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अडानी ने अमेरिकी कोर्ट से SEC धोखाधड़ी मामला खारिज करने की मांग की, कहा- मुकदमे का अधिकार क्षेत्र नहीं

| Updated: April 8, 2026 13:37

गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी अदालत में याचिका दायर कर SEC के मुकदमे को खारिज करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया है कि अमेरिका के पास इस मामले में कोई अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) नहीं है।

अरबपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी अदालत से यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा दायर प्रतिभूति धोखाधड़ी के मुकदमे को खारिज करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया है कि यह मामला अमेरिकी अधिकार क्षेत्र से बाहर आता है और किसी भी तरह के गलत काम को साबित करने में विफल रहा है।

इस मुकदमे को खारिज करने के लिए 30 अप्रैल को पेश किए जाने वाले प्रस्ताव से पहले दायर एक प्री-मोशन पत्र में अडानी ने अपने वकीलों के माध्यम से कहा कि समूह की नवीकरणीय ऊर्जा शाखा, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) द्वारा 2021 की बांड बिक्री पर SEC के दावे कानूनी रूप से कई आधारों पर दोषपूर्ण हैं।

SEC ने नवंबर 2024 में अडानी पर मुकदमा दायर किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय राज्य के अधिकारियों से जुड़ी एक कथित रिश्वत योजना का खुलासा न करके निवेशकों को गुमराह किया है और इस मामले को अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के तहत तैयार किया गया है।

अडानी ने तर्क दिया कि अदालत के पास व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र का अभाव है। उनका कहना है कि दोनों में से किसी का भी अमेरिका के साथ पर्याप्त संपर्क या बांड पेशकश में प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी।

उन्होंने बताया कि 75 करोड़ डॉलर की बांड बिक्री अमेरिका के बाहर नियम 144A और विनियमन S छूट के तहत आयोजित की गई थी। इसके तहत प्रतिभूतियां गैर-अमेरिकी अंडरराइटरों को बेची गईं और बाद में केवल योग्य संस्थागत खरीदारों को आंशिक रूप से फिर से बेची गईं।

वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में यह आरोप नहीं है कि गौतम अडानी ने बांड जारी करने को मंजूरी दी, प्रमुख बैठकों में भाग लिया, या अमेरिकी निवेशकों पर लक्षित किसी गतिविधि का निर्देशन किया।

इस फाइलिंग में यह भी तर्क दिया गया है कि SEC का मामला अनुचित रूप से अतिरिक्त-क्षेत्रीय (extraterritorial) है। इसमें यह बताया गया है कि प्रतिभूतियां अमेरिका में सूचीबद्ध नहीं थीं, जारीकर्ता भारतीय है, और कथित कदाचार पूरी तरह से भारत में हुआ है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व उदाहरणों का हवाला देते हुए प्रतिवादियों ने कहा कि SEC किसी भी “घरेलू लेनदेन” को दिखाने में विफल रहा है, जो कि अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों को लागू करने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है।

उन्होंने आगे कहा कि SEC किसी भी निवेशक के नुकसान का आरोप नहीं लगाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बांड की परिपक्वता अवधि पूरी हो गई थी और 2024 में ब्याज सहित इसका पूरा भुगतान कर दिया गया था।

उन्होंने अंतर्निहित रिश्वत के आरोपों का भी खंडन किया और कहा कि इन दावों का समर्थन करने वाला कोई विश्वसनीय सबूत मौजूद नहीं है।

फाइलिंग में तर्क दिया गया है कि SEC द्वारा उद्धृत बयान, जो ईएसजी (ESG) प्रतिबद्धताओं, भ्रष्टाचार विरोधी प्रथाओं और कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा से संबंधित हैं, वह केवल सामान्य कॉर्पोरेट आशावाद है जिस पर निवेशक उचित रूप से निर्भर नहीं हो सकते और यह कार्रवाई योग्य नहीं है।

इसमें आगे कहा गया है कि SEC किसी भी प्रतिवादी को विशिष्ट भ्रामक बयानों से जोड़ने या धोखाधड़ी के इरादे को प्रदर्शित करने में विफल रहा है।

प्रतिवादी इस मामले को पूरी तरह से खारिज करने की मांग कर रहे हैं। अदालत ने शिकायत को खारिज करने के प्रत्याशित प्रस्ताव पर प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस के लिए प्रतिवादियों के अनुरोध वाले पत्र को प्राप्त कर लिया है ।

अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए पार्टियों को कॉन्फ्रेंस का समय निर्धारित करने का निर्देश दिया है । यह आदेश 7 अप्रैल 2026 को जज निकोलस जी. गराउफिस द्वारा पारित किया गया है।

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