लखनऊ विश्वविद्यालय में एक सहायक प्रोफेसर द्वारा छात्रा को अनुचित दबाव में डालने का गंभीर मामला सामने आया है। जूलॉजी विभाग की एक बीएससी छात्रा ने प्रशासन को फोन कॉल की कुछ रिकॉर्डिंग सौंपी हैं, जिनसे खुलासा हुआ है कि प्रोफेसर परीक्षा के लीक हुए पेपर का लालच देकर उसका लगातार उत्पीड़न कर रहा था।
इस मामले में मुख्य रूप से दो पहलू सामने आए हैं। पहला, फोन पर हुई वह आपत्तिजनक बातचीत जिसमें प्रोफेसर छात्रा से अनुचित फायदे की मांग कर रहा है। दूसरा पहलू कथित पेपर लीक से जुड़ा है, जो ऐसे समय में और भी संवेदनशील हो जाता है जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) पेपर लीक मामले की जांच कर रहा है।
वायरल हुए ऑडियो में सहायक प्रोफेसर परमजीत सिंह को छात्रा पर परीक्षा से पहले मिलने का दबाव बनाते हुए सुना जा सकता है। प्रोफेसर कहता है कि “डार्लिंग, मैंने तुम्हारे लिए दो पेपर निकाल लिए हैं। तुम मुझसे मिलने कब आ रही हो?”
इसके जवाब में छात्रा कहती है कि उसने पढ़ाई कर ली है और अपना सिलेबस भी पूरा कर लिया है। जब प्रोफेसर पूछता है कि क्या वह एक बार भी मिलने नहीं आएगी, तो छात्रा घर के कामों का हवाला देते हुए आने की कोशिश करने की बात कहती है। इस पर प्रोफेसर उसे साफ हिदायत देता है कि वह कोशिश न करे, बल्कि परीक्षा से पहले सात दिनों के भीतर उससे मिलने आए।
कॉल खत्म होने के बाद के हिस्से में छात्रा यह दावा करती सुनाई देती है कि प्रोफेसर उसे फिर से छेड़छाड़ करने के इरादे से बुला रहा है।
इस घटना के बाद छात्रा ने दोनों ऑडियो क्लिप विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दिए। सबूत मिलने के तुरंत बाद लखनऊ विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पूरी घटना की गहराई से जांच करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक समिति का गठन भी किया है।
स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रोफेसर को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, प्रोफेसर परमजीत सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसने बचाव में दावा किया है कि विश्वविद्यालय की ‘आंतरिक राजनीति’ के तहत उसे इस झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।
इस घटना को लेकर छात्रों में भारी रोष है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
एबीवीपी की लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष जय श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन, स्थानीय पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार को आरोपी के खिलाफ यौन उत्पीड़न और परीक्षा की शुचिता भंग करने से जुड़े सख्त प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करना चाहिए।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस विवाद पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कुलपति जेपी सैनी ने आंतरिक शिकायत समिति को महज 24 घंटे के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।
इससे पूर्व, विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी थी कि शुक्रवार को प्रॉक्टर कार्यालय में आरोपी प्रोफेसर, पीड़ित छात्रा और कुछ अन्य छात्रों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। इस मामले में जांच की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर ही कोई ठोस फैसला लिया जाएगा।
यह भी पढ़ें-








