28 फरवरी का दिन जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। हुबली के केएससीए (KSCA) क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए 2025-26 रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जम्मू-कश्मीर (J&K) ने कर्नाटक को बुरी तरह शिकस्त देते हुए अपना पहला खिताब जीत लिया है। 1959-60 के सीजन में अपने डेब्यू के बाद से इस घरेलू चैंपियनशिप के लिए टीम का दशकों लंबा इंतजार अब कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में खत्म हो गया है।
मैच भले ही पांचवें दिन तक खिंचा, लेकिन मुकाबले का फैसला चौथे दिन के पहले सत्र में ही हो गया था, जब जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी के आधार पर 291 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर ली थी। इस पूरे खिताबी मुकाबले में कर्नाटक एक भी सेशन अपने नाम नहीं कर सका, जो जेएंडके के एकतरफा दबदबे को साफ दर्शाता है।
दिग्गजों पर भारी पड़ी जम्मू-कश्मीर की रणनीति
खिताबी भिड़ंत से पहले क्रिकेट पंडितों ने केएल राहुल, मयंक अग्रवाल, करुण नायर, देवदत्त पडिक्कल और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे सितारों से सजी कर्नाटक की टीम को जीत का प्रबल दावेदार माना था। कागज पर दक्षिण भारत की यह टीम बेहद मजबूत दिख रही थी। लेकिन जेएंडके ने साबित कर दिया कि पांच दिन के खेल में सिर्फ प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मैदान पर किया गया प्रदर्शन मायने रखता है।
कप्तान डोगरा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का एकदम सटीक फैसला किया। टीम ने क्रीज पर करीब सात सत्रों तक बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 584 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया और कर्नाटक के गेंदबाजों को पूरी तरह थका दिया।
बल्लेबाजों का शानदार प्रदर्शन और मैदान पर विवाद
इस बड़े स्कोर की नींव नंबर तीन पर आए शुभम पुंडीर ने रखी, जिन्होंने शानदार 121 रन बनाए। इसके अलावा पूरी बैटिंग लाइनअप ने उनका बखूबी साथ दिया। यावर हसन (88), साहिल लोत्रा (72), कप्तान डोगरा (70), कन्हैया वाधवन (70) और अब्दुल समद (61) ने बेहतरीन योगदान दिया।
इस बीच मैदान पर थोड़ी गहमागहमी भी देखने को मिली। 41 वर्षीय कप्तान डोगरा ने कर्नाटक के सब्स्टीट्यूट फील्डर केवी अवनीश को ‘हेड-बट’ (सिर से टक्कर मारना) कर दिया। बाद में डोगरा ने इसे “हीट ऑफ द मोमेंट” बताया और उन पर मैच फीस का 50% जुर्माना लगाया गया।
आकिब नबी का कहर
अगर बल्लेबाजों ने जीत का मंच तैयार किया, तो तेज गेंदबाज आकिब नबी ने इस मैच को पूरी तरह जेएंडके की झोली में डाल दिया। 2025-26 सीजन के इस सबसे सफल गेंदबाज ने एक बार फिर अहम मौके पर अपना जलवा बिखेरा।
पिच से ज्यादा मदद न मिलने के बावजूद नबी ने अपनी बेहतरीन सीम बॉलिंग से कर्नाटक के शीर्ष क्रम को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने केएल राहुल को महज 13 रन पर पवेलियन भेजा और फिर लगातार दो गेंदों पर करुण नायर और स्मरण रविचंद्रन को आउट करके कर्नाटक का स्कोर 57/4 कर दिया।
मयंक अग्रवाल ने अकेले संघर्ष करते हुए 160 रनों की जुझारू पारी जरूर खेली, लेकिन नबी के कहर के आगे उनकी टीम 280 के पार ही जा सकी। आकिब नबी ने सीजन का अपना 7वां पांच-विकेट हॉल (Five-wicket haul) लिया और 60 विकेटों के साथ टूर्नामेंट का अंत किया। वह रणजी इतिहास में एक सीजन में 60 विकेट लेने वाले महज तीसरे तेज गेंदबाज बन गए हैं।
ऐतिहासिक जीत पर मुहर
291 रनों की भारी बढ़त के साथ जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी में भी अपनी पकड़ मजबूत रखी। हालांकि प्रसिद्ध कृष्णा और विजयकुमार वैशाख ने लंच से पहले यावर हसन और पुंडीर को आउट कर शुरुआती झटके दिए, लेकिन कामरान इकबाल ने पारी को संभाला। इसके बाद अब्दुल समद और साहिल लोत्रा ने टीम की लय बरकरार रखी।
अंतिम दिन हसन और लोत्रा ने शतक जड़कर कर्नाटक की वापसी की बची-खुची उम्मीदें भी खत्म कर दीं। हालात इतने निराशाजनक हो गए कि कर्नाटक को राहुल, नायर और अग्रवाल जैसे अपने पार्ट-टाइम गेंदबाजों से गेंदबाजी करवानी पड़ी।
अंततः जेएंडके ने अपनी दूसरी पारी 341/4 के स्कोर पर घोषित कर दी। नतीजा पूरी तरह साफ था, इसलिए अधिकारियों ने मैच समाप्त करने का फैसला किया और डोगरा के ट्रॉफी उठाते ही जश्न का माहौल छा गया।
एक यादगार सीजन
जम्मू-कश्मीर का यह खिताबी सफर उनके निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन का नतीजा था। पूरे टूर्नामेंट में टीम को सिर्फ अपने पहले मैच में (मुंबई के खिलाफ) हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद नॉकआउट में उन्होंने क्वार्टर फाइनल में मध्य प्रदेश और सेमीफाइनल में बंगाल जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल का टिकट कटाया था।
टीम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजनेताओं का भी ध्यान गया। राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए खुद हुबली पहुंचे और टीम के इस शानदार सफर पर गर्व जताया। अंडरडॉग्स (Underdogs) से चैंपियन बनने तक की जेएंडके की यह कहानी भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में से एक बन गई है।
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