अमेरिका ने गुपचुप तरीके से गैर-आप्रवासी (non-immigrant) वीजा आवेदकों के लिए दो नए सवाल जोड़े हैं। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर भविष्य में शरण (asylum) मांगने वालों पर पड़ेगा। इन नियमों के दायरे में टूरिस्ट, स्टूडेंट और वर्क वीजा पर अमेरिका जाने वाले हजारों भारतीय भी आएंगे।
वीजा प्रक्रिया के दौरान अब आवेदकों से पूछा जा रहा है कि क्या उन्होंने अपने देश या पिछले निवास स्थान पर किसी तरह के नुकसान या दुर्व्यवहार का सामना किया है। इसके साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि क्या उन्हें अपने देश या स्थायी निवास पर लौटने पर नुकसान या दुर्व्यवहार का डर है।
इमिग्रेशन वकीलों के अनुसार, इनमें से किसी भी सवाल का जवाब “हां” देने पर वीजा इंटरव्यू के दौरान तुरंत संदेह पैदा हो सकता है और वीजा खारिज किया जा सकता है।
हालांकि, सबसे बड़ी चिंता इसके उलट स्थिति में है। जो आवेदक वीजा पाने के लिए इन सवालों का जवाब “नहीं” देते हैं, उन्हें अमेरिका में प्रवेश करने के बाद शरण के लिए आवेदन करते समय अपनी विश्वसनीयता साबित करने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
यह घटनाक्रम भारतीयों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में भारतीय नागरिकों द्वारा शरण के दावों में तेजी से वृद्धि हुई है।
भारतीयों के शरण दावों में भारी उछाल
हालिया अमेरिकी इमिग्रेशन आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में 41,000 से अधिक भारतीयों ने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया था। इससे भारत शरण चाहने वालों के सबसे तेजी से बढ़ते स्रोतों में से एक बन गया है।
इनमें से एक बड़ी संख्या पंजाब और गुजरात से आने वाले आवेदकों की है। इन क्षेत्रों में अनियमित प्रवास नेटवर्क, मानव तस्करी मार्गों और लैटिन अमेरिका तथा मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में अवैध सीमा पार करने के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अमेरिकी अधिकारियों ने दक्षिणी सीमा से प्रवेश करने की कोशिश कर रहे भारतीय प्रवासियों की बढ़ती संख्या पर बार-बार चिंता जताई है। ये लोग अक्सर पनामा, निकारागुआ और मैक्सिको जैसे देशों से होकर लंबी और खतरनाक यात्राएं करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए वीजा सवाल विशेष रूप से उन लोगों की पहचान करने के लिए बनाए गए हैं जो कानूनी रूप से अमेरिका में प्रवेश करने के बाद शरण मांगने का इरादा रख सकते हैं।
वीजा आवेदकों पर नए सवालों का असर
पिट्सबर्ग स्थित इमिग्रेशन वकील एलेन फ्रीमैन ने कहा कि अमेरिकी कांसुलर अधिकारी अब यूएस इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट की धारा 214(b) के तहत और अधिक सख्त जांच कर सकते हैं।
यह प्रावधान यह मानकर चलता है कि प्रत्येक गैर-आप्रवासी वीजा आवेदक स्थायी रूप से बसने का इरादा रखता है, जिसमें पर्यटक और छात्र भी शामिल हैं। ऐसा तब तक माना जाता है जब तक कि वे अपने देश से मजबूत संबंधों को साबित न कर दें। फ्रीमैन के मुताबिक, अमेरिकी कांसुलर अधिकारियों को धारा 214(b) को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए जाएंगे।
कानून के तहत, आवेदकों को यह दिखाना होगा कि वे अमेरिका की अपनी अस्थायी यात्रा के बाद स्वदेश लौट आएंगे। अगर अधिकारियों को जरा भी शक होता है कि कोई व्यक्ति स्थायी रूप से रुक सकता है या बाद में शरण मांग सकता है, तो वीजा देने से इनकार किया जा सकता है।
वहीं, एच-1बी (H-1B) या एल-1 (L-1) श्रेणियों के तहत आवेदन करने वाले कुशल कर्मचारियों के लिए धारा 221(g) के तहत मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। यह धारा अस्थायी इनकार या अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया की अनुमति देती है।
शरण मांगने वालों के लिए एक बड़ा जाल
इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि यह नई प्रणाली वीजा आवेदकों के लिए एक गंभीर दुविधा पैदा करती है। अगर आवेदक वीजा इंटरव्यू के दौरान अपने देश में डर या दुर्व्यवहार की बात स्वीकार करते हैं, तो उन्हें तुरंत रिजेक्शन का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारी यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि वे स्थायी रूप से अमेरिका में बसना चाहते हैं।
लेकिन अगर वे वीजा प्राप्त करने के लिए किसी भी तरह के डर से इनकार करते हैं और बाद में अमेरिका में शरण के लिए आवेदन करते हैं, तो अधिकारी उनके पुराने बयानों का इस्तेमाल करके उनके दावे की विश्वसनीयता को चुनौती दे सकते हैं।
फ्रीमैन ने चेतावनी दी है कि सवालों के नकारात्मक जवाब के आधार पर वीजा प्राप्त करने वाला कोई भी व्यक्ति अगर बाद में अमेरिका में शरण मांगता है, तो उसके दावे की सच्चाई पर सवाल उठाए जाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की विसंगतियां शरण आवेदनों को गंभीर रूप से कमजोर कर सकती हैं, क्योंकि अमेरिका के शरण कानून में विश्वसनीयता सबसे अहम स्तंभों में से एक है।
गुजरात और पंजाब पर विशेष नजर
अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने पंजाब और गुजरात से होने वाले पलायन पर अपना ध्यान तेजी से केंद्रित किया है। पिछले एक दशक में इन दोनों राज्यों से उत्तरी अमेरिका की ओर बड़े पैमाने पर लोगों ने पलायन किया है।
गुजरात में, विशेषकर मेहसाणा, गांधीनगर और सौराष्ट्र के कुछ हिस्सों में, अमेरिका जाना सामाजिक गतिशीलता और आर्थिक आकांक्षाओं से गहराई से जुड़ गया है। कई स्थानीय नेटवर्क लोगों को कानूनी, अर्ध-कानूनी या अवैध तरीकों से विदेश यात्रा करने में मदद करते हैं।
पंजाब में भी इसी तरह का चलन देखा गया है। यहां कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों को ‘डंकी रूट’ (donkey routes) के जरिए विदेश भेजने के लिए भारी रकम खर्च करते हैं। इन रास्तों में कई देश और अवैध सीमा पार करने की प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
अमेरिकी अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है कि अस्थायी वीजा पर प्रवेश करने वाले कई लोग बाद में शरण के दावों की ओर रुख कर सकते हैं। वे इमिग्रेशन अदालतों में लंबित मामलों का फायदा उठाते हैं, जिससे आवेदकों को अपने मामलों की सुनवाई होने तक वर्षों तक देश में रहने की अनुमति मिल जाती है।
इमिग्रेशन नियमों में व्यापक सख्ती
वीजा स्क्रीनिंग के इन अतिरिक्त सवालों को अमेरिका के सख्त होते इमिग्रेशन नियंत्रणों के एक बड़े हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। अवैध इमिग्रेशन और शरण के दुरुपयोग को लेकर अमेरिका में राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
हाल के वर्षों में, अमेरिकी अधिकारियों ने जांच प्रक्रियाओं को सख्त किया है, सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ाई है और धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों पर नकेल कसी है। विश्लेषकों का कहना है कि ये नए सवाल वाशिंगटन के भीतर इस बढ़ती चिंता को भी दर्शाते हैं कि शरण को अब उत्पीड़न से जुड़े दावों के बजाय पलायन के एक वैकल्पिक रास्ते के रूप में अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेष रूप से छात्रों, पर्यटकों और अस्थायी कर्मचारियों के लिए, इन बदलावों का मतलब कठिन वीजा इंटरव्यू और परिवार, रोजगार या वित्तीय स्थिरता के बारे में विस्तृत पूछताछ हो सकता है।
ये नए उपाय उन वैध आवेदकों के बीच भी चिंता बढ़ा सकते हैं, जिन्हें डर है कि वीजा इंटरव्यू के दौरान दिए गए उनके सामान्य जवाब भी भविष्य में उनके इमिग्रेशन विकल्पों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
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