इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM-A) की एक क्लासरूम का वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रहा है। इसकी वजह बेहद खास है। दरअसल, यहां एक प्रोफेसर ने सांख्यिकी (स्टैटिस्टिक्स) के मुश्किल कॉन्सेप्ट को समझाने के लिए बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह की अपकमिंग फिल्म ‘धुरंधर’ के एक सीन का सहारा लिया है।
छात्रों द्वारा ऑनलाइन साझा किया गया यह पल देखते ही देखते वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर लोग प्रोफेसर के इस इनोवेटिव तरीके से पढ़ाने की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूजर्स ने इस लेक्चर को बेहद शानदार बताते हुए कहा कि यह इस बात की याद दिलाता है कि पढ़ाई हमेशा केवल किताबों और उबाऊ समीकरणों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए।
जब बॉलीवुड का सीन बन गया स्टैटिस्टिक्स का लेसन
वायरल क्लिप में IIM अहमदाबाद के प्रोफेसर को ‘धुरंधर’ फिल्म के ट्रेलर के सबसे चर्चित डायलॉग “विन लयारी, विन पाकिस्तान” (Win Lyari, Win Pakistan) सीक्वेंस के जरिए स्टैटिस्टिक्स की थ्योरी समझाते हुए देखा जा सकता है।
वीडियो शेयर करने वाले एक छात्र ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा कि केवल IIM अहमदाबाद में ही ‘धुरंधर’ का कोई सीन स्टैटिस्टिक्स के लेसन में बदल सकता है। उन्होंने बताया कि कैसे “विन लयारी, विन पाकिस्तान” को ‘क्लस्टर सैंपलिंग’ (Cluster Sampling) से जोड़ा गया।
छात्र ने आगे बताया कि “बलोच गैंग और पठान गैंग बुनियादी रूप से अलग समूह हैं”, इस हिस्से को ‘स्ट्रैटिफिकेशन’ (Stratification) समझाने के लिए इस्तेमाल किया गया। छात्र के मुताबिक, एक पल आप गैंगवार देख रहे होते हैं और अगले ही पल आप सर्वे डिजाइन और रिसर्च मेथोडोलॉजी पर चर्चा कर रहे होते हैं।
सिनेमाई दृश्य को सांख्यिकीय सिद्धांत से जोड़ने की प्रोफेसर की इस कला ने पूरी क्लास को रोमांचित कर दिया। इस दौरान क्लासरूम में छात्रों की हंसी और उत्साह देखने लायक था। इस मजेदार तरीके ने एक नीरस विषय को छात्रों के लिए बेहद आसान और दिलचस्प बना दिया।
इंटरनेट यूजर्स को क्यों पसंद आया यह तरीका
यह वीडियो जल्द ही तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया। नेटिज़न्स शिक्षा और पॉप कल्चर के बीच सेतु बनाने की प्रोफेसर की क्षमता के मुरीद हो गए हैं। कई लोगों का मानना है कि जब कठिन विषयों को जानी-पहचानी चीजों से जोड़ा जाता है, तो उन्हें समझना काफी सरल हो जाता है।
लोगों ने यह भी माना कि सोशल मीडिया, फिल्मों और इंटरनेट कल्चर के बीच पली-बढ़ी आज की युवा पीढ़ी, पारंपरिक उदाहरणों की तुलना में समकालीन मनोरंजन से जुड़े उदाहरणों पर ज्यादा अच्छी प्रतिक्रिया देती है।
इस पोस्ट पर लोगों के कई मजेदार कमेंट्स भी सामने आए। एक यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा कि उनके ऑर्गेनाइजेशन डेवलपमेंट (OD) प्रोफेसर ने एमबीए के दौरान ‘ओडी इंटरवेंशन’ (OD Interventions) को समझाने के लिए उन्हें ‘द इंटर्न’ (The Intern) फिल्म दिखाई थी, जो उनके लिए एक बहुत मजेदार कोर्स साबित हुआ।
एक अन्य यूजर ने बताया कि कोझिकोड (Kozhikode) में भी धुरंधर, बिग बैंग थ्योरी, मनी हाइस्ट और फ्रेंड्स जैसे शोज का इसी तरह से इस्तेमाल किया जाता है, वहां किसी को नहीं बख्शा गया। कई यूजर्स ने मजाक में यह भी कहा कि आखिरकार बॉलीवुड ने मैनेजमेंट एजुकेशन में अपनी जगह बना ही ली है।
क्लासरूम में पॉप कल्चर का बढ़ता चलन
शिक्षा विशेषज्ञों का भी लंबे समय से यही तर्क रहा है कि जब छात्र अमूर्त अवधारणाओं को वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जोड़ते हैं, तो सीखना अधिक प्रभावी हो जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर के प्रोफेसरों ने अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, गणित और प्रबंधन के सिद्धांतों को समझाने के लिए क्रिकेट मैचों और फुटबॉल के आंकड़ों से लेकर मार्वल फिल्मों और टेलीविजन शोज तक का भरपूर इस्तेमाल किया है।
पॉप-कल्चर के संदर्भ छात्रों को एक परिचित माहौल प्रदान करते हैं, जिससे जटिल विचारों को याद रखना उनके लिए आसान हो जाता है। छात्र फॉर्मूले को यंत्रवत रटने के बजाय, अब कॉन्सेप्ट्स को उन कहानियों, परिस्थितियों और पात्रों के साथ जोड़कर पढ़ पा रहे हैं जिन्हें वे पहले से ही अच्छी तरह समझते हैं।
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