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बिना विदेशी पासपोर्ट के नागरिकता नहीं, बिना नागरिकता के पासपोर्ट नहीं: राजकोट की महिला का मामला गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा

| Updated: March 13, 2026 13:58

18 दिन की उम्र में भारत आईं डॉली के पास आधार-पैन सब है, लेकिन पति के पास कनाडा जाने के लिए पासपोर्ट क्यों नहीं मिल रहा? पढ़ें पूरा मामला।

अहमदाबाद: राजकोट की रहने वाली 26 वर्षीय डॉली वडलिया पिछले तीन सालों से एक बेहद अजीबोगरीब कानूनी उलझन का सामना कर रही हैं। उनके पास खुद को भारतीय साबित करने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सभी जरूरी सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, यहां तक कि वह अपना इनकम टैक्स रिटर्न भी भरती हैं।

इसके बावजूद, वह कनाडा में रह रहे अपने पति के पास जाने के लिए भारतीय पासपोर्ट हासिल नहीं कर पा रही हैं। यह मामला एक ऐसी पहेली बन गया है जहां पासपोर्ट बनवाने के लिए भारतीय नागरिकता का प्रमाण चाहिए, और नागरिकता साबित करने के लिए विदेशी पासपोर्ट की मांग की जा रही है।

इन दोनों के न होने की वजह से वह बुरी तरह फंस गई हैं और अब न्याय की गुहार लगाते हुए उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

18 दिन की उम्र में लौटी थीं भारत

अदालत में पेश की गई जानकारी के मुताबिक, डॉली का जन्म साल 2000 में मोजाम्बिक में हुआ था और उनके माता-पिता भारतीय नागरिक थे। जन्म के समय मोजाम्बिक में आई भीषण बाढ़ के कारण उनके परिवार को वहां से भागना पड़ा। उस वक्त डॉली महज 18 दिन की थीं।

मोजाम्बिक सरकार द्वारा जारी किए गए एक आपातकालीन प्रमाणपत्र (इमरजेंसी सर्टिफिकेट) की मदद से उनका परिवार भारत लौट आया। इसके बाद उनकी पूरी परवरिश और पढ़ाई-लिखाई भारत में ही हुई।

साल 2023 में डॉली की शादी एक एनआरआई से हुई, जो कनाडा के कैलगरी में वर्क परमिट पर काम कर रहे हैं। शादी के बाद अपने पति के पास विदेश जाने की चाह में उन्होंने उसी साल यानी 2023 में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। लेकिन उन्हें पासपोर्ट देने से इनकार कर दिया गया।

अधिकारियों ने वजह बताई कि उनका जन्म भारत में नहीं हुआ है और नागरिकता अधिनियम की धारा 4 के तहत मोजाम्बिक स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में उनके जन्म का पंजीकरण नहीं कराया गया था।

कलेक्ट्रेट से लेकर दूतावास तक के चक्कर

पासपोर्ट कार्यालय की सलाह पर उन्होंने नई दिल्ली स्थित मोजाम्बिक उच्चायोग और मोजाम्बिक में भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क कर जरूरी दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। अपना पहला आवेदन रद्द होने के बाद डॉली ने दोबारा अप्लाई किया।

उन्होंने भारतीय दूतावास से अपने जन्म प्रमाण पत्र को अटेस्ट भी करवा लिया। हालांकि, 9 मई 2025 को उन्हें फिर से यह कहकर झटका दिया गया कि केवल अटेस्टेड बर्थ सर्टिफिकेट काफी नहीं होगा।

उन्हें बताया गया कि पासपोर्ट के लिए या तो मोजाम्बिक में भारतीय दूतावास द्वारा जारी जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र चाहिए, या फिर भारतीय नागरिकता के पंजीकरण या देशीयकरण (naturalisation) का प्रमाण पत्र लाना होगा।

हाईकोर्ट से लगाई न्याय की गुहार

इसके बाद डॉली अपने सभी दस्तावेजों के साथ नागरिकता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए राजकोट कलेक्ट्रेट पहुंचीं। 13 मई 2025 को कलेक्ट्रेट के अधिकारी ने उनसे उनका विदेशी पासपोर्ट मांग लिया, जो उनके पास कभी था ही नहीं। इस विचित्र समस्या का कोई समाधान न निकलता देख उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट की शरण ली।

डॉली ने अदालत को बताया कि वह किसी भी सूरत में भारतीय नागरिकता या देशीयकरण का प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर सकतीं क्योंकि उनके पास विदेशी पासपोर्ट नहीं है।

उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है ताकि वह कनाडा जाकर अपने पति के साथ रह सकें। इस मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस अनिरुद्ध माई ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि वे 5 मई 2025 के पत्राचार के संबंध में उचित कदम उठाएं और शुक्रवार को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपना हलफनामा (affidavit-in-reply) दाखिल करें।

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