट्रेशन के झंझट से मुक्ति मिलने के कारण 10 लाख से ज्यादा स्ट्रीट फूड वेंडर्स को इसका सीधा और बड़ा लाभ मिलेगा।
नए आवेदकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने FSSAI के लाइसेंसिंग पोर्टल को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के ‘नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम’ के साथ जोड़ दिया है। इससे रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया समयबद्ध और बहुत आसान हो जाएगी। फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBO) को अब अलग-अलग लाइसेंस हासिल करने के लिए कई ऑनलाइन पोर्टल्स पर एक ही तरह का डेटा, जानकारी और दस्तावेज बार-बार जमा नहीं करने पड़ेंगे।
इस बड़े सुधार के तहत FSSAI रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग तय करने वाले सालाना टर्नओवर की लिमिट में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। छोटे व्यापारियों के लिए जरूरी ‘बेसिक रजिस्ट्रेशन’ की टर्नओवर लिमिट को 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी तरह, मध्यम स्तर के व्यापारियों के लिए जरूरी ‘स्टेट लाइसेंस’ की टर्नओवर सीमा जो पहले 12 लाख रुपये से 30 करोड़ रुपये तक थी, उसे बढ़ाकर अब 1.5 करोड़ रुपये से 50 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, 50 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों को अब ‘सेंट्रल लाइसेंस’ लेना होगा, जिसकी सीमा पहले सिर्फ 30 करोड़ रुपये हुआ करती थी। इस दायरे में रेस्टोरेंट, क्लाउड किचन, हॉकर और पैकेज्ड फूड ब्रांड सभी शामिल हैं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन अहम नीतियों को मार्च 2026 में मंजूरी दी गई थी और अब इन्हें पूरे देश में लागू कर दिया गया है। सरकार ने फूड सेफ्टी लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन दोनों को पूरी तरह से स्थायी बना दिया है। पहले इन परमिट्स की वैधता अधिकतम पांच साल होती थी, जिसके बाद व्यापारियों को फिर से रिन्यूअल का आवेदन करना पड़ता था।
भारत के फूड सर्विस सेक्टर में रेस्टोरेंट, क्विक-सर्विस ब्रांड, क्लाउड किचन और फूड डिलीवरी कंपनियां आती हैं, जबकि फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में पैकेज्ड गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग को शामिल किया जाता है। इस नए बदलाव पर स्विगी (Swiggy), जोमैटो (Zomato), ब्लिंकिट (Blinkit) और जेप्टो (Zepto) ने फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा FSSAI को ईमेल के जरिए भेजे गए सवालों का भी कोई जवाब नहीं मिला।
FSSAI के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पवन अग्रवाल ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्राधिकरण की ये नीतियां बेहद शानदार हैं और इनका मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को सुधारना है। हालांकि, उन्होंने एक अहम चुनौती की ओर भी इशारा किया। उनके मुताबिक, असली चुनौती फूड बिजनेस और सेफ्टी अधिकारियों दोनों की कार्यप्रणाली और मानसिकता को बदलने में होगी।
पवन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि छोटे स्ट्रीट वेंडर्स को रजिस्ट्रेशन की शर्तों से छूट देने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि उन्हें फूड सेफ्टी मॉनिटरिंग के दायरे से ही बाहर कर दिया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जन स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर फूड सेफ्टी अधिकारियों को अपनी निगरानी और नियमों को लागू कराने की जिम्मेदारी सख्ती से निभानी होगी।
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