गुजरात एटीएस और भारतीय तटरक्षक बल (Coast Guard) ने मुंद्रा बंदरगाह के पास एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। सुरक्षा एजेंसियों ने ‘एमवी यूरोप’ नामक एक विशाल मालवाहक जहाज से 1,150 करोड़ रुपये की 115 किलोग्राम कोकीन जब्त की है।
भारत के इस सबसे बड़े समुद्री मादक पदार्थ विरोधी अभियान के खत्म होने से पहले, यह जहाज लगभग 196 दिनों तक समंदर की लहरों को चीरता रहा। इस लंबी यात्रा के दौरान इसने सात देशों के 23 बंदरगाहों पर 40 बार रिकॉर्ड ठहराव किया।
वरिष्ठ एटीएस अधिकारियों की गहन जांच में दक्षिण अमेरिका से भारत तक फैले एक बेहद जटिल समुद्री रूट का खुलासा हुआ है।
अधिकारियों के मुताबिक, कोकीन की इस भारी भरकम खेप के बारे में पहली खुफिया जानकारी पिछले साल मई में ही मिल गई थी। उस वक्त इस नशे को जहाज पर पैक किया जा रहा था और इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से भेजने की साजिश रची जा रही थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कोकीन मूल रूप से ब्राजील से चली थी। भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने से पहले यह जहाज कई देशों के अधिकार क्षेत्रों से होकर गुजरा और महीनों तक यह नशा जहाज के मोटर रूम में सुरक्षित छिपा रहा। एटीएस द्वारा खंगाले गए शिपिंग रिकॉर्ड्स से स्पष्ट होता है कि जहाज का पहला आधिकारिक ठहराव 11 नवंबर 2025 को ब्राजील के साओ विसेंट में हुआ था।
अपने सफर के अगले कुछ महीनों में, यह जहाज पनामा नहर में प्रवेश करने से पहले ब्राजील, अर्जेंटीना और उरुग्वे के विभिन्न बंदरगाहों से होकर गुजरा। इसके बाद इसने बहामास, डोमिनिकन गणराज्य और संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट के कई बंदरगाहों का सफर तय किया।
एटीएस अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज ने ब्राजील, पनामा और अमेरिका के कुछ बंदरगाहों और लंगरगाहों का बार-बार दौरा किया, जिसके परिणामस्वरूप पूरी यात्रा के दौरान इसके 40 स्टॉप दर्ज किए गए।
सात समंदर पार करने के बाद आखिरकार इस मालवाहक जहाज ने दक्षिण एशिया का रुख किया। यह 19 मई को मुंबई के पास जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) पहुंचा, फिर 22 मई को पाकिस्तान के पोर्ट कासिम गया और अंततः 26 मई को मुंद्रा पहुंचा।
अधिकारियों ने बताया कि यह जहाज लगभग दो दिनों तक मुंद्रा के बाहरी लंगरगाह पर खड़ा रहा। दरअसल, यह वहां एक अन्य जहाज का इंतजार कर रहा था जिसे इस नशे की खेप को आगे ले जाना था।
तटरक्षक बल और एटीएस की लगातार पैनी नजर ने तस्करों के इस शातिर मंसूबे पर पूरी तरह पानी फेर दिया। एटीएस की जांच के अनुसार, जमीन पर ले जाने से पहले कोकीन को बाहरी लंगरगाह में ही दूसरी नाव पर शिफ्ट किया जाना था। जांचकर्ताओं को यह भी संदेह है कि भारत इस पूरी खेप की अंतिम मंजिल नहीं था।
एक अधिकारी ने बताया कि इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि भारत को एक वितरण केंद्र (distribution point) के रूप में इस्तेमाल किया जाना था।
ड्रग माफियाओं का यह एक बहुत पुराना तरीका है, जिसमें माल को किसी एक देश में डंप किया जाता है और फिर हवाई मार्ग से छोटे-छोटे पैकेटों में अन्य देशों में सप्लाई किया जाता है। एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस खेप का कोई हिस्सा हवाई मार्ग से दूसरे देशों में भेजा जाना था।
यह शानदार जब्ती 25-26 मई की मध्यरात्रि को किए गए एक बेहद सघन और गोपनीय अभियान के बाद हुई। जैसे ही तटरक्षक दल रात के अंधेरे में जहाज के करीब पहुंचे, चालक दल के सदस्यों ने घबराहट में कोकीन से भरे बैग समुद्र में फेंकने शुरू कर दिए। हालांकि, जवानों की मुस्तैदी से पांच बैग तुरंत बरामद कर लिए गए, जिससे कोकीन के 115 पैकेट हाथ लगे।
गुजरात एटीएस के सूत्रों ने गायब हुए कोकीन के पैकेटों को लेकर एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। पूछताछ में पता चला है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए फेंके गए पैकेटों के अलावा, चालक दल ने रास्ते में ही बचे हुए स्टॉक में से एक पैकेट बेच दिया था।
सूत्रों का कहना है कि लंबी यात्रा के दौरान आसान पैसे कमाने के लिए तस्करों के चालक दल द्वारा कुछ माल की हेराफेरी करना एक आम बात है। फिलहाल, जांच एजेंसियां उस बिक्री से कमाए गए पैसे के सुराग तलाशने में पूरी ताकत से जुटी हुई हैं।
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