अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के महज पांच मिनट बाद ही एयर इंडिया का विमान भीषण हादसे का शिकार हो गया था। ब्रिटेन के गैटविक जा रही एआई-171 (AI-171) उड़ान के इस खौफनाक क्रैश को लगभग एक साल पूरा होने वाला है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक व्यक्ति को छोड़कर विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी।
आगामी 12 जून को इस दर्दनाक विमान दुर्घटना की पहली बरसी है। इस मौके पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जारी करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह रिपोर्ट मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित होगी कि टेक-ऑफ के कुछ नैनोसेकंड के भीतर ही रैम एयर टर्बाइन (RAT) क्यों तैनात हो गया था। हालांकि, हादसे के सटीक कारणों को लेकर यह रिपोर्ट पूरी तरह से ‘अनिर्णायक’ साबित हो सकती है।
इस भयावह हादसे में जमीन पर मौजूद 19 लोगों सहित कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। उड़ान के दौरान किसी बड़ी तकनीकी विफलता का संकेत देने वाले आरएटी (RAT) का अचानक खुलना ही पिछले एक साल से चल रही जांच के केंद्र में रहा है। जांचकर्ता लगातार उन घटनाओं की कड़ी को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी वजह से यह बड़ा हादसा हुआ।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने हाल ही में जानकारी दी थी कि एएआईबी (AAIB) की जांच अब अपने अंतिम चरण में है। जांच प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट को अमेरिकी जांच एजेंसी नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी बोर्ड (NTSB) के साथ ‘सहमति चर्चा’ के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा।
दुर्घटनाग्रस्त विमान एक ड्रीमलाइनर था, जिसका निर्माण अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने किया था।
विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसी उड़ान के दौरान सिस्टम फेल होने का एक स्पष्ट ब्यौरा पेश कर सकती है। जांच में एक ‘विशिष्ट’ खामी का गहन विश्लेषण किया गया है। शुरुआती रुझान बताते हैं कि यह खराबी विमान के इलेक्ट्रिकल सिस्टम से शुरू हुई, जिसके कारण बिजली वितरण और कॉकपिट सिस्टम दोनों पूरी तरह ठप हो गए और उड़ान भरते ही आरएटी तैनात हो गया।
संभावित तकनीकी खामियों के अलावा, एएआईबी ने इस मामले में पायलटों के कदमों की भी बारीकी से जांच की है। लेकिन अब तक किसी भी पायलट को इस क्रैश से जोड़ने वाले कोई ठोस परिस्थितिजन्य सबूत नहीं मिले हैं। उड़ान के दौरान कैप्टन सुमीत सभरवाल मुख्य पायलट थे, जबकि क्लाइव कुंदर को-पायलट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जांच अधिकारी के मुताबिक कुंदर ने ही एटीसी को ‘मेडे’ (Mayday) कॉल दी थी।
जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआत से ही यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि टेक-ऑफ करते ही विमान सीधे आपातकालीन बैकअप मोड में कैसे चला गया। ईएएफआर (एन्हांस्ड एयरक्राफ्ट फ्लाइट रिकॉर्डर) के आंकड़ों, हादसे में जीवित बचे एकमात्र व्यक्ति के बयान और कॉकपिट व अहमदाबाद एटीसी के बीच हुई बातचीत का भी गहनता से मिलान किया गया है।
इससे पहले 12 जुलाई, 2025 को जारी एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया था कि शुरुआती चढ़ाई के दौरान आरएटी खुल गया था और टेक-ऑफ के लगभग आठ सेकंड बाद ही इसने हाइड्रोलिक पावर की आपूर्ति शुरू कर दी थी।
आधुनिक विमानों में आरएटी का खुलना गंभीर इलेक्ट्रिकल या हाइड्रोलिक पावर के नुकसान का संकेत है। जांच में मैनुअल तैनाती की संभावना को भी खंगाला गया, लेकिन निष्कर्ष बताते हैं कि यह एक स्वचालित सिस्टम प्रतिक्रिया थी।
अधिकारी ने आगे बताया कि जांच में इस बात पर भी गौर किया गया कि विमान 180 नॉट्स की अधिकतम गति तक पहुंचने के बाद अचानक थ्रस्ट कैसे खो बैठा। यहां तक कि हवाई अड्डे की सीमा पार करने से पहले ही विमान नीचे गिरने लगा था और इसकी गति वीआर (155 kt) और वी2 (162 kt) से भी नीचे आ गई थी।
वीआर (Vr) वह गति है जिस पर पायलट विमान की नाक उठाकर चढ़ाई शुरू करता है, जबकि वी2 (V2) इंजन फेल होने की स्थिति में भी सुरक्षित चढ़ाई सुनिश्चित करने वाली लक्ष्य गति होती है।
यह गति में गिरावट बिल्कुल उसी समय हुई जब पायलटों ने एटीसी को थ्रस्ट कम होने का संदेश दिया था। इस पूरी बातचीत के दौरान पायलट ने किसी भी ऐसी अप्रत्याशित या अवांछित मानवीय गलती का कोई जिक्र नहीं किया था, जो इस भयंकर आपदा का कारण बन सकती थी।
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