गांधीनगर: गुजरात सरकार जल्द ही विवाह प्रमाणपत्रों (मैरिज सर्टिफिकेट) में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब दूल्हा और दुल्हन की तस्वीरों के साथ इन प्रमाणपत्रों को जारी करने पर विचार किया जा रहा है।
उम्मीद है कि स्थानीय निकाय चुनावों के संपन्न होने के बाद, अगले कुछ महीनों में इस नई व्यवस्था को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा। राज्य में पहली बार उठाया जा रहा यह कदम ‘गुजरात विवाह पंजीकरण नियम, 2006’ को और अधिक मजबूत बनाने की एक अहम कवायद है।
शीर्ष सरकारी सूत्रों का कहना है कि भविष्य में इस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता को और पुख्ता करने के लिए इसमें बायोमेट्रिक जानकारी भी जोड़ी जा सकती है। पासपोर्ट बनवाने, संपत्ति के पंजीकरण और कानूनी विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों में विवाह प्रमाणपत्र एक बेहद जरूरी दस्तावेज होता है।
वर्तमान में आचार संहिता लागू होने के कारण, विवाह प्रमाणपत्र से जुड़े इस बड़े बदलाव को स्थानीय निकाय चुनावों के खत्म होने के बाद ही अमलीजामा पहनाया जाएगा। इसी साल फरवरी में सरकार ने नियमों में कुछ संशोधन जारी किए थे, जिनमें विवाह करने वाले युगल के माता-पिता को सूचित करने का प्रावधान शामिल था।
इन संशोधनों पर नागरिकों और संस्थाओं से सुझाव व आपत्तियां मांगी गई थीं, जिसके जवाब में सरकार को कुल 127 प्रतिक्रियाएं मिली हैं। तस्वीरों को शामिल करने का यह नया प्रस्ताव हाल के महीनों में सामने आए फर्जीवाड़ा मामलों के बाद लाया गया है।
पंचमहल जैसे जिलों में फर्जी विवाह प्रमाणपत्र जारी होने के कई मामले पकड़े गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, साल 2024 से 2026 के बीच अकेले पंचमहल में 4,600 से अधिक फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।
इसके अलावा, कुछ ऐसे हैरान करने वाले मामले भी सामने आए जहां उन गांवों में अल्पसंख्यक समुदाय के ‘निकाह प्रमाणपत्र’ जारी कर दिए गए, जहां उस समुदाय का एक भी परिवार निवास नहीं करता था। जनता की प्रतिक्रिया के लिए तय की गई 30 दिन की अवधि के दौरान, विवाह पंजीकरण के प्रस्तावित बदलावों पर कई तरह के विचार सामने आए।
इन सुझावों में माता-पिता की सहमति के बिना विवाह करने वाले बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने, पंजीकरण के समय दोनों माता-पिता की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य करने और लड़की के निवास क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में ही विवाह पंजीकृत कराने जैसी बातें शामिल थीं।
वहीं, प्रस्तावित बदलावों पर आपत्तियां भी दर्ज कराई गई हैं। विरोध करने वालों का तर्क है कि पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान माता-पिता को अनिवार्य रूप से सूचित करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
सरकार को ऐसे प्रतिवेदन भी मिले हैं जिनमें कहा गया है कि इन बदलावों से एक सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया निगरानी का साधन बन जाएगी। इसके साथ ही, विवाह के विस्तृत विवरण को किसी सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करने से लोगों की निजता पूरी तरह से खतरे में पड़ जाएगी।
यह भी पढ़ें-
रिलायंस फाउंडेशन और सी-डैक ने ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘ई-सेफहर’ (e-safeHer) किया लॉन्च
राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों से फिर गरमाई बहस: ‘रणनीति’ या मानसिक अस्थिरता?











