दशकों से अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रहने वाले भारतीय ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ नामक प्रक्रिया के जरिए वहां रहते हुए ही स्थायी निवास के लिए आवेदन करते रहे हैं। अमेरिका ने अब इस रास्ते को लगभग बंद करने का फैसला किया है। ग्रीन कार्ड आवेदकों को अब आवेदन करने के लिए अपने गृह देश लौटने को कहा गया है।
शुक्रवार (22 मई) को अमेरिका ने देश में स्थायी निवास प्राप्त करने के नियमों को काफी सख्त कर दिया। इस कदम ने अस्थायी वीजा पर रह रहे उन लाखों भारतीयों की चिंता बढ़ा दी है, जो लंबे समय से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) की देखरेख करने वाले ‘यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ ने एक बड़ी घोषणा की है। विभाग के अनुसार ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वालों को अब अपने मूल देश वापस जाना होगा। यह फैसला आधी सदी से अधिक समय से चली आ रही पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से पलट देता है।
लोग दो अलग-अलग तरीकों से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहला तरीका विदेश में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास जाना है, जबकि दूसरा तरीका अमेरिका में मौजूद रहते हुए ही आवेदन करना है जिसे “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” कहा जाता है।
यूएससीआईएस (USCIS) का नया नीति ज्ञापन इसी दूसरे और अधिक लोकप्रिय रास्ते को लक्षित करता है। H-1B वीजा पर काम करने वाले भारतीय पेशेवरों, F-1 से वर्क वीजा में जाने वाले छात्रों और H4 आश्रित वीजा वाले जीवनसाथियों द्वारा दशकों से इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
यह नई नीति विशेष रूप से भारतीयों के लिए अत्यधिक चिंताजनक है। EB-2 और EB-3 जैसी रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों में दशकों लंबे बैकलॉग में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। कई भारतीय पेशेवरों के लिए तो यह इंतजार 15 या 20 साल से भी अधिक का हो जाता है।
इमिग्रेशन वकीलों से इस विषय पर बातचीत कर यह समझने की कोशिश की गई है कि अमेरिका में पहले से रह रहे भारतीयों के लिए इस नए घटनाक्रम के क्या मायने हो सकते हैं।
ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए आखिर क्या बदला है?
अमेरिका में भारतीयों के लिए यूएससीआईएस की ग्रीन कार्ड नीति ही एकमात्र झटका नहीं थी। अमेरिकी विदेश विभाग ने उसी दिन एक और अहम घोषणा की। इसके तहत सितंबर 2026 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए ‘रोजगार-आधारित द्वितीय वरीयता’ (EB-2) श्रेणी के तहत भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड का कोटा समाप्त हो गया है।
इमिग्रेशन वकीलों का मानना है कि असली और गहरी चिंता यूएससीआईएस का नया ज्ञापन है। यह नया नियम “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” की प्रक्रिया को अधिकारियों के लिए काफी अधिक विवेकाधीन बना देता है।
अब तक ग्रीन कार्ड के लिए पात्र होने वाले भारतीय पेशेवर आसानी से ‘फॉर्म I-485’ दाखिल कर सकते थे। इसके बाद आवेदन पर कार्रवाई होने तक वे अमेरिका में रहना और काम करना जारी रख सकते थे।
लेकिन नया ज्ञापन अब अधिकारियों को “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” को “प्रशासनिक कृपा का एक असाधारण कार्य” मानने का निर्देश देता है। यह नीति विदेश में कांसुलर प्रक्रिया के लिए जाने के बजाय अमेरिका में रुकने और देश के भीतर से ही आवेदन करने को एक संभावित प्रतिकूल कारक के रूप में देखती है।
वाशिंगटन डीसी स्थित एक इमिग्रेशन वकील राजीव खन्ना ने बताया कि आवेदकों को अब ‘असामान्य या उत्कृष्ट इक्विटी’ का प्रदर्शन करना होगा। केवल एक साफ रिकॉर्ड और पूरी पात्रता अब अपने आप में पर्याप्त नहीं है। आपको सकारात्मक रूप से यह साबित करना होगा कि आप इस ‘कृपा’ के हकदार क्यों हैं।
यह स्थिति इसलिए भी परेशान करने वाली है क्योंकि ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ अमेरिका में स्थायी निवास पाने का सबसे लोकप्रिय जरिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024 में 1,356,760 लोगों में से 7,82,770 (58%) लोगों ने इसी रास्ते से स्थायी निवास हासिल किया था।
यह विशेष रूप से भारतीयों के लिए इतना चिंताजनक क्यों है?
इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय अमेरिका के रोजगार-आधारित इमिग्रेशन बैकलॉग में बुरी तरह से फंसे हुए हैं।
EB-2 और EB-3 रोजगार बैकलॉग श्रेणियों में भारतीय नागरिकों की संख्या बहुत ज्यादा है और उन्हें अक्सर स्थायी निवास के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। वकील खन्ना के अनुसार इनमें से कई लोगों के लिए यह इंतजार बीस साल से भी अधिक का है।
इन बीते वर्षों के दौरान कई लोगों ने अमेरिका में अपनी पूरी जिंदगी बसा ली होगी। उन्होंने घर खरीदे, बच्चों की परवरिश की, टैक्स भरा और अपना करियर बनाया। उन्हें यह उम्मीद थी कि अगर वे नियमों का पालन करेंगे तो अंततः उन्हें ग्रीन कार्ड मिल जाएगा।
वकीलों का कहना है कि अब इंतजार करते हुए सालों तक अमेरिका में उनका रहना ही एक ऐसा तथ्य बन सकता है जिसकी इमिग्रेशन अधिकारी नकारात्मक रूप से जांच कर सकते हैं।
राजीव खन्ना ने बताया कि यह ज्ञापन निर्णय लेने वाले अधिकारी को यह विचार करने के लिए कहता है कि क्या अमेरिका में उनकी लंबी उपस्थिति और कांसुलर प्रक्रिया के बजाय एडजस्टमेंट की मांग करना ही अपने आप में प्रतिकूल कारक हैं। ज्ञापन की भाषा में ही एक संरचनात्मक जोखिम छिपा हुआ है।
यदि भारतीयों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए स्वदेश लौटने पर मजबूर किया जाए तो क्या होगा?
कानूनी जानकारों का मानना है कि असली खतरा यहीं से शुरू होता है।
न्यूयॉर्क स्थित फर्म ‘विलियम्स लॉ’ की संस्थापक और इमिग्रेशन वकील एसेल विलियम्स के अनुसार इस बदलाव से नियुक्तियों का एक ‘विशाल’ बैकलॉग बन सकता है।
विलियम्स ने कहा कि यूएससीआईएस वर्तमान में अमेरिका में भौतिक रूप से मौजूद विदेशी नागरिकों के लाखों ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ आवेदनों पर निर्णय ले रहा है।
इनमें से केवल एक छोटे से हिस्से को भी कांसुलर पदों पर भेजने से विदेश विभाग पर भारी दबाव पड़ेगा। विशेष रूप से यह बदलाव सैकड़ों हजारों भारतीय मामलों को प्रभावित कर सकता है और विभाग के पास इतनी बड़ी संख्या को संभालने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
राजीव खन्ना ने आगे कहा कि भारत में मौजूद कांसुलर अधिकारियों ने पिछले कई वर्षों से रोजगार-आधारित अप्रवासी वीजा आवेदकों की एक बड़ी संख्या को प्रशासनिक प्रक्रिया में डाल दिया है।
यह प्रक्रिया महीनों या कुछ मामलों में सालों तक चल सकती है। इसके लिए कोई वैधानिक समय सीमा निर्धारित नहीं है और इस बात को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है कि यह प्रक्रिया कब शुरू होती है और कब समाप्त होगी।
ऐसी लंबी देरी संभवतः जानबूझकर की जा रही है। यह कानूनी इमिग्रेशन को प्रतिबंधित करने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के बड़े अभियान के अनुरूप प्रतीत होता है।
खन्ना ने यह भी जोड़ा कि जो आवेदक वीजा साक्षात्कार के लिए अमेरिका छोड़ता है, वह अचानक खुद को अनिश्चित काल के लिए भारत में फंसा हुआ पा सकता है। ऐसे हालात में उनके पास अपनी नौकरी नहीं होगी, उनके बच्चों की स्कूल की दिनचर्या बाधित हो जाएगी और कभी-कभी तो वे अपना रोजगार भी जारी नहीं रख पाएंगे।
