अमेरिका में बुजुर्ग नागरिकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप में सजा काट रहे अहमदाबाद के नारनपुरा निवासी 44 वर्षीय एक व्यक्ति ने भारत सरकार से कूटनीतिक मदद की गुहार लगाई है। इलिनोइस के थॉमसन स्थित फेडरल करेक्शनल इंस्टीट्यूशन (FCI) में बंद नीरव पटेल का दावा है कि उसे गलत तरीके से जेल में डाला गया है।
नीरव के मुताबिक, उसे उसके ही एक रिश्तेदार ने इस झूठे मामले में फंसाया है, जो कथित तौर पर अहमदाबाद से एक फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क चलाता था।
प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से मांगी मदद
अपनी रिहाई के लिए नीरव ने 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), विदेश मंत्रालय और गुजरात के संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत पत्र लिखकर कानूनी और मानवीय सहायता की मांग की है। अमेरिकी अदालत के दस्तावेजों में केस नंबर 23-CR-30076 के तहत दर्ज इस मामले में, नीरव को अमेरिकी बुजुर्गों के साथ हुई धोखाधड़ी के लिए जून 2025 में 12 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
रिश्तेदार पर लगाया धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड होने का आरोप
अपने पत्र में नीरव ने आरोप लगाया है कि इस पूरे गोरखधंधे का मास्टरमाइंड उसका रिश्तेदार दिनेश उर्फ “भोला” या “डैनी” पटेल है। दिनेश मूल रूप से नारनपुरा का ही रहने वाला है और वर्तमान में जॉर्जिया के अटलांटा में रहता है। नीरव का कहना है कि दिनेश कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण के साथ “नारनपुरा गाम, अहमदाबाद” से एक संगठित कॉल-सेंटर गिरोह संचालित करता था।
‘महज 400 डॉलर के लिए मोहरे की तरह हुआ इस्तेमाल’
नीरव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसने अपने शिकायती पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है:
“अमेरिकी सरकार ने मुझ पर बुजुर्ग अमेरिकी नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। मैं पूरी सत्यनिष्ठा के साथ यह दावा करता हूं कि ये सभी आरोप पूरी तरह से झूठे और निराधार हैं।”
उसका कहना है कि उसे एक निर्दोष मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया। नीरव के अनुसार, उसके रिश्तेदार ने उसे कुछ कानूनी भुगतान और दस्तावेज इकट्ठा करने के बहाने महज 400 अमेरिकी डॉलर की मामूली रकम देकर इस काम में लगा दिया था, और वह इस काम की असलियत से पूरी तरह अनजान था।
सोने के बिस्कुट लाते समय हुई गिरफ्तारी
सरकार को भेजे गए ज्ञापन के अनुसार, नीरव ने शुरुआत में तीन बार अमेरिकी वीजा के लिए आवेदन किया था जो खारिज हो गया था। बाद में वह विजिटर वीजा पर अमेरिका पहुंचा। नीरव ने बताया कि शुरुआत में उसने वहां एक टैक्सी ड्राइवर के रूप में काम किया।
इसके बाद उसके रिश्तेदार ने उसे सोने के बिस्कुट (Gold Bars) लाने के काम पर भेज दिया, जिसके तुरंत बाद संघीय एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जेल में बंद इस व्यक्ति ने अपने परिवार पर पड़े इस घटना के दुखद प्रभाव का भी जिक्र किया है। उसने बताया कि पैसों की कमी और सही इलाज न मिल पाने के कारण उसकी मां का निधन हो गया, और वह उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सका।
उसके अस्सी वर्षीय पिता के हाथ और पैर में फ्रैक्चर है, इसके बावजूद परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें मजबूरी में ऑटोरिक्शा चलाना पड़ रहा है। गंभीर आर्थिक तंगी के कारण नीरव के बच्चों को बीच में ही अपनी स्कूल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी है।
खुद को एक “निर्दोष और असहाय भारतीय” बताते हुए, नीरव ने भारतीय अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उसने मांग की है कि वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और शिकागो के महावाणिज्य दूतावास को उसे पूर्ण कांसुलर एक्सेस, कानूनी सहायता और अन्य आवश्यक मदद मुहैया कराने के उचित निर्देश दिए जाएं।
यह भी पढ़ें-
एक परिवार, कई दल: तमिलनाडु और पुडुचेरी की राजनीति में मार्टिन साम्राज्य का बढ़ता वर्चस्व









