मंगलवार को आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान एक खास शब्द ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह शब्द था ‘संबंध’। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अपने संबोधन में इस शब्द का इस्तेमाल किया, तो आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्टून फ्रोस्टाडोटिर इसकी भाषाई और भावनात्मक गहराई से काफी प्रभावित हुईं।
क्रिस्टून फ्रोस्टाडोटिर ने इस बात पर जोर दिया कि यह शब्द भारत और आइसलैंड के बीच एक खूबसूरत जुड़ाव को दर्शाता है। पीएम मोदी के संबोधन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों की बदौलत आइसलैंड से भारत में होने वाले निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
आइसलैंड की प्रधानमंत्री ने दोनों देशों की साझेदारी पर बात करते हुए कहा कि हम साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि उन्हें ‘संबंध’ शब्द से प्यार हो गया है। उनके मुताबिक, यह पूरी तरह से एक आइसलैंडिक शब्द भी है और आज के समय में दुनिया को ऐसे ही मजबूत ‘संबंध’ की सबसे ज्यादा जरूरत है।
इससे पहले सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने भी दोनों क्षेत्रों के विचारों की समानता को दर्शाने के लिए इस शब्द का प्रमुखता से जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि हिंदी की ही तरह कई नॉर्डिक भाषाओं में भी ‘संबंध’ का मतलब जुड़ाव और रिश्ता होता है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह महज शब्दों की समानता नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों की नजदीकियों को भी दिखाता है। उन्होंने सभी क्षेत्रों में आपसी रिश्तों को और गहरा करने का आह्वान करते हुए भारत-नॉर्डिक साझेदारी को साझा समृद्धि, नवाचार और एक स्थायी भविष्य का बेहतरीन मॉडल बनाने पर जोर दिया।
इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में भारत के साथ-साथ पांच नॉर्डिक देशों ने हिस्सा लिया। इनमें डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के नेता शामिल थे।
इस अहम बैठक का मुख्य उद्देश्य भविष्य के आपसी सहयोग के लिए एक साझा दृष्टिकोण तैयार करना था। सम्मेलन के दौरान नेताओं ने मुख्य रूप से स्थिरता, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और उन्नत तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
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