एसेल विलियम्स ने चेतावनी दी है कि कांसुलर प्रक्रिया में देरी के कारण नियोक्ता भी अपने कदम पीछे खींच सकते हैं। जो लोग 2012 या 2013 से अपनी प्राथमिकता तिथियों के चालू होने का इंतजार कर रहे हैं, उन पर इसका सबसे बुरा असर पड़ेगा।
कांसुलर प्रक्रिया में देरी के कारण अमेरिकी नियोक्ता उन नौकरियों के प्रस्ताव वापस ले सकते हैं जिनके लिए उन्होंने ही सबसे पहले ग्रीन कार्ड की याचिका दायर की थी।
इसका प्रभाव H-4 वीजा वाले जीवनसाथियों के लिए विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। यदि विवेकाधीन आधार पर I-485 को अस्वीकार कर दिया जाता है और परिवार को कांसुलर प्रक्रिया की ओर धकेल दिया जाता है, तो ‘H-4 रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज़’ की मान्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
इसका सीधा सा अर्थ यह है कि जो जीवनसाथी सालों से काम कर रहा था और अक्सर मुख्य आवेदक के बैकलॉग में फंसे होने के दौरान घर चलाने में मदद कर रहा था, वह अपना कार्य प्राधिकरण खो देगा।
इमिग्रेशन वकील वर्तमान में भारतीयों को क्या सलाह दे रहे हैं?
विलियम्स का कहना है कि उनकी वर्तमान सलाह यही है कि फिलहाल ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ आवेदन दाखिल करने से बचें। जब तक इस बात पर अधिक स्पष्टता नहीं आ जाती कि यूएससीआईएस वास्तव में इस नीति को कैसे लागू करेगा, तब तक इंतजार करना ही बेहतर है।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ग्राहक एक भी इमिग्रेशन उल्लंघन बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। उन्होंने उन भारतीयों को कड़ी चेतावनी दी है जिन्होंने पहले ही एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस आवेदन दाखिल कर दिया है। उन्हें बिना कानूनी सलाह के आकस्मिक यात्रा करने से बचना चाहिए।
विलियम्स ने स्पष्ट किया कि यदि आपने पहले ही एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस आवेदन दाखिल कर दिया है और अपने मामले के लंबित रहने के दौरान वैध गैर-आप्रवासी स्थिति नहीं बनाए रखी है, तो अमेरिका छोड़ने से पहले एक इमिग्रेशन वकील से परामर्श अवश्य लें। भारत की यात्रा करने से वीजा प्रतिबंध लग सकता है और इसके परिणामस्वरूप आपका एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस आवेदन रद्द हो सकता है।
हालांकि, राजीव खन्ना का मानना है कि योग्य भारतीयों को अभी भी आवेदन करना चाहिए यदि उनकी प्राथमिकता तिथियां वर्तमान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया ज्ञापन स्वीकृतियों पर रोक नहीं लगाता है, बल्कि यह केवल मानकों को बढ़ाता है।
लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आवेदकों को अब सक्रिय रूप से अपनी कहानी बतानी होगी। खन्ना के अनुसार अब आपके आवेदन में आपकी कहानी, निवास की अवधि, आपका कर अनुपालन, आपके सामुदायिक संबंध, आपके काम पर नियोक्ता की निर्भरता, आपके परिवार की परिस्थितियां और आपके साफ रिकॉर्ड को स्पष्ट रूप से दर्शाने की आवश्यकता हो सकती है।
यह भी पढ़ें-
जॉर्जिया में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा अहमदाबाद का छात्र लापता, 10 दिन से कोई सुराग नहीं
खेल इतिहास रचने की तैयारी में अहमदाबाद: ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों पर नजरें